प्रकृति से हार मान बैठा इंसान, आखिर उसके उसूलों पर चलकर ही जिंदा रहना होगा, वरना मौत निश्चित है।

चीन तकनीक में कोई कमजोर देश नहीं है, चीन कभी-कभी अमेरिका जैसे देश को भी अपनी तकनीकी और जनबल के आधार पर आंखे तरेर देता है।
प्रकृति से हार मान बैठा इंसान, आखिर उसके उसूलों पर चलकर ही जिंदा रहना होगा, वरना मौत निश्चित है।
Main Cause Of Coronavirus Google 
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पिछले महीने से देखें तो चीन बेहद असहाय स्थिति में आ चुका है जहां से उसके लिए सभी दरवाजे बंद नजर आते है क्योंकि प्रकृति से आजतक कोई भी नहीं लड़ सका है।

चीन का वुहान शहर जहाँ से कोरोना वायरस के मिलने की पहली पुष्टि हुई और धीरे-धीरे यह वायरस एक पूरे क्षेत्र से लेकर दुनिया के कुछ देशो में भी पहुँच गया।लेकिन खासकर यह चीन में लगातार कहर बरपा रहा है, लोग सड़कों पर चलते-चलते गिर कर मर रहे है और अस्पताल तो मानो बीमारों की संख्या से भरे हुए है। यही कारण है कि चीन ने बड़ी फुर्ती से दो भारी भरकम अस्पतालों के निर्माण करके बीमारी की रोकथाम के लिए व्यापक कदम उठाए है लेकिन क्या ये कारगर हुए ?

क्या हुआ है असर :

चीन जो दुनिया के लिए तमाम समानों की निर्माण फैक्ट्री है, वहाँ लोगों को उनके घर में कैद कर दिया गया है, कोई भी किसी से नहीं मिल सकता। स्थिति यह है कि शहरों को लॉक्ड डाउन किया जा रहा है यानी कि वहाँ न कोई आएगा और न कोई बाहर जा सकेगा। कमोबेश यही स्थिति स्थानीय निवासियों की है यहाँ लोगो को घरों में बंद किया जा रहा है। उनके निकलने पर कड़ी पाबंदी है जिस पर स्थानीय प्रशासन उन्हें बाहर न निकलने के लिए कील और पटियों की मदद से घरों को बंद किया जा रहा है। मतलब लोग मरे भी तो घर के अंदर, बाहर न निकल पाएं। वहां के बाशिंदों को सिर्फ मौत का इंतजार है। और जो कुछ लोग वहां से निकल गए वो दुनिया भर में इस वायरस को बांट रहे है।

क्या-क्या है थ्योरी :

वैसे जब इस वायरस की पुष्टि हुई लोगों ने इसे किसी लैब में किया गया प्रयोग माना। एक वेबसाइट ने वुहान स्थिति लैब में इसके विकसित किये जाने की पुष्टि की और यह बताया कि सरकार द्वारा इसे लीक कराया गया है। वहीँ दूसरी तरफ इसे जानवरों द्वारा फैलने की बात कही गयी। हालांकि अगर पैटर्न को देखें तो इस तरह के सभी वायरस जो जानलेवा भी साबित हुए है वो लगभग सभी जानवरों के द्वारा आये है फिर चाहे वह स्वाइन फ्लू हो या बर्ड फ्लू, या फिर अन्य तमाम जानलेवा वायरस, लेकिन ये आये कैसे ?

खानपान और नेचर की अवहेलना:

मानव जब से विकसित दिमाग वाला हुआ, उसने विज्ञान के सहारे खुद को दुनिया में श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश भी की, उसने प्रकृति के सिद्धांतों की नकल करके खुद को विकसित किया उदाहरण के लिए चमगादड़ से रडार सिस्टम, चिड़ियों से वायुयान, और शिकारी चिड़ियों से फाइटर प्लेन, कमोबेश हर तकनीक नेचर से ही जबरिया तरीके से खींच निकाली गई। और यही कारण था कि इंसानों ने प्रकृति के दूसरे बच्चों जैसे पक्षी, जानवरों को अपना अधिकार समझ कर खाना और उपयोग करना शुरू किया, अगर उपयोग सीमित था तब तक कोई समस्या नहीं रही लेकिन जैसे ही यह उपभोग में बदला असल समस्या वहां से जन्मी, सांप, छछूंदर, नेवले, बंदर, और हर प्रकार का जिंदा मुर्दा जानवर इंसान की प्लेट पर आ गया और स्वाद के चक्कर मे सब खाया। तो यकीनी तौर पर प्रकृति ने उन्हें बचाव की कुछ प्रत्यक्ष और कुछ छिपी हुई शक्तियों का स्वामी बनाकर भेजा था, यही नतीजा है कि आज इंसान क्या मानवता मौत की कगार पर खड़ी है।

चीन और भोजन :

चीन और उसके भोजन के बारे में बात करना आज के परिपेक्ष्य में बेमानी होगा, अब चाहे वह सीफूड हो या जमीन पर रेंगने और लोटने वाले जानवर, हर प्रकार का जीव चीन के निवासियों ने खाया, और नतीजा यह है कि उन जानवरों के जिस्म में पलने वाला वायरस इंसानों को तिल-तिल कर खा रहा है।

क्या है बचाव :

तत्कालीन बचाव तो हर देश की सरकार और चिकित्सा जगत चिल्ला-चिल्ला कर बता रहा है लेकिन असल बातों पर बोलने से सब डर रहे हैं। भाई इतना तो जानते ही हो कि अगर कोई आपके बच्चे को मौत के घाट उतार कर नमक मिर्च मसाला लगाकर खाये तो आपको तकलीफ होगी, तो भले ही वैज्ञानिक नजर से न देखे रूहानी तौर पर इसका अभिशाप तो लगेगा ही, शाकाहारी बनिये, जियो और जीने दो के सिद्धांतों को अपनाइए लंबा जिएंगे।

नोट: इस लेख में लेखक के निजी विचार है अगर आप मांसाहारी है तो आप थोड़ा स्वादु जीभ को समझाइए कहीं ऐसा न हो कि ये जीभ भी न रहे।

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उदय बुलेटिन
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