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लाइफस्टाइल

योग को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं : उपराष्ट्रपति

भोजन में भी सूर्य की रोशनी शामिल है ,लेकिन लोग विटामिन डी की कमी के लिए चिकित्सकों के पास जा रहे हैं

Ashutosh

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नई दिल्ली, 29 अक्टूबर | उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सोमवार को योग को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की सिफारिश की। उपराष्ट्रपति ने इसकी सिफारिश जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की वजह से ज्यादा संख्या में लोगों के पीड़ित होने की वजह से की।

उपराष्ट्रपति 'योग एंड माइंडफुलनेस : द बेसिक्स' पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस पुस्तक को जानी-मानी योगाचार्य मानसी गुलाटी ने लिखा है।

नायडू ने कहा कि आधुनिक उपकरणों से जीवन आसान बना है, इसके साथ ही सुस्त जीवनशैली जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।

नायडू ने कहा कि लोगों को अपनी जीवनशैली में सार्थक गतिविधियों का हिस्सा अपनाना होगा।

उन्होंने कहा, "हम सूरज की रौशनी में नहीं जा रहे या हम प्रकृति का आनंद नहीं ले रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि लोग विटामिन डी की कमी के लिए चिकित्सकों के पास जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोजन में भी सूर्य की रोशनी शामिल है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पहले शारीरिक गतिविधि नियमित दिनचर्या का हिस्सा होती थी।

उन्होंने कहा, "वास्तव में अब कोई गतिविधि नहीं हो रही है और इसका प्रभाव यह है कि बीमारी तेजी से बढ़ रही है। मेरा निजी तौर पर मानना है कि योग को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।"
आधुनिक जीवन शैली और दिनचर्या काफी विसंगतियों से भरी है ,इसलिए आज के समाज और युवा पीढ़ी के लिए योगा का महत्तव और ज्यादा हो जाता है। योगा करने की क्रियाओ को योगासन कहते है, ये योगासन कई तरह की बीमारियों और शारीरिक विकारो तो दूर करने में सच्छम है ।

योगासन का सबसे अच्छा गुण यह है की योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमे न तो कोई विशेष व्यय होता है ना ही किसी विशेष साधन या सामग्री की जरूरत होती है । बूढ़े- जवान, सबल - निर्बल, स्त्री - पुरुष , बच्चे सभी योगासन कर सकते है । अलग -अलग योगासन का अलग - अलग प्रभाव एवं लाभ है । पुरे विश्व में २१ जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है ।

--आईएएनएस