क्या कादर खान को अमिताभ बच्चन का ईगो ले डूबा?आज खान साहब का बर्थडे है

कादर खान के जन्मदिन पर आज हम आपको बताएंगे कैसे अमिताभ बच्चन को "सर" ना बुलाना उनके करियर के अंत का कारण बना।
क्या कादर खान को अमिताभ बच्चन का ईगो ले डूबा?आज खान साहब का बर्थडे है
Amitabh Bachchan and Kader khan controversyUday Bulletin

अगर सिनेमाई इतिहास पर नज़र डाली जाए तो इसका एक बड़ा हिस्सा कादर खान के हिस्से में आता है, फिर चाहे वह अभिनय की बात हो या संवाद लेखन की। अपने हिस्से में आई हर जिम्मेदारी को कादर साहब ने बखूबी निभाया, भले ही फ़िल्मी दुनिया में लोग स्टार बने हो या सुपरस्टार लेकिन कादर खान की जो जगह सिनेमा में है वह जगह कोई नहीं ले सकता, अक्टूबर महीने की 22 तारीख़ को उनका बर्थडे होता है, आइये उनके कैरियर की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डालते है।

उथल-पुथल से भरी रही जिंदगी:

22 अक्टूबर 1937 को बलूचिस्तान की सरजमीं में कादर खान का जन्म उस वक्त हुआ जब बलूचिस्तान अपने अस्तित्व की लड़ाई अंदरूनी तरीके से ब्रितानी साम्राज्य से लड़ रहा था, उस वक्त बलूचिस्तान क्या पाकिस्तान भी भारत का ही अंग था, पाकिस्तान की थ्योरी कुछेक राजनेताओं के दिमाग मे जरूर रही होगी लेकिन आम आदमी को इसकी कोई भनक नहीं थी।

खैर कादर खान जाति से पश्तून थे और वहां से निकल कर बम्बई यानी की मुम्बई आये और यहां पर रहकर पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ छोटा मोटा काम करने लगे। अभिनय से लगाव था तो कादर खान अक्सर अपने कॉलेज के कार्यक्रम में प्ले इत्यादि करते रहते इसी दौरान कादर खान पर अभिनेता दिलीप कुमार की नजर पड़ी और दिलीप साहब ने कादर खान को सगीना महातो और बैराग फिल्मों में काम दिया, इसके बाद कादर खान ने कभी मुड़कर नहीं देखा। फ़िल्म लेखन से जुड़कर कादर खान ने कई अभिनेताओं और फ़िल्म निर्माताओं को जीवन दान दिया।

गोविंदा, शक्तिकपूर सब कादर खान की देन है:

अगर आपको लगता है कि गोविंदा केवल अपनी कला के दम पर सिनेमा में छाए रहे तो रुकिए जरा ठहरिए, गोविंदा ने जिस वक्त सिनेमा में इंट्री मारी वो अधिकतर सह अभिनेता के तौर पर ही नज़र आते थे।

जिन फिल्मों में गोविंदा ने अकेले काम किया या तो वह ज्यादा चली नहीं या फिर उन्हें एक क्षेत्र विशेष की फिल्में कहा गया, लेकिन इसी दौरान कादर खान ने गोविंदा के लिए फिल्में लिखी, डायलॉग लिखे और ये डायलॉग गोविंदा के लिए संजीवनी बन गए।

उस वक्त कम लंबाई वाले कलाकारों के लिए एक्शन फिल्म करना सही नहीं माना जाता था, लेकिन कादर खान ने हास्य फिल्मों का वह जॉनर खड़ा किया जिसको लेकर बॉलीवुड अभी तक दौड़ रहा है, ठीक वैसा ही शक्ति कपूर के साथ हुआ, कादर ने शक्ति कपूर को एक विलेन की भूमिका से निकाल कर अनिवार्य अभिनेता बना दिया, यह बात अलग है कि शक्ति कपूर और गोविंदा आज भी कादर भाई के किये काम को नहीं नकारते और उनके दिए गए योगदान को लगातार श्रेय देते है।

अगर आपको पता न हो तो यहां बताता चलु की सुपरस्टार राजेश खन्ना की बेहद चर्चित फिल्म "रोटी " के कालजयी डायलॉग कादर खान ने ही लिखे थे।

अमिताभ को सर जी न कहना पड़ा भारी:

अगर अमिताभ बच्चन के सिनेमा के इतिहास को देखें तो इसमें कादर खान का बहुत बड़ा योगदान है। फिर चाहे वह फ़िल्म कुली हो या अन्य फिल्में, कादर ने अमिताभ की कई फिल्मों के डायलॉग लिखे और स्क्रीनप्ले को जीवंत किया। यही नही खुद अमिताभ के साथ फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब बॉलीवुड में गुटबाजी और खुद की प्रतिष्ठा जैसी चीजें उभर कर सामने आयी। चूंकि कादर खान बेहद सह्रदय टाइप के आदमी थे, बेहद नरम और सौम्य स्वभाव के, जो अंदर वो बाहर, लेकिन जैसे-जैसे अमिताभ का सितारा बुलंद हुआ स्टारडम उनके सर चढ़कर बोलने लगा।

खुद कादर बताते है कि केवल अमित (अमिताभ बच्चन) को सर जी न कहने पर उन्हें न सिर्फ उनके ग्रुप से बाहर निकाला गया बल्कि उन्हें फिल्म मिलना लगभग बंद सा हो गया, दरअसल अमिताभ खुद को अमित सर कहलवाना पसंद करते थे, हालाँकि कादर खान ने हमेशा उन्हें अमित ही कहा, कादर खान का पक्ष यह था कि क्या कोई अपने दोस्त और भाई को भी सर कहता है?

कादर खान का वह इंटरव्यू जिसमें उन्होंने इस वाकये का खुलासा किया था

हालांकि कला के इस नुमाइंदे का निधन 31 दिसम्बर 2018 को लंबी बीमारी के चलते हो गया, लेकिन कादर खान की फिल्में हमेशा हमें गुदगुदाती रहेगी।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

Related Stories

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com