Bholenath Saved Colonel Martin Life
Bholenath Saved Colonel Martin Life|Google
अध्यात्म

असंभव को संभव बना दे वो है भोलेनाथ, अंग्रेज की रक्षा के लिए अफगान तक दौड़े। 

आस्था कभी विज्ञान की कसौटी पर नहीं कसी जा सकती, अगर किसी ने इसकी सत्यता जानने का प्रयास भी किया तो ये मामला हमेशा संदिग्ध ही रहता है, क्योंकि आस्था हमेशा इससे परे ही होती है.

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

महाकाल पहुंचे अफगानिस्तान :

अगर आपको यह बताया जाए कि कैलाश पति भोलेनाथ किसी अंग्रेज की रक्षा के लिए अफगानिस्तान तक पहुँच गए तो शायद आपको सुनने में अटपटा लगे। लेकिन ऐसा हुआ है जिसके लिखित प्रमाण मौजूद है। दरअसल साल था 1882 का जहां एक अंग्रेज कमांडर जो कि उस वक्त मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में अधिकारी के पद और तैनात थे , उसी वक्त अंग्रेजो की अफगानी कबीलों और लड़ाकों के बीच निर्णायक युद्ध चल रहा था तभी लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन को अफगानिस्तान में अफगानियों का मुकाबला करने का निर्देश मिला। मार्टिन अपनी टुकड़ी का नेतृत्व युद्ध मे कर रहे थे। चूंकि मार्टिन का नया-नया विवाह हुआ था इसलिए युद्ध के मैदान से भी अपनी प्रिय पत्नी को सेना डाक द्वारा पत्र भेजते रहते थे। लेकिन एक वक्त के बाद उनकी पत्नी को मार्टिन के द्वारा लिखे जाने वाले पत्र मिलने बंद हो गए। मार्टिन की पत्नी ने सेना के अधिकारियों के पास इस बाबत जानकारी मांगी। लेकिन अधिकारियों ने संपर्क न होने का हवाला देकर उन्हें वापस बेरंग भेज दिया।

शिवपूजा और पति का जीवनदान:

पति की खोजखबर के लिए मार्टिन की पत्नी एक दिन अधिकारियों के बंगलो की खाक छानने निकली तभी उसे रास्ते मे एक शिवालय दिखा। गाड़ीवान से पूंछने पर जानकारी मिली कि ये भगवान शिव का मंदिर है और ये हिन्दुओं के प्रबल शक्तिशाली देव है। ये मृत्यु को भी टाल सकते है, इनसे कुछ भी छुपा नहीं है। अंग्रेज अधिकारी मार्टिन की पत्नी ने शिव मंदिर में जाकर पुजारी से पति के बारे में चिंता जताई तो पुजारी ने बताया कि शिव के लिए कुछ भी असंभव नही है, वह न सिर्फ आपके पति की रक्षा करेंगे बल्कि उन्हें सकुशल वापस लाएंगे।

मार्टिन की पत्नी ने शिव की पूजा का विधान पूँछकर सरकारी आवास में ही विधिवत पूजा का आयोजन किया और मंदिर में लगातार जाने लगी। घर मे होते अनुष्ठान के ग्यारवे दिन ही पति मार्टिन का पत्र आया।जिसमे हाल के ही दिनों में होने वाली विशेष चमत्कारी घटना का उल्लेख था।

मार्टिन ने पत्र में लिखा "प्रिय मैं अपनी टुकड़ी के साथ अफगानों से लड़ रहा था, हमारे पास एम्युनिशन और रसद बिल्कुल खत्म सी हो गयी थी, हम लंबी लड़ाई से बेहद थक चुके थे तभी अफगानों ने हमारी कमजोरी को भांपकर एक बड़ा हमला किया, इस हमले में हमारी टुकड़ी के लगभग सभी लोग मारे गए। सिर्फ मैं और एकाध और लोग ही जिंदा बचे थे, तभी अचानक वहां एक योगी आया जिसके हाँथ में तीन नुकीले तीर के निशान वाला हथियार था जिसपर डमरू बंधी हुई थी, वह इतनी भयानक गर्जना कर रहा था कि अफगान उसके वेश और उसका युद्ध कौशल देखकर ही भाग खड़े हुए, वह देखने पर कोई विशेष चमत्कारिक व्यक्ति जान पड़ता था।इस प्रकार अफगानों के भाग जाने के बाद हमारी सेना ने हमारी जान बचाई।

इस घटना के बाद जब मार्टिन युद्ध से निकल कर मालवा आये तो पत्नी ने उनसे शिवालय जाने की जिद की। मार्टिन जब मंदिर के गर्भ गृह में पहुंचा तो बिल्कुल चौंक पड़ा, उसने कहा ये तो उसी व्यक्ति की मूर्ति है जो अफगान में मुझे लड़ाकों से बचाने के लिए लड़ रहा था, और इसके हाँथ में यही हथियार (त्रिशूल) था।

मंदिर का जीर्णोद्धार और आजीवन पूजा :

शिव की शक्ति में पूरी तरह से आशक्त होने पर मार्टिन ने उस वक्त 1883 में करीब 15,000 जैसी भारी भरकम रकम से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और यह वचन लिया की वो जीवन पर्यंत शिव उपासना करेंगे और मार्टिन ने अपनी पत्नी समेत इंग्लैंड में भी शिवपूजन जारी रखा।

बीती रात भगवान शिव को अत्यंत प्रिय शिवरात्रि थी ,जिससे हमने आपके सामने यह कहानी पेश की।

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उदय बुलेटिन
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