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कुछ इस तरह के मीम्स की सोशल मीडिया में बाढ़ सी आ गयी हैं।
कुछ इस तरह के मीम्स की सोशल मीडिया में बाढ़ सी आ गयी हैं।|Social Media
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ट्विटर पर लगातार ट्रेंड हो रहे मोटा भाई , संभावनाओं को पलट, अपनी चाल कामयाब की

क्या अब अमित शाह राजनितिक कंसलटेंट का भी काम करेंगे?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

आज सुबह से ही ट्वीटर पर अमित शाह ऐसे छाए हैं कि ट्विटर के सीईओ भी शर्मा जाए, अगर मजाक के तौर पर कहें तो ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आज का मैन ऑफ द डे अमित शाह रहे, कोई उन्हें चाणक्य कहता नजर आ रहा है तो कोई विश्व के किसी देश मे सरकार बनाने के लिए अमित शाह से कंसल्टेंसी लेने की बात कह रहा है।

रात को अखबारों ने शिवसेना के युवराज उद्धव ठाकरे के राजतिलक की लेख सामग्री छाप कर फुर्सत हुए, और सोने को गए तब भाजपा के वर्तमान मास्टरमाइंड अमित शाह ने हरकरत करना शुरू किया, नतीजा यह हुआ कि सुबह होते ही लोगो के घरों में समाचार पत्र तो पहुंचे लेकिन वो सब फेक खबरों से भरे पड़े थे, अमित शाह ने अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ सुबह होते-होते दिला दी।

शपथ को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद तस्दीक करते नजर आए

"मी देवेंद्र गंगाधरराव फडणवीस "

राउत राजनीति में कृष्ण से शकुनि बना दिये गए :

भाजपा-शिवसेना के अलगाव और विचारधारा विघटन की शुरुआत 2014 के बाद से ही शुरू हो गयी थी, लेकिन अब तक शिवसेना अपनी मराठी मानुष और कड़े हिंदुत्व की विचारधारा के साथ थी, लेकिन भाजपा के दोबारा केंद्र में सरकार बनाते ही शिवसेना को अपने अस्तित्व पर खतरा नजर आने लगा था।लगभग हर माह सास-बहू की तरह खुन्नस शुरू थी, महाराष्ट्र चुनाव के पहले यह तकरार सबके समझ मे आ चुकी थी, शिवसेना नेता संजय राउत कई जगहों पर इस बात का खुलासा कर चुके थे कि हम परजीवियों की तरह नही है विकल्प सांमने आने पर हम करारा जवाब देंगे, और ऐसा हुआ भी।

महाराष्ट्र की जनता ने भले ही भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें दी हो लेकिन जादुई आंकड़े से दूर होने के बाद भाजपा सत्ता की कुर्सी से उतनी ही दूर थी जितनी कांग्रेस, एनसीपी, और शिवसेना।

इस बीच संजय राउत राजनीतिक महाभारत में कृष्ण की भूमिका करते नजर आए, संजय राउत ने कांग्रेस, एनसीपी और अन्य राजनीतिक दलों और निर्दलीयों के साथ संपर्क साधना शुरू कर दिया।

22 नवंबर की रात होते-होते पूरे देश मे यह संदेश गया कि महाराष्ट्र के अगले सीएम उद्धव ठाकरे ही होंगे, इस बारे में बाकायदा ब्रीफिंग देकर संजय राउत नींद के आगोश में खो गए, यहाँ पर एक बात गौर करने योग्य है कि कांग्रेस के बड़े नेता मल्लिकार्जुन खड़के महाराष्ट्र चुनाव के पहले से ही यहाँ की राजनीति पर नजर रख रहे थे, लेकिन उनकी नजर को बचाकर रात के स्याह अंधेरे में अखबारों की हेडलाइन को झूठा करार किया गया।

एनसीपी के अजीत पवार को भाजपा ने अपने पाले में करके सरकार बनाने की घोषणा की, आनन-फानन में राष्ट्रपति शासन को हटाकर राजभवन में देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री पद पर काबिज करा दिया गया।

अब जबकि इस सनसनीखेज मामले को संजय अपने लेवल पर ही हेड कर रहे थे तो उन्हें इस फेलियर का जिम्मेदार भी माना गया, लोगो ने संजय को श्री कृष्ण की भूमिका से हटाकर शकुनी बना दिया, उनके बारे में हर जगह मीम्स ही मीम्स तैर रहे है।

संजय मातोश्री पहुंचे कैसे ? भाई आखिर सुरक्षा भी कोई चीज होती है:

शरद पवार की भूमिका स्पष्ट नही :

भले ही हर जगह यह चर्चा है कि अजीत पवार ने शरद पवार को विश्वास में लिए बिना अपने विधायकों की कुछ संख्या भाजपा के हांथो में सौंपी और खुद को उप मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया, जानकारों की मुताबिक यह एक राजनैतिक स्टंट भी हो सकता है, जिसके परिणाम दूरगामी होंगे हालकि सुप्रिया सुले और खुद शरद पवार इसे परिवार के टूटने, विश्वाशघात जैसी घटना बता रहे हैं, लेकिन इस राजनैतिक स्थिति का प्रभाव काफी लंबे समय बाद नजर आने के आसार है।

विधायको को दल से निकालने की घटना या अपना समर्थन बराबर शिवसेना को देना अभी भी नाटकीय ही साबित हो सकता है खुद संजय राउत कुछ दिन पहले ही यह कह चुके है कि हमे शरद पवार और उनकी राजनीति को समझने के लिए कुछ और जन्म लेने पड़ेंगे।

एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने तो बाकायदा जानकारी भी दे दी कि किसको क्या मिला, किसने क्या खोया, और शिवसेना के चिन्ह को अलग प्रकार से प्रस्तुत किया:

कुल मिलाकर महाराष्ट्र की राजनीति अब नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है हालांकि आपको यहाँ बताते चले कि ये 5 साल के लिए अंत नही है अभी भी शिवसेना और एनसीपी ( एक भाग शरद पवार) और भाजपा और एनसीपी ( भाग 2 अजित पवार) अभी भी अपनी-अपनी बातों को लेकर कायम है।

हालाँकि ये तो आगे के घटनाक्रम के बाद ही पता चलेगा कि आखिर हाथी किस करवट बैठेगा।