Coronavirus and Narad Sanhita
Coronavirus and Narad Sanhita|Uday Bulletin
अध्यात्म

कोरोना इफेक्ट : क्या ज्योतिष में छुपा है कोरोना का रहस्य ? 

वैसे तो सनातन में हर एक भूत-भविष्य के क्रिया कलापों का अनुमान लगाने की बात की जाती है।अब कोरोना के संबंध में इसकी भविष्यवाणी को लेकर तमाम दावे किए जा रहे है, आखिर ये कितने सटीक हैं?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

कोरोना और नारद संहिता :

दरअसल नारद संहिता को सनातन धर्म मे किसी निर्दोषों की तरह माना जाता है, जिसमें मानवों के आचार-विचार डू और डोंट टाइप की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसमे मानव मात्र के द्वारा क्या किया जाए और क्या नहीं किया जाए इसके बारे में तमाम बातें लिखी हुई है। इसकी क्रम में विश्व भर में कहर मचाये हुए कोरोना को लेकर एक भविष्यवाणी की जा रही है जिसपर यह बताया जा रहा है कि कोरोना के बारे में पहले ही लिख दिया गया था।

क्या है तर्क ?

लोगों की माने तो कोरोना वायरस को लेकर आज से हज़ारों साल पहले ही पूर्व दिशा से आने वाली महामारी के बारे में इस नारद संहिता में लिख दिया गया था। जिसके बारे में यह बताया गया था..........

"भूपाव हो महारोगो मध्य स्यार्धवृष्ट य। दुखिनो जंत्व सर्वे वत्स रे परी धाविनी"

श्लोक का भावार्थ :- परिधावी नामक नव संवत्सर (साल) में राजाओं में परस्पर युद्घ होगा और महामारी फैलेगी। बारिश असामान्य होगी और सभी प्राणी महामारी को लेकर दुखी होंगे।

इस श्लोक में वर्तमान सवंत्सर (साल) में राजाओं के बीच आपसी वैचारिक मतभेदों के चलते किसी महामारी के फैलने (किसी बीमारी के अत्यधिक मात्रा में फैलने को महामारी माना जाता है) की बात की गई है और यह दावा किया गया है कि उक्त कोरोना वायरस के फैलने का समय 2019 का समय बिल्कुल सटीक बैठता है।

खत्म होने का भी है दावा :

हालांकि ऐसा नही है कि इस बीमारी के फैलने भर की बात कही गयी है, बल्कि इससे पहले इस बीमारी के अत्यधिक फैलने की बात को ही समझ सकते है,

जानकारों की मुताबिक जिस संवत्सर में वर्ष का अधिपति अथवा राजा शनि होता है वह वर्ष महामारियों के लिए स्वर्ग की स्थिति लाता है।

"शनिश्चर भूमिप्तो स्कृद रोगे प्रीपिडिते जना"

यही नहीं आयुर्वेद और बृहद संहिता के अनुसार जो बीमारी पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में फैलती है वह अपने चरम पर जाती है और भयानक तबाही मचा सकती है। क्योंकि इस नक्षत्र में फैले रोग में दवा का असर बिल्कुल निष्प्रभावी होता है। शायद यही कारण है कि जिस दिन चीन में यह बीमारी फैली उस दिन 26 दिसंबर 2019 को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र ही था।

डेडलाइन भी तय :

ज्योतिष के जानकारों की माने तो ये बीमारी जिस तरह अपने शबाब पर आई ठीक उसी तरह ही यह समाप्त भी होगी। चूंकि भारत मे 25 मार्च को "प्रमादी संवत्सर" नाम से नव संवत्सर शुरू होने जा रहा है, जिसकी वजह से इस बीमारी का प्रकोप समाप्त होने के आसार है।

क्या कहते है विज्ञान के जानकार :

अगर इस तर्क में वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की बात माने तो वो भले ही ज्योतिष गणना से इत्तेफाक न रखे लेकिन उसके विचार इससे इतर नजर नहीं आते। जानकारोंकी माने तो 25 मार्च के बाद से भारत मे गर्मी बढ़ेगी और किसी भी वायरस के संचरण में गर्मी किसी ब्रेकर का काम करेगी। और वायरस का फैलना स्पीड से रुक जाएगा।

जो भी हो यह वक्त ऐसा है कि आपको हमको सावधानी बरतनी है, सुरक्षा उपाय जरूर अपनाए और ईश्वर पर भरोसा रखें।

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