उदय बुलेटिन
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True Story पर बेस्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक फिल्म कितनी True है ?

लोकसभा चुनाव के पहले चरण की मतदान से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी की बायोपिक फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है।

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

"हिंदुस्तान आतंक से नहीं, आतंक हिंदुस्तान से डरेगा"

5 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी पर बनी बायोपिक फिल्म 'पीएम नरेंद्र मोदी' रिलीज़ हो रही है। फिल्म की रिलीज़ से पहले कांग्रेस इस फिल्म पर कड़ी आपत्ति जाता चुकी है। इस फिल्म को प्रोपोगंडा फिल्म बताते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस फिल्म का निर्माण भारतीय जनता पार्टी ने करवाया है।

हालांकि फिल्म से भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना देना तो नहीं है, लेकिन इस फिल्म में नरेंद्र मोदी का किरदार निभा रहे विवेक ओबेरॉय कट्टर मोदी समर्थक हैं । उनके नाम के आगे चौकीदार तो नहीं लगा लेकिन उनके विचार से वे अभिनेता कम बीजेपी नेता ज्यादा लगते हैं।

फिल्म के ट्रेलर रिलीज़ मौके पर जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि यह फिल्म मात्र 3 महीने में कैसे बन कर तैयार हो गई ? तो उन्होंने जवाब में बीजेपी के चुनावी नारे को दोहराते हुए कहा - "मोदी है तो मुमकिन है।"

फिल्म प्रमोशन से जुड़े कार्यक्रमों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

पीएम नरेंद्र मोदी का ट्रेलर

फिल्म के ट्रेलर में दिखाया गया

कश्मीर के बर्फीले इलाक़े में सेना की एक टुकड़ी के साथ पीएम मोदी आगे आगे चल कर पुल पार कर रहे हैं उनके हाथ में तिरंगा है। तभी घाटी के चरमपंथी गोलिया चलाने लगते हैं और सेना भी काउंटर फायरिंग शुरू कर देती है। इन सब के बीच नरेंद्र मोदी तिरंगे को लेकर घुटने के बल बैठ जाते हैं और बोलते हैं कि - देश के हर कोने में यह तिरंगा लहराएगा। हिंदुस्तान आतंक से नहीं, आतंक हिंदुस्तान से डरेगा।

फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ का यह सीन ढाई मिनट के ट्रेलर का सबसे दमदार सीन है और हाथ में झंडा उठाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्वाश से लबरेज नज़र आ रहे हैं। आम चुनावों से पहले इस फ़िल्म ने देश में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

कांग्रेस की शिकायत के बाद चुनाव आयोग इस बात की जाँच कर रहा है, कि फिल्म में बीजेपी का पैसा लगा है या नहीं। फिल्म कहीं अचार सहिंता का उल्लंघन तो नहीं कर रही। फिल्म के निर्माता संदीप सिंह के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी महान व्यक्ति हैं। उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा "हमने ये फिल्म इसलिए बनाई ताकि लोग इस फिल्म को देखें और समझे की नरेंद्र मोदी जैसे महान नेता देश को कभी-कभी मिलते हैं। लोग उनसे प्रेरणा ले सकें। उन्होंने कहा राजनीति से मेरा कोई लेना देना नहीं है। अगर मोदी विरोधी इस फिल्म से डरते है तो ये उनकी गलती है। उन्हें खुद पर और अपने कामों पर भरोषा नहीं है।

प्रोपोगंडा मूवी पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह अपने कार्यकाल में ऐतिहासिक झूठ बोला है, ठीक उसी तरह सच्ची कहानी का वादा करती प्रधानमंत्री मोदी की फिल्म 'पीएम नरेंद्र मोदी' भी झूठ पर आधारित है। हालांकि हम फिल्म के ट्रेलर को देख कर अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि ये फिल्म कितनी सच्ची है लेकिन फिल्म का ट्रेलर बनावटी लगता है। फिल्म के ट्रेलर में प्रधानमंत्री मोदी को देखकर किसी सुपरहीरो पर बनी फिल्म जैसी फीलिंग आती है। जैसे कोई 'महानायक' या सीधे तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी की यह फिल्म में उनका महिमा-मंडन किया गया है।

फिल्म रिलीज़ की टाइमिंग भी इसे प्रोपोगंडा मूवी बनाती है। जनवरी में इस फिल्म की शूटिंग शुरू हुए थी और अप्रैल में लोकसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले फिल्म को रिलीज़ किया जा रहा है। यह पहली फिल्म है जो सिर्फ तीन महीने में बन कर रिलीज़ के लिए तैयार है। इस फिल्म के माध्यम से मोदी की छवि सुधरने की कोशिश की जा रही है। फिल्म के कई सीन भी बताते हैं कि मोदी को इस फिल्म में राजनेता के बजाए देशभक्त बताया जा रहा है।

जावेद अख्तर, नरेंद्र मोदी के आलोचक रहे हैं। उन्होंने इस फिल्म के लिए गीत नहीं लिखे। लेकिन जानबूझ कर इस फिल्म के पोस्टर में उनका नाम डाला गया। क्योंकि फिल्म निर्माता ये बखूबी जानते थे कि जावेद का पोस्टर में नाम आने पर वे इस फिल्म पर हमला करेगें और इससे फिल्म को पब्लिसिटी मिलेगी।

फिल्म के ट्रेलर में गुजरात दंगों का जिक्र भी है। 2002 में हुए इस दंगे के बाद नरेंद्र मोदी दुखी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि गोधरा कांड के समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे उस समय उनपर आरोप भी लगा था कि उन्होंने दंगा रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाया था।

फिल्म के निर्माता संदीप सिंह ने कहा कि - प्रधानमंत्री मोदी की फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। लेकिन फिल्म में थोड़ा काल्पनिक बदलाव किया गया है। फिल्म को वर्तमान समय के हिसाब से ढालने के लिए मोदी के इतिहास में बदलाव किया गया। फिल्म बनाते समय हमारे दिमाग में यह सुनिश्चित करना जरुरी था कि हम ऎसी फिल्म बनाये "जो दर्शकों को पसंद आए "

यानी निर्माता ने घटना को आधार मानते हुए, किरदारों में बदलाव किये हैं और ऐसी फिल्म बनाई है जो पीएम मोदी के समर्थकों को पसंद आये। इसलिए इस फिल्म को प्रोपोगंडा मोदी कहना गलत नहीं होगा।