सहजयोग आज का महायोग-कुंडलिनी जागृति एवं आत्म साक्षात्कार ऑनलाइन सार्वजनिक कार्यक्रम 2 अक्तूबर को भारत की विभिन्न भाषाओं में

सत्य को खोजने वाले सभी साधकों के लिये गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2020 को भारत की बारह भाषाओं में कुंडलिनी जागृति एवं आत्म साक्षात्कार का ऑनलाइन सार्वजनिक कार्यक्रम होने जा रहा है।
सहजयोग आज का महायोग-कुंडलिनी जागृति एवं आत्म साक्षात्कार ऑनलाइन सार्वजनिक कार्यक्रम 2 अक्तूबर को भारत की विभिन्न भाषाओं में
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सत्य को खोजने वाले सभी साधकों के लिये गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2020 को भारत की बारह भाषाओं में कुंडलिनी जागृति एवं आत्म साक्षात्कार का ऑनलाइन सार्वजनिक कार्यक्रम होने जा रहा है। प्रात: 8 बजे से रात्री 8 बजे तक यह कार्यक्रम https://www.sahajayoga.org.in/live पर प्रसारित किया जाएगा। जन कल्याण हेतु हिन्दी, अंग्रेज़ी सहित हमारी प्राचीनतम अनमोल देव भाषा संस्कृत में भी सहजयोग आत्म साक्षात्कार का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। अपनी आत्मा की जागृति का जीवन्त अनुभव अवश्य लें। सभी भाषा कार्यक्रमों के लिए कृपया संलग्नक 2 देखें।

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यह कार्यक्रम परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी की अनमोल शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए कुंडलिनी जागरण और आत्म साक्षात्कार का अनुभव करने के लिए है और आम जनता के लिए निःशुल्क है जो उनके भीतर मौजूद कुंडलिनी शक्ति के माध्यम से उनकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और उनका बचाव करने में सहायता करेगा। हालांकि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शारीरिक - मानसिक विकास एवं आध्यात्मिक उन्नति है। परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी की शिक्षाओं के अनुसार, कुंडलिनी, मनुष्य के आध्यात्मिक उत्थान और बचाव की अंतर्निहित मातृशक्ति है जो प्रत्येक व्यक्ति में विद्यमान है और उन्हें बस अपनी सुरक्षा और आध्यात्मिक उत्थान सुनिश्चित करने के लिए उसे जगाने की जरूरत है, चाहे वे किसी भी जाति, रंग, पंथ, धर्म या नस्ल के हों।

इस दिशा में हमारे सभी प्रयास पूरी तरह से निःशुल्क और स्वैच्छिक हैं, और यह वह शक्ति है जो व्यक्ति के जीवन में केवल एक ही इच्छा के साथ रहती है, की वह अपने बच्चे के जीवनकाल के दौरान जागृत हो सके, ताकि वह, कुंडलिनी शक्ति, अपने बच्चे की रक्षा कर सके और पूर्ण रूप से आशीर्वादित कर सके। आम लोगों के लिए, कुंडलिनी जागृत की प्रक्रिया 1970 में, परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी, द्वारा खोजी गई थी।

परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने जो स्वयं एक स्वतंत्रता सेनानी रहीं, सात वर्ष की आयु में महात्मा गांधी के साथ उनके आश्रम में कुछ समय बिताया। वे एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु हैं जिन्होंने हमें आत्म साक्षात्कार और कुंडलिनी जागरण का ज्ञान प्रदान किया है, ताकि वैश्विक स्तर पर इस ज्ञान और अनुभव को आगे अन्य साधकों को नि:शुल्क दिया जाए। इस प्रयोजन से 2 अक्टूबर 2020 को एक दिवसीय बहुभाषी आत्म साक्षात्कार, कुंडलिनी जागरण और सहजयोग ध्यान कार्यक्रम किया जा रहा है। हमारा अनुभव रहा है, कि कुंडलिनी शक्ति का जागरण और आत्म साक्षात्कार हमें अपने दैनिक ध्यान योग में मदद करती है, जिसके परिणामस्वरूप हमारी रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होगी और बीमारियों एवं नकारात्मक विचारों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी
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दुनिया भर में कई सरकारों ने परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी को सम्मानित किया और मानव के आध्यात्मिक उत्थान में उनके योगदान को मान्यता दी है। रूसी लोगों द्वारा अनुभव किए गए स्वास्थ्य लाभों के कारण, 1989 में सहज योग को पूर्ण रूप से सरकारी सहायता प्रदान की गई, जिसमें सोवियत संघ के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए दिया गया धन भी शामिल था, क्योंकि पहले के सोवियत संघ ने माना था कि सहजयोग से चिकित्सा पर होने वाले खर्च में कमी आती है। आध्यात्मिक उत्थान के माध्यम से वैश्विक शांति स्थापित करने के उपायों के बारे में बताने लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगातार चार वर्षों तक परम पूज्य श्री माताजी निर्मला को आमंत्रित भी किया गया था। सेंट पीटरबर्ग में वर्ष 1993 के दौरान परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी को रूस के पेट्रोव्स्काया अकादमी ऑफ़ आर्ट एंड साइंस के मानद सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। अकादमी के इतिहास में, केवल बारह लोगों को यह सम्मान दिया गया है, आइंस्टीन उनमें से एक हैं। उन्होंने इस ज्ञान को सहजयोग ध्यान के माध्यम से दुनिया भर के लाखों लोगों को मुफ्त में दिया। आत्मसाक्षात्कार हमेशा सभी धर्मों और आध्यात्मिक परंपराओं का अंतिम लक्ष्य रहा है और अलग-अलग धर्मों की शिक्षाओं में इसका अलग-अलग वर्णन किया गया है।

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हमने अनुभव किया कि साधक के भीतर एक बार जागृत कुंडलिनी शक्ति शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक मुद्दों को हल करने की क्षमता रखती है। जिन साधकों ने अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त किया है, उन्हें उनकी हथेली और तालु पर ठंडी हवा (कंपन) महसूस हुई है और इस प्रकार वैज्ञानिक रूप से साधकों ने अपने भीतर कुंडलिनी की गति को महसूस किया है। परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी और उनकी शिक्षाओं के बारे में अधिक जानकारी संलग्नक 1 में दी गई है।

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