उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
Akhilesh Yadav Twitter Post
Akhilesh Yadav Twitter Post|Twitter Post Grab
वायरल बुलेटिन

जिनके मकान कांच के बने होते है वो दूसरों के घरों पर पत्थर नही फेंकते, फोटो पोस्ट करके बुरा फसे अखिलेश ! 

आप इन बच्चों के पैरों में घुंघरू बांध कर लौंडा नाच देखने से क्या प्राप्त कर रहे थे?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

सोशल मीडिया वीरों से भरा हुआ है, यहाँ आपके कमान से तीर छूटा नही कि सांमने वाले महान ट्रोलर अपनी चतुरंगिणी सेना के साथ आपपर तीरों की वर्षा करके आकाश को ढंक देंगे, कमेंट्स और रिप्लाई का जवाब इतना तगड़ा होगा कि अगर आप नेताओं की तरह जबर नहीं है तो आप सांसारिक चींजो को त्याग कर हरिद्वार भी निकल सकते है।

मामला अयोध्या से जुड़ा हुआ है, "अयोध्या"आजकल मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से कम , कंट्रोवर्सी से ज्यादा जानी जाती है, तो कुछ यूं कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या की भव्य दिवाली का आयोजन किया पूरी अयोध्या को रोशनी से जगमग कर दिया, गिनीज बुक में दिए जलाने के रिकार्ड दर्ज किए गये, और कार्यक्रम के बाद एक नन्ही गरीब बालिका दियो का तेल बोतलों में समेटती नजर आयी, बस फिर क्या था जो इस मौके की ताक में थे सरकार को दियो को लेकर घसीटना शुरू कर दिया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने शोसल मीडिया में एक पोस्ट डाली जिसमे भावार्थ यह था कि आपने उनसे दिए जलवाए जिनके घर के चूल्हे बुझे हुए है, हालाँकि यह तश्वीर दिए बुझने के बाद की सी लगती है।

लीजिये ट्वीट ही देख लीजिए फिर आगे बढ़ेंगे:

कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तंज कसा और लपेट लिया, फिर क्या था भाजपा समर्थक और सपा विरोधी लोगो ने अखिलेश यादव जी को लपेटना शुरू कर दिया

नमूना देखिए:

यहाँ तक तो ठीक ही था लेकिन दिवाकर उपाध्याय नामक फेसबुक प्रयोक्ता ने तो भसड़ ही खड़ी कर दी उन्होंने सपा के पूर्व के फोटोज को आधार बनाकर अखिलेश यादव को दिन में तारे दिखा दिए:

माजरत चाहूँगा बबुआ रोशनी तो केवल नाबालिग बच्चों के पैरों में घुंघरू बंधवाकर नाच गाने से हासिल होती थी.....!!!

Posted by Diwakar Upadhyay on Friday, November 1, 2019

इस पोस्ट में उन्होंने सपा मुखिया और पूर्व सपा मुखिया दोनो के वो चित्र पोस्ट करके तंज मारा " आप इन बच्चों के पैरों में घुंघरू बांध कर लौंडा नाच देखने से क्या प्राप्त कर रहे थे" दरअसल पोस्ट की गई दो फोटोज में से एक सैफई के घर की थी दूसरी किसी पार्टी कार्यालय की।

मामला अगर राजनीति का हो तो असल मायने में हमाम में सब नंगे है कल जो सत्ता में थे उन्हें दूसरों का दुख न दिखाई देकर सिर्फ अपनी मनमानी करना आता था, अब जब दूसरे सत्ता पर काबिज है तो पूर्व पदस्थ पार्टी को गरीबो में भगवान नजर आ रहा है।