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Panchavarna Swami Temple
Panchavarna Swami Temple|Social Media
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पंचवर्ण स्वामी मंदिर की अद्भुद कलाकृति, उकेरी गई दीवारों में साइकिल और मोबाइल चित्रित

समय यात्रा और भविष्य यात्रा हमेशा से संदिग्ध  बने रहे है लेकिन समय-समय पर आने वाले मामलों में तर्क बेहद निरर्थक साबित हुए है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

मामला तमिलनाडु के पंचवर्ण स्वामी मंदिर से जुड़ा हुआ है, इस मंदिर की तश्वीरें बेहद वायरल हुई है जिसमे दीवारों पर उकेरी गई तश्वीरें जिसमे साइकिल और मोबाइल फोन के चित्र नजर आते है ,जिनको लेकर लोग यह बताने में जुटे है कि जिस मंदिर का समय करीब 1300 साल से लेकर 2000 साल तक पहले का है वहाँ ये चित्र क्या कर रहे है ?

Panchavarna Swami Temple
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क्या है तर्क :

समाय यात्रा और भविष्य दर्शन, हालाँकि विज्ञान इन बातों को अपने हिसाब से समाझाता है और यह कहता है कि जिन माध्यम से समय यात्रा संभव है वो यहां पूरे ही नही किये जा सकते है यहां बताते चले कि ये केवल समय यात्रा के लिए है , बल्कि भविष्य दर्शन तो एक कल्पना मानकर नकार दिया जाता है

अब जब मंदिर की दीवारों पर ये चित्र अंकित है और ये सब जगह कौतूहल का विषय है इनके बारे में वैज्ञानिक अपने तर्क उपलब्ध कराते है।

साइकिल के जन्म के बारे में संक्षिप्त इतिहास :

सन 1839 का काल जब एक लुहार किर्क पैट्रिक मैकमिलन (Kirkpatrick Macmillan) जिन्हें साइकिल का अविष्कारक माना गया उन्होंने साइकिल के वर्तमान स्वरूप को दुनिया के सामने रखा। लेकिन इससे पहले भी साइकिल का जन्म हो चुका था सन 1817 का साल जर्मनी में एक व्यक्ति बैरन फ्रांन ड्रेविस ने लकड़ी की बनी एक साइकिल की अवधारणा प्रस्तुत की, लेकिन इस वक्त वह आज की साइकिल से बिल्कुल मिलती जुलती नही थी, मतलब बेहद अलग साइकिल ।

इस से पहले इस संबंध में एक बात और कही जाती है कि फ्रांस में 1763 के साल में भी पियरे लैलमेंट नामक व्यक्ति ने साइकिल की खोज की थी, बहरहाल साइकिल मैकमिलन के बाद ही वास्तविक अस्तित्व में आई।

अब मंदिर की दीवारों पर बने मोबाइल के चित्र का अध्ययन करते है सन 1973 का साल एक अमरीकी इंजीनियर मार्टिन कूपर ने एक बेतार फोन की खोज की और इसे दुनिया के सामने पेश किया कुल मिलाकर 19वी सदी के लगभग चौथाई हिस्से वाले समय मे

मंदिर पर उकेरी गई तस्वीरों पर बहस :

लोगों के अनुसार जब मंदिर का निर्माण हुआ तब से ही ये तश्वीरें बनी हुई है इसका मतलब करीब 1300-2000 साल पहले, इसका आधार स्थानीय लोग यह बताते है कि निर्माणकर्ता लोगों ने या तो समय यात्रा की थी या भविष्य को देखा था।

वैज्ञानिकों के तर्क :

सन 1920 के साल में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था , जिसमे छोटी-मोटी पच्चीकारी को अंजाम दिया गया था, हो सकता हो कि सन 1920 में हुए इस रेनोवेशन के समय साइकिल के चित्रों को उकेरा गया हो।

लेकिन अब समस्या आती है मोबाइल के चित्रों को लेकर, क्योंकि पहली बात तो 1920 के समय मोबाइल नाम की कोई चीज दुनिया में थी ही नहीं। बल्कि जिस मोबाइल की आकृति दीवारों पर बनाई गई है वह नोकिया के 3315 या किसी मोटोरोला के 1990 के बाद किसी फोन के जैसे लगती है।

  • हालंकि इस विषय पर तर्क करना बेमानी लगता है, आस्था का विषय है इसे आस्था पर छोड़ देना चाहिए क्योंकि कुछ सवाल विज्ञान को भी चुनौती दे देते है।