उदय बुलेटिन
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फिल्म समीक्षा

दर्पण- फिल्में कल और आज

फिल्म- स्त्री

Vedant Patil

Vedant Patil

दर्पण

फिल्म- स्त्री

कास्ट- राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, पंकज त्रिपाठी, अपरशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी

निर्देशक- अमर कौशिक

यूँ तो ये वाक्या काफी पुराना है कि फ़िल्में समाज का आइना होती है| लेकिन हाल ही में आई फिल्म स्त्री में जिस तरह से सामाजिक मुद्दों और समाज में व्याप्त महिलाओं के शोषण का प्रश्न हमारे सामने फेंका उससे ये बात स्पष्ट है की आज का सिनेमा भी मनोरंजन के इस साधन को समाज परिवर्तन का मार्ग समझता है| अमर कौशिक द्वारा निर्देशित इस फिल्म की कहानी मध्यप्रदेश के चंदेरी गाँव में व्याप्त एक विचित्र घटना पर आधारित यह फिल्म एक ऐसी वैश्या की कहानी है जो की अपने सच्चे प्रेम की तलाश में हर वर्ष महा पूजा के समय गाँव में आती है| फिल्म के संवादों में जगह जगह आपको ये सुनने में अवश्य मिलेगा की किस तरह एक स्त्री को सिर्फ उपभोग की वास्तु समझा जाता है| एक संवाद में पंकज त्रिपाठी कहते है की जब तक आप स्वयं स्त्री की और आकर्षित नहीं होंगे वो आपको परेशान नहीं करती क्यूंकि मर्द ज़बरदस्ती करते है स्त्री नहीं, और काफी हद तक यह बात सच भी है| महिलाओं को अँधेरा डरता है लेकिन इस फिल्म में कोई भी आदमी रात को अकेले नहीं निकल सकता क्योंकि अगर वो ऐसा करता है तो स्त्री उसे ले जाएगी| यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन की दृष्टि से ही हम लोगो को कई ऐसे सन्देश दे गई जिनकी हमारे समाज को आज ज़रुरत थी| पुरुषों और महिलाओं की समानता की बात तो हम करते है लेकिन समाज की छोटी सोच आज भी महिलाओं को बस एक उपभोग की वस्तु समझाता है, जिसकी ज़िन्दगी घर की चार दीवारी में सिमट क्र रह जाती है|

अगली बार फिर चर्चा करेंगे बॉलीवुड की ऐसी ही एक फिल्म के साथ जो आपको हमें इस समाज को नए सन्देश देती है|