श्रीलंका में राजीव गाँधी गॉर्ड को ऑफ़ हॉनर
श्रीलंका में राजीव गाँधी गॉर्ड को ऑफ़ हॉनर|स्क्रीनशॉट हिन्दू माही फेसबुक पेज।
वायरल बुलेटिन

दिल्ली चुनावों के बीच गड़े मुर्दे उखड़ने लगे, लोगों ने शेयर किया राजीव गांधी के बंदूक से पिटने के वीडियो। 

यह पहला मौका था जब विदेशी धरती पर किसी भारतीय प्रधानमंत्री पर “गार्ड ऑफ ऑनर” के वक्त हमला हुआ, वो तो हमले की टाइमिंग बदल गयी वरना कुछ गलत भी हो सकता था। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

आज सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से कुछ वीडियो पोस्ट किए जा रहे है जिसमे कांग्रेस को संबोधित करते हुए लिखा जा रहा है कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डंडे से मारने की धमकी देने वाला पप्पू यह भी भूल गया है कि उसका बाप श्रीलंका में बंदूक के बट से कूटा गया था। वो भी सारी दुनिया के सामने ( हमने लिखने वाले की भाषा और शब्दों में कोई सुधार नहीं किया है, बल्कि उसे ज्यों का त्यों रख दिया है)

असल मामला यह है:

देखिए ये राजनीति है लोग जाने कहाँ-कहाँ के तिकड़म भिड़ा कर बात को गलत परिपेक्ष्य में रख देते है और मामला पूरी तरह राजनैतिक हो जाता है। ऐसा नहीं कि बात पूरी तरह से गलत हो या फिर आधे तथ्य छुपाए गए हो, ये बात बिल्कुल दूध की तरह सही है कि ऐसा हुआ था लेकिन इसके पीछे की पूरी कहानी शायद बहुत कम लोगों को ही पता हो।

ये उस वक्त की बात है जब राजीव गांधी भारत गणराज्य के सर्वेसर्वा यानी कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज थे। दिन था 29 जुलाई सन 1987 का उस वक्त तमिल संघर्ष जोरो पर था, एक प्रकार से श्रीलंका के स्थानीय और तमिलों के बीच जबरदस्त टकराव की स्थिति बन रही थी, और उस समय राजीव गांधी द्वारा इस संघर्ष को समाप्त करके शांति स्थापित करने के लिए तमाम प्रयास किये गए थे, इसी क्रम में राजीव गांधी ने भारत और श्रीलंका सरकार के साथ शांति समझौता भी कराया ताकि इस उपद्रव को शांत किया जा सके।

पीस एकार्ड समझौता और गार्ड ऑफ ऑनर :

दरअसल उसी 29 तारीख को राजीव गांधी श्रीलंका पहुंचे थे ताकि इस पर कोई सार्थक कदम उठाया जा सके, राजीव गांधी को कोलंबो में नेवी द्वारा गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था तभी एक सैनिक "विजीथा रोहन विजिमनी" द्वारा उन पर बंदूक को लाठी की तरह भांजकर हमला किया गया। लेकिन राजीव गांधी के जस्ट पीछे चल रहे दूसरे नौसेना के अधिकारी ने मौके की नजाकत भांपकर साहसिक कारनामा कर दिखाया। अधिकारी ने सैनिक की बंदूक को अपने हांथो पर लेने का प्रयास किया और इसी बीच राजीव गांधी सजग हो गए, वो बंदूक राजीव गांधी की गर्दन तक पहुँची तो लेकिन ताकत और रफ्तार बेहद कम हो गयी थी, इससे राजीव गांधी को ज्यादा चोट नहीं आई।

सैनिक राजीव गांधी और भारत सरकार से नाराज था:

चूँकि राजीव गांधी लंबे समय से तमिल हिन्दुओं और श्रीलंकाई सेना के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की कोशिश कर रहे थे इसी क्रम में राजीव गांधी ने भारतीय सेना को इस मामले में दखल देने के लिए भेज दिया जिससे भारतीय सेना (शांति सेना) युद्ध जैसे हालात में फस गयी। इस दौरान भारत के करीब 1500 शांति सैनिकों के साथ हजारो श्रीलंकाई सैनिकों ने विद्रोहियों के विरोध में जान गवाई। इसी मामले को लेकर श्रीलंकाई नौसैनिक खफा चल रहा था, हालांकि ये विद्रोह 18 मई 2009 को लिट्टे चीफ वी प्रभाकरन की मौत के साथ समाप्त हो गया।

क्या हुआ नौसैनिक का :

होना क्या था विदेशी प्रधानमंत्री पर जानलेवा हमले करने के आरोप में वेजुमनी पर मुकदमा चलाया गया और दोषी पाए जाने पर 6 साल के लिए जेल में डाल दिया गया। जेल से बाहर निकलने पर वेजुमनी ने खुद को एक ज्योतिषी की तरह प्रस्तुत किया। इसके बाद से वह तमाम प्रकार की भविष्यवाणियां करने लगा। वेजुमनी ने 2017 में श्रीलंका के प्रधानमंत्री मैत्रीपाल श्रीसेना की मौत की भविष्यवाणी भी की थी। सनद रहे कि ये भविष्यवाणी वेजुमनी ने फेसबुक के माध्यम से की थी।

राजनीति में एक दूसरे के नेताओं पर आक्षेप लगाना आम बात है लेकिन गरिमामय नेता जो अब हमारे बीच नहीं है उनके बारे में ग़ैर तर्कपूर्ण बाते रखते समय सहजता बरतनी चाहिए।

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उदय बुलेटिन
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