उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
Children
Children|Image Source: Google
खेल

सरकार खेल की संस्कृति को विकसित करे: खेल परिषद्   

खेल को मौलिक अधिकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री से संविधान में उचित संशोधन करने का अनुरोध किया गया है जिससे देश में खेल संस्कृति विकसित हो सके।

Sneha Sinha

Sneha Sinha

नई दिल्ली : विजय कुमार मल्होत्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुई अखिल भारतीय खेल परिषद की 11वीं बैठक में खेल को मौलिक अधिकार बनाने एवं खेलों से संन्यास ले चुके खिलाड़ियों को पेंशन सुविधा प्रदान करने की सिफारिश की गई। अखिल भारतीय खेल परिषद के अध्यक्ष ने शिक्षा और भोजन के अधिकार की तरह ही खेल को भी मौलिक अधिकारों की सूची में शामिल किए जाने की हिमायत की। उन्होंने बताया कि खेल को मौलिक अधिकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री से संविधान में उचित संशोधन करने का अनुरोध किया गया है जिससे देश में खेल संस्कृति विकसित हो सके।

आईएएनएस की सूत्रों के हवाले से पता चला है की आईएएनएस खेल परिषद ने खेल को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने और खेल विषय को नर्सरी स्तर से ही बच्चों को पढ़ाए जाने की वकालत की है। बच्चों की प्रतिभा और खेल योग्यता का आंकलन प्रारंभिक स्तर से ही किया जाना चाहिए, जिससे कि प्रशिक्षण और शिक्षा के माध्यम से उनकी प्रतिभा में सुधार और विकास किया जा सके। स्कूल के बजट में खेलों के लिए अनिवार्य प्रावधान होना चाहिए जिसका उपयोग केवल खेल गतिविधियों के लिए ही किया जाए।

बैठक में उपस्थित सदस्यों ने अखिल भारतीय खेल परिषद द्वारा खेलों से संन्यास ले चुके खिलाड़ियों को पेंशन प्रदान किए जाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

मल्होत्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश के खेलों से सन्यास ले चुके खिलाड़ियों को पेशन प्रदान करने की घोषणा की है।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय के अनुरूप ही सभी राज्यों से अपने राज्य के खेलों से संन्यास ले चुके खिलाड़ियों को पेंशन प्रदान करने के लिए अनुरोध किया जाएगा।

अगर इंडियन ओलंपिक्स की बात करे तो दिल्ली सरकार ने खेलों के प्रति कोई खासा रूचि नहीं जताया था और पिछेल सालों की रिपोर्ट अगर देखते है तो यह वाक्या सत प्रतिशत सत्य भी है। अगर अपने खिलाडियों पर अपने देश की सरकार ध्यान नहीं देगी तो कौन देगा