बांदा के लाल ने एक बार फिर मनवाया लोहा, कला के क्षेत्र में पुरस्कारों की लगी झड़ी

मास्साब और ड्राप जैसी फिल्मों करने वाले एक्टर शिवा सूर्यवंशी बाँदा उत्तर प्रदेश से हैं।
बांदा के लाल ने एक बार फिर मनवाया लोहा, कला के क्षेत्र में पुरस्कारों की लगी झड़ी
actor shiva suryavanshiSocial Media

शिवा सूर्यवंशी किसी नाम के मोहताज नहीं है फिल्म मास्साब समेत अन्य कार्यो के लिए उन्हें विदेशों तक ख्याति प्राप्त हुई है। अबकी बार उन्होंने अपनी फीचर फिल्म ड्राप से लोगों का ध्यान खींचा है जो कि एक उपन्यास "ड्राप" पर आधारित है। हाल में ही इस फीचर फिल्म ड्रॉप और मास्साब दोनों को सराहा गया है।

shiva suryavanshi Drop
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पहले मास्साब और अब ड्राप:

शिवा सूर्यवंशी अभिनीत फीचर फिल्मों को एक बार फिर से फिल्म फेस्टिवल में पहचान हासिल हुई है, अबकी बार शिवा की दो फीचर फिल्मों मास्साब और ड्राप को नाशिक के दसवें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सराहा गया है।

ज्ञात हो मास्साब पहले से ही बेहद चर्चित फिल्म है इस फिल्म को देश और विदेश दोनों जगह बड़ी ख्याति हासिल हुई है। दोनों फिल्मों को बेस्ट फीचर फिल्म की कैटेगरी में सम्मानित किया गया है। ज्ञात हो कि नाशिक इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल सिनेमा के क्षेत्र में किये गए उम्दा कार्यो को लिए पुरस्कार प्रदान करता आ रहा है।

ज्ञात हो कि मास्साब ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा पर आधारित एक फिल्म थी। इस फ़िल्म में एक शिक्षक और छात्रों के साथ घटती हुई घटनाओं को बखूबी दर्शाया गया है। वहीँ ड्रॉप एक यात्रा वृतांत है जिसमें कुछ लोगों की यात्रा पंश्चिम बंगाल के गंगासागर से शुरू होकर गोमुख ( पवित्र गंगा नदी का उद्गम स्थल गंगोत्री) तक चलती है। यहां आपको जानना उचित रहेगा कि मास्साब एक हिंदी फीचर फिल्म थी वहीँ ड्रॉप अंग्रेजी भाषा में है। फिल्म मास्साब को फ्लोरिडा के कॉस्मिक फिल्म फेस्टिवल में भी चुना गया था जो भारतीय फिल्मों के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

बांदा से है शिवा सूर्यवंशी:

बाँदा से जुड़े हुए लोगों को इस बात की बेहद खुशी है कि इन दोनों फिल्मों में मुख्य कलाकार शिवा सूर्यवंशी जिले के मुख्यालय से करीब बीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव खुरहंड़ से ताल्लुक रखते है। इसी कस्बे में रहकर शिवा ने अपने अंदर के कलाकार को विकसित किया और फिल्मों के क्षेत्र में अपने नाम को रोशन किया।

गांव के निवासियों ने उदय बुलेटिन को इस बाबत जानकारी उपलब्ध कराई कि शिवा बचपन से ही मेधावी थे और कला की तरफ उनका बहुत झुकाव था, और उनकी इस कला को निखारने में उनकी शिक्षा और माता-पिता का बहुत ज्यादा योगदान रहा।

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उदय बुलेटिन
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