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कोरोना और हवन, महामारी से जूझते विश्व पर क्या ये कारगर होगा? 

हवन, हल्दी और नींबू से ठीक होगा कोरोना वायरस?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

आज भारत समेत समूचे विश्व मे कोरोना का कहर जारी है जिसमें हज़ारों लोग अनायास ही मौत के गाल में समा चुके हैं। लेकिन इसी बीच भारत मे देशी दवाओं समेत हवन इत्यादि की चर्चा जोरों पर है। जिसके समर्थन और विरोध में बयानबाजी का दौर जारी है, लेकिन असल मे इनका महत्व क्या है, क्या ये उपाय कारगर हो सकते है?

देशी दवाओं की सूची :

भारत सदा से ही देशी दवाओं का पक्षधर रहा है फिर चाहे वह सदियो पुरानी बात हो या फिर आज का भारत। इन दोनों समय मे देशी दवाओं का दबदबा कम नहीं हुआ, हाँ ये अलग बात है कि कई बार देशी दवाओं के नाम पर बेफजूल की दवाओं का प्रचार प्रसार करके फर्जीवाड़ा खड़ा किया जाता है। हालाँकि यहाँ यह बताना भी जरूरी है कि ऐसी दवाओं के प्रचार प्रसार से किसी को कोई खास लाभ नहीं है फिर लोग यूपी रोडवेज बसों में मिलने वाली घर का वैध किताब पढ़कर दुनिया के सामने ज्ञान झाड़ देते है ताकि लोगों के सामने ओहदा बड़ा हो जाये। बात कुछ भी हो लेकिन ये कितना कारगर होगा ये बड़ा सवाल है। लेकिन कुछ निम्नलिखित दवाएं है जिनका उपयोग किया जा सकता है जो न सिर्फ एंटी बैक्टीरियल है बल्कि श्वसन संबंधित बीमारियों के लिए रामबाण साबित होती है।

गिलोय :

बेहद कारगर दवा, जो अपने आप मे एक बेहद उम्दा एंटी बैक्टीरियल के साथ साथ एंटी वायरल भी है। और मानव शरीर मे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सक्षम है। संभव है इससे एक तो कोरोना वायरस से बचाव के चांस बढ़ सकते है(हालांकि यह कोई वैक्सीन नहीं है कि कोरोना हमला नहीं करेगा) इसलिए इसका प्रयोग एंटीवायरल के तौर पर करें बल्कि कोरोना की दवा की तरह नही।

हल्दी :

देशी दवाओं की श्रेणी में हरिद्रा अपना अहम स्थान रखती है आप इसे कोरोना से बचाव के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। हल्दी से वायरल सम्बंधित समस्या को दूर किया जा सकता है, यहाँ भी यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ये कोरोना की दवा नहीं है बल्कि हल्दी शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।

नींबू :

भूलकर भी इस मौसम में नींबू का सीधा प्रयोग न करें, यह पाचन संबंधी बीमारियों में भले ही कारगर हो लेकिन प्रतिरक्षा तंत्र में इस वक्त एक पैसे का कारगर नहीं होगा। और अगर आप नींबू का सेवन करते है तो आप बदलते हुए मौसम में आम सर्दी जुकाम को निमंत्रण दे रहे है। हाँ अगर इसका प्रयोग किसी योग के साथ करते है तो आयुर्वेद में इसके तमाम उदाहरण है बशर्ते यह अकेले है तो समस्या बढ़ा सकता है।

हवन और कोरोना :

देखिए जनाब वैसे तो सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय इन सभी बातों को कभी नहीं मानता, लेकिन कई बार विदेशी एजेंसियों द्वारा हवन इत्यादि कराकर वातावरण में सकारात्मकता जीवाणुओं के बढ़ने और खतरनाक विषाणुओं के कम होने की बात को स्वीकारा जा चुका है। लेकिन यह कोरोना वायरस को मार सकता है अथवा नहीं इसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, सो यह कहना कि हवन इत्यादि कितने कारगर होंगे यह अनिश्चित सा लगता है। लेकिन अगर वर्तमान की चिकित्सक प्रणाली को देखे तो नजर आता है कि अभी तक कोरोना की कोई वैक्सीन खोजी नहीं गयी है और किसी भी बीमारी का इलाज आपके शरीर मे ही छुपा हुआ होता है जिसको आपका मस्तिष्क संचालित करता है इसके अनुसार अगर आपको ये लगता है कि हवन से आप इस वायरस से बच सकते है तो आप हवन करा सकते है इससे आपके मस्तिष्क में सकारात्मक विचार बढ़ेंगे। इससे कोई नुकसान है ही नहीं। वैसे भी हवन सामग्री में तमाम जड़ी बूटियों का समिश्रण होता है जो वातावरण को साफ करने में सहायक होते है। अगर ऐसा संभव हो तो आप ऐसा बेफिक्र होकर कर सकते है।

डिस्क्लेमर : उपरोक्त चर्चा मात्र शंका समाधान के लिए है, अगर आपको नोवेल कोरोना वायरस के सम्बंध में कोई शंका है तो भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर (+91-11-23978046) पर कॉल करके जानकारी प्राप्त कर सकते है।

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