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चहल पहल

भारत मे क्या हो रहा है, क्या है रास्ते, और क्या होगी दिशा ? चिंतायुक्त विषयो पर गंभीर लेख ! 

मामले सीरियस हैं लेकिन आप सीरियस मत होना 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

ज्योतिष भारतीय समाज मे एक अहम हिस्सा रखता है, चाहे नई पुरानी गाड़ी खरीदने की बात हो या फिर शादी ब्याह, भारत ज्योतिष के हिसाब से तो इतना आगे बढ़ गया है कि किसी दिन मुहूर्त और तारीख के अवसर पर सिजेरियन बर्थ के द्वारा जन्म भी नियत कर देते है ताकि ग्रह नक्षत्र सब सम भाव मे स्थित रहे। लेकिन ज्योतिष हमारा विषय नही, हमने तो सिर्फ भूमिका तैयार की है ताकि आप लोग इस लेख को पढ़े, बाकी व्यक्तिगत तौर पर ज्योतिष का हमें ककहरा भी नही आता बस कभी कभार गप्प मार देते है, सो आज बात करते है उन सवालों पर जिनपर समाज की विशेष नजर है जिनपर सम्भावनाओ का अंबार लगा है।

छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाय के :

अब आप इस बात पर अकड़ सकते है कि इस गाने का संबंध किस संदर्भ से है, तो ठहरिए जनाब जिस तरह से देश मे भाजपा सरकार एक-एक कर पत्ते गिराती जा रही है उस हिसाब से नया साल उत्तर प्रदेश और अन्य भाजपा शासित प्रदेशों को छोड़कर दूसरे स्थानों पर प्रेमियों के लिए बेहद रोमांटिक साबित होने वाली है खासकर उत्तर प्रदेश में जहां वेलेंटाइन डे के दिन उत्तर प्रदेश पुलिस और भगवा गमछा धारी प्रेम निरोधक दस्ता अपनी मुस्तैदी के साथ प्रकट होता है उसके अनुसार मध्य प्रदेश और नए-नए जीते हुए राज्य झारखंड में मौजा मौजा वाली स्थिति होने वाली है प्रेमियों के लिए कोई रोकने टोकने की स्थिति नहीं होगी, हो गया निराकरण, भोले की फौज करेगी मौज।

भाई जान का ब्याह :

भाई ये तो राष्ट्रीय समस्या है चाहे पैपराजी हो या कोई और पत्रकार किसी भी इंटरव्यू के आखिरी में पूर्णाहुति की तरह यह सवाल सलमान खान से दाग ही देते है कि भाई की कुंडली मे शुक्र सप्तम भाव मे पहुँच रहा है कि नहीं ( भाई थोड़ा बहुत ज्ञान है कुंडली का, हम खुद भी अपने ब्याह में देरी होने पर बार-बार कुंडली मे शुक्र की स्थिति देखा करते थे, जो कि विवाह का कारक है ) हालाँकि इसका क्या जवाब मिलना है ये हम सबको पता है सलमान भाई इस साल भी सबको ठगकर रह जाएंगे, क्योकि जिस हिसाब से सलमान भाई अखंड ब्रम्हचर्य का व्रत धारण किये है और उनपर घरवालों की डांट का कोई असर नही हो रहा उससे तो स्थिति बेहद साफ नजर आ रही है, बाकी हम अपनी जुबान से कुछ न बोलेंगे।

तैमूर की जगह कौन लेगा :

तैमूर ने आज एयरपोर्ट पर किसको जीभ चिढाई, तैमूर कब अपनी नैनी से गुस्सा हुए , तैमूर ने कब पैंट में .......))

तैमूर अब बड़े होने लगे है सो जाहिर सी बात है अब वो या तो मीडिया से गायब हो जाएंगे या फिर स्टार परिवार ही उन्हें लाइम लाइट से दूर कर देगा। लेकिन पैपराजी और अन्य पत्रकार बंधुओ का नया शिकार कौन होगा ये भी आज के दिन का बड़ा मुद्दा है, हालांकि कई अभिनेत्रियां मातृत्व सुख के संकेत दे चुकी है जिनका रहस्योद्घाटन गर्भजीवन फोटोशूट में किया जा चुका है लेकिन देखना यह होगा कि मीडिया किसे चुनता है।

मोदी जी रात के आठ बजे कब बोलेंगे ?

नोटाष्टमी के बाद मोदी जी को अचानक न्यूज चैनलों पर बोले हुए एक अर्सा हो गया देश मे विपक्षियों के अनुसार अनिश्चितता का दौर है ऐसे माहौल में निश्चितता को निर्धारित करने के लिए मोदी जी किस विषय को लेकर रात के आठ बजे " मित्रो आज रात्रि 12 बजे.." कब बोलेंगे, ये भी एक अहम सवाल है जो लोगो के मन मे घर कर के बैठा ।

सोनिया गांधी और गूगल बाबा :

पता नहीं गूगल बाबा को कांग्रेस की वर्तमान सर्वेसर्वा सोनिया गांधी से क्या चिढ़न हुई कि जैसे ही किसी से " बार गर्ल इन इंडिया " टाइप हो जाता है तो सोनिया गांधी की तश्वीरें प्रकट हो जाती है, लब्बोलुआब ये है कि लगता है कि चाहे वह गूगल पर पप्पू लिखने वाला मामला हो या सोनिया गांधी पर बार बाला वाला ठप्पा , क्या गूगल को इस गलती को सुधारने का मौका मिलेगा या ये सब नए साल में यूं ही चलता रहेगा।

मोदी जी की चाय की दुकान :

भाई सर्दियों का मौसम हो और चाय पर चर्चा न हो ये तो भारतीय परिवेश में बेहद असंभव वाली बात हो गयी आखिर देश जिस चाय को लगभग एक दशक ( अब एक दशक ही कहो, बाकी के साल भी वही प्रधानमंत्री रहेंगे) से लगातार चुस्कियां लेकर पीता रहा हो भले ही वह चाय जैसी भी रही हो उस चाय की दुकान बंद होने के कयास लगाए जा रहे है। हालाँकि परिणाम कभी भी ज्ञात नहीं होते उनमें हमेशा आशंका ही पायी जाती है अब चाहे वह आशंका फेकू के रूप में हो या फिर ईवीएम की फेवफ़ाई की। तो लब्बोलुआब ये है कि कुछ लोग इस साल में यह कामना कर सकते है की ये कुछ लोगों के लिए बेहद मीठी और कुछ लोगों के लिए बेहद कड़वी चाय की दुकान कब बंद होगी।

भाजपा के लिए नेहरू और कांग्रेस के लिए सावरकर कब मान्य होंगे ?

जैसा कि हम गुजरते हुए साल में  कुछ नेताओं से सुन चुके है कि देश मे सामाजिक वैमनस्यता के लिए नेहरू जिम्मेदार थे और  कुछ के अनुसार वीर सावरकर अंग्रेजो के गुलाम थे हालाँकि अब दोनो व्यक्तित्व इस संसार मे नही है उन्हें नेताओ के बड़बोलेपन से क्या फर्क पड़ता है लेकिन फिर भी एक अहम सवाल यह होना चाहिए कि इस देश मे ये दोनों व्यक्तित्व दोनो पक्षो के लिए कब मान्य होंगे और नेहरू के साथ एडविना की सिगरेट पीती तश्वीर कब जलकर खाक होंगी?

जी हां राम रहीम और हनीप्रीत का मिलन कब होगा ?

सदी का सबसे बड़ा सवाल, वैसे इस सवाल के तुरंत बाद ही राम रहीम और हनिप्रीत को सजा सुनाने वाले जज साहब को लाखों बद्दुआएं जिन्होंने चिर प्रेमी प्रेमिका के अनन्य स्नेह बंधन को जेल की काल कोठरी में भेजकर भंग किया और तो और जब साहब का मन नहीं भरा तो इस इश्क में एक जहर का बीज और बो दिया ताकि दोनों के बीच दीवारों वाला इश्क भी न रह सके ( दीवारों वाले प्रेम को समझने के लिए आपको "जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी, क्रांति फ़िल्म का यह गीत वीडियो में देखना पड़ेगा) और हनिप्रीत को जमानत दे दी गयी हालांकि कुछ दिन बाद हनीप्रीत बाबे से मिलने भी गयी, लेकिन तब इश्क पर पहरा काबिज रहा"

देश के प्रमुख कुँआरे का ब्याह :

जाने वो घड़ी कब आएगी जब होगा तुहार गठबंधन "ये गठबंधन शब्द महागठबंधन जैसे शब्द को परिभाषित न करके बल्कि कांग्रेस के सबसे युवा नेता के ब्याह की बात को रखता है " भारत के केंद्र समेत अन्य राज्यो में सरकारे आती-जाती रही मंत्री-गृहमंत्री बनते बदलते रहे लेकिन राहुल गांधी के परिवार में राहुल जैसे नेता के ग्रह को संभालने वाली ग्रह मंत्री की आकांक्षा पूर्ण नही हुई। जिसको लेकर अभी तक तमाम कयास लगाए जा रहे है, कई मर्तबे सत्ता के गलियारों के खुचरपेची चाचा राहुल के बार-बार इटली जाने को दूसरों के कानों में फूंकते हुए नजर आए की " काहे चचा राहुल का इटली में कोई चक्कर है का बहुत आता जाता है"

और ये चाट वाले चाट में प्याज कब देंगे ?

इस से एक किस्सा याद आया कथानक कहने वाला व्यक्ति एक दिन चटासा हुआ ( जैसे चाय की तलब चहास होती है वैसे ही चाट की तलब चटास होती है ) और चाट वाले से चाट की मांग की, चाट बनाने वाले ने चाट तो बनाई लेकिन उपभोक्ता के हितों का हनन करते हुए धोखे के साथ प्याज के आकार में मूली काटकर डाल दी।

लेखक ने चाट वाले से प्याज माँगने के लिए मुँह खोला ही था कि चाट वाला भैया अचानक से महिषासुरमर्दिनी के रूप में परिवर्तित होने लगा और माहौल कुछ ऐसा हुआ कि अगर दोबारा प्याज के बारे में कुछ बोला तो शायद चाट बनाने वाले उपकरण खाने वाले के हलक में समा चुके होंगे, तो कुल मिलाकर आज के समाज की मुख्य मांग यह भी होगी कि खाने वाली चीजो में प्याज अपनी जगह कब लेगी।

तो जनाब ये हमारा विश्लेषण था, अगर आप के मन मे कोई ऐसा मुद्दा है जिसपर आप कुछ लिखना लिखाना चाहते है तो आप हमें लिख सकते है.

तगड़ा वाला डिस्क्लेमर : देखो भैया जैसा बुरा न मानो होली होता है, वैसे ही न्यू ईयर में भी कुछ शर्त और कंडीशन छुपी हुई होती है, जिसके तहत आपको हसीं मजाक करने की आजादी मिलती है हालाँकि इस लेख में हल्के-फुल्के शब्दों का प्रयोग हास्य व्यंग्य उत्पन्न करने के लिए किया गया जिसका  आशय किसी प्रकार से भी किसी व्यक्ति, नेता, राजनेता ,छुटभैया नेता, बाबा, बाबी ,चेला- चपाटी पर निजी हमला न माना जाए, इस लेख में शब्दों का प्रयोग नए वर्ष पर आमजन में हर्ष का अनुभव कराने के लिए माना जाना चाहिए ऐसा चाणक्य के फुफेरी मौसी के देवर अपनी फेसबुक प्रोफाइल में डाल चुके है.