Rasbhari web series review
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बॉलीवुड बुलेटिन

वेब सीरीज रिव्यू: रसभरी में रस की जगह कुछ और ही भरकर परोस दिया

स्वरा भास्कर की "रसभरी" बड़ी बेस्वाद है, 18 प्लस रेटिंग मिली हैं इस बेहूदा वेब सीरीज को सोच समझ कर देखें।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

देखिए सेंसर बोर्ड नाम की चीज फिल्मों के लिए होती है ऑनलाइन दृश्य सामग्री (ओटीटी) के लिए भारत मे ऐसा कोई पैमाना नही और यहां सब कुछ दर्शक की डिमांड से जुड़ा होता है शायद इसीलिए निर्माता इसी रास्ते को अपनाकर कुछ भी दिखाने की जुगत में रहते हैं। कुछ ऐसा ही स्वरा भास्कर की नई नेवेली वेबसिरिज "रसभरी" में किया गया है। ये बात अलग है कि इस नाम से ही कुछ लोगों को इसके कंटेंट का पता चल जाता है। लोग इस वेबसिरिज मे दिखाई गई डिजायर को महिलाओं की बेशर्मी से भी तुलना करते हुए नजर आते है।

रसभरी का ट्रेलर: जिसमें बहुत कुछ कहा गया है

शिक्षका, स्टूडेंट और इच्छाएं:

तो वेबसिरिज की कहानी शुरू होती है अपने उत्तर प्रदेश के काफी पुराने और भाषागत सभ्यता में विकसित शहर मेरठ से। वेबसिरिज में दिल्ली के हल्के फुल्के लहजे के साथ मेरठी अंदाज के साथ भाषागत अलंकारों का मिलना बेहद सहज हो जाएगा।

चलिए इसमे क्या रखा है कहानी का सार समझ लेते है बिना किसी ब्लूपर के साथ, तो मेरठ शहर में पति के साथ आगमन होता है शानू उर्फ रसभरी का, शानू पेशे से टीचर है और एक स्कूल में पढ़ाती है।

और वहीँ क्लास में एक बेहद अलग किस्म का करेक्टर होता है नंद, विद्यार्थी है और सबसे अहम बात है कि पुरुष है तो जाहिर सी बात है कि इसमें मसाला दिखाने के लिए काफी जगह मिल जाती है निर्देशक निर्माता को। तो ऐसा ही कुछ होता है नंद अपनी मैडम के ऊपर आशक्त होता है मैडम के प्रथम दर्शन के बाद ही नंद अपने चांडाल चौकड़ी से कहते हुए नजर आता है कि "मैं इसे अपने बच्चे की माँ बनाऊंगा "बांकी आप समझ ही सकते है कि वेबसिरिज में कितना कुछ दिखाने की कोशिश की गई होगी।

नंद की बांछे तब खिलती है जब उसे पता चलता है कि मेडम का एक दूसरा रूप है, जिसका दीवाना पूरा शहर है और कोशिश के बाद नंद भी मैडम (रसभरी ) का चहेता बन जाता है। इसके बाद कहानी तमाम रोमांचक और गैर रोमांचक किस्से, कहानी, हादसों के साथ बढ़ती रहती है। क्योंकि हम इस विश्लेषण में कहानी के राज नही बताएंगे बस ये कोशिस करेंगे कि आपको सार तत्व बता दें।

आखिर मकसद क्या है?

देखिए नारीवाद और नारी की इच्छाओं को सम्मान दिलाने के चक्कर मे कोई कब अश्लीलता दिखाकर पैसे बना ले कोई ठिकाना नहीं, कहानी बेहद सस्ती रोडवेज बस स्टैंड में बिकने वाली छुपाकर पढ़ने वाली मनोहर कहानियों से लगभग मेल खाती है जिनमें काल्पनिक रूप से मामी, चाची, ममेरी फुफेरी बहनों के साथ वैचारिक दुराचार करने की सफल कोशिस की जाती है। हालाँकि वेबसिरिज में कोशिस ये की गई है कि ये अभिव्यक्ति की आजादी के मापदंड दिखाए और अपने सो काल्ड आदर्श की आड़ में नंगापन दिखा दे। लेकिन अगर ऐसा होता तो मिया खलीफा नारीवाद की परम पूज्यनीय तस्वीर बन जाती।

कई जगह स्वरा खुद को डिफेंड करती हुई नजर आती है हालांकि खुद को किस तरीके से डिफेंड करती है ये देखने लायक है

अगर काम की बात करे तो स्वरा भास्कर हमेशा की तरह किरदार में पगी हुई नजर आती है और उन्होंने अभिनय से खुद में रसभरी को इस तरह समाहित किया है कि एकबारगी आप खुद खोज नही पाएंगे कि शानू कौन है और रसभरी कौन है। अगर स्वरा के पिछले ट्रेक रिकार्ड को खंगाला जाए तो स्वरा अपने आप को रियल दिखाने के चक्कर मे वो सब कुछ कर जाती है जो शायद बेहद निजी साबित हो। हालांकि यहां यह कहना भी जरूरी होगा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी शरीर की जरूरतों को दर्शाना है या नहीं ये व्यक्ति के निजी निर्णय पर निर्भर करता है।

देखे या न देखे ?

देखिए थियेटर वैसे भी बंद है फिल्में ऑनलाइन ही उपलब्ध है तो अगर आप सिंगल है और सो काल्ड अश्लीलता भरे हुए साहित्य को पढ़ने के शौकीन है तो बेशक आप इसे देख सकते है लेकिन अगर मेरी राय माने तो इस कोरोना काल में बच्चे वैसे भी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नही का पा रहे उस वक्त में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच के पवित्र रिश्ते के बीच मे अघोषित द्वंद युद्ध और फैंटेसी वाले संसार मे न बदलें। हालांकि इन शरीर से जुड़ी हुई इच्छाओं को नैसर्गिक इच्छाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है तो ये हर वक्त उपस्थित रहती है लेकिन ऐसे वक्त में जब बच्चा सही गलत की पहचान करने में असमर्थ हो उस वक्त इस तरह के साहित्य सिनेमा से बचाकर रखना चाहिए। क्योंकि कई सुबूत है कि इस तरह की कहानियां और सिनेमा बच्चों के मन मे नई कहानियां रच सकता है। जिसका खामियाजा आपको भुगतना पड़ सकता है।

डिस्क्लेमर : आलेख में लिखे हुए शब्द लेखक के बेहद निजी विचार है और लेखक के द्वारा वेबसिरिज के बारे में अपना नजरिया पेश किया गया है, हालांकि इस मामले में हर व्यक्ति का टेस्ट पृथक-पृथक हो सकता है।

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उदय बुलेटिन
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