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लाइफस्टाइल

कहीं मोबाइल सरकार पर भारी न पड़ जाए, सावधानी से मिस्ड कॉल मारे सरकार ! 

एक अदना सा प्याज 1998 में सुषमा स्वराज की दिल्ली सरकार को गिरा चुका है, और इस बार मोबाइल बिल सरकार को नाकों चने चबवा देगा! 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

लंबे समय से भारत को सूचना प्रद्योगिकी सम्पन्न राष्ट्र बनाये जाने की बहस छिड़ी हुई है जिसके तहत दूरसंचार सेक्टर के निजी क्षेत्र की कंपनियों ने इसमें अपने अच्छे खासे कदम बढ़ाये जिसकी वजह से देश का लगभग हर वह कोना जिसपर किसी भी नेटवर्क की पकड़ है वहाँ लोगो ने स्मार्टफोन के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, अब चाहें वह सूचना का क्षेत्र हो या सोशल मीडिया का या फिर शिक्षा का क्षेत्र ही क्यों न हो समाज का एक बड़ा वर्ग टेलीकॉम सेक्टर पर निर्भर है इसी सेक्टर की वजह से ही लोग दुनिया के साथ कदम ताल मिलाने की ओर बढ़ रहे है।

लेकिन अब जब पूरा भारत इन दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों की तगड़ी गिरफ्त में आ चुका है, तब इन कंपनियों ने पंख फैलाने शुरू कर दिए है जिसकी वजह से आम उपभोक्ताओं को तकलीफ होना बेहद जायज है।   

सेवा में चालीस प्रतिशत तक दाम बढ़ाये :

यहाँ पेट्रोल के 4 पैसे मूल्य बढ़ने पर तो कोहराम हो जाता है और यहाँ कुल मूल्य पर चालीस प्रतिशत तक मूल्य बढ़ाने की वजह से उपभोक्ताओं की जेब पर ज्यादा वजन पड़ना ही था। लोग इसे पुराने 2G टाइम को इस मामले से जोड़कर चर्चा कर रहे है।

एक और प्रयोगकर्ता बीएसएनएल की ओर लौटने की बात करता हुआ नजर आता है:

यहाँ आपको बताते चले कि दिसंबर की तीसरी तारीख पर एयरटेल और वोडाफोन ने अपनी दरों का खुलासा कर दिया है जिसमें पुराने पैक्स के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी करके पेश किया है हालाँकि 40 प्रतिशत तक रेट हाइक करने की बात करने वाले रिलायंस जियो ने अपने पत्ते नही खोले है, इसके बारे में 6 दिसंबर तक जानकारी उपलब्ध हो जाएगी।

ग्राहकों ने कहा गुणवत्ता तो बढ़ाओ जी :

एक ओर जहां दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों ने अपने खर्चे और घाटे को आधार बनाकर बेतहासा पैसे बढ़ाये है वहीँ सेवाओ में घटी गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं में रोष व्याप्त है, काल ड्रॉप, कॉल म्यूट और नो नेटवर्क जैसी समस्याएं आम है इसके बाद रेट बढ़ाना कहीं न कहीं बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए संकट न बन जाये।

एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने इसे दोबारा मिस्ड कॉल का युग बताया है:

जियो करेगा लंबा शिकार :

हालांकि जियो ने भी अपने घाटे और खर्चे को लेकर मूल्य बढ़ाने की घोषणा कर दी है लेकिन उसने अपने नए रेट के पत्ते नहीं खोले है जिसकी वजह से यह संभावना ज्यादा पायी जाती है कि जियो अपना पुराना दांव बाजार में फिर से चल सकता है।

सरकार के सर फूटेगा ठीकरा :

आपको याद है जब जियो ने अपनी सेवाएं बेहद कम मूल्य में उपलब्ध कराई थी तो जाहिर सी बात थी भाजपा सरकार के साथ बेहतर तालमेल माना गया था, अब जबकि इस तरह करीब चालीस से पचास प्रतिशत मूल्य बढ़े है, इसके बाद से सरकार को दोषी भी जाहिर तौर से बनाया जाएगा।

इसको लेकर सरकार ने क्या तैयारियां की ये तो सरकार जाने, लेकिन बवाल होना तय है एक ओर जहां सरकार अपने आप को युवाओं का हितैषी समझती है और अपनी सरकार को युवाओं द्वारा बनाई गई सरकार घोषित किये बैठी है ,वह युवा सरकार पर कैसा आरोप लगाती है यह तो समय ही बताएगा।