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जियो फाइबर से डिजिटल मार्केट में बढ़ सकता है मोनोपोली का खतरा

टेलीकॉम के बाद अब डिजिटल मार्केट में भी भूचाल मचाने आ रहा है जियो फाइबर, साथ ही बढ़ेगा मोनोपोली का खतरा। 

Puja Kumari

Puja Kumari

12 अगस्त को रिलायंस ने एक ऐसी घोषणा की जिसे सुनकर हर कोई खुश हो गया। दरअसल हम बात कर रहे हैं ‘जियो फाइबर सर्विस’ की, जिसके बारे में हर तरफ चर्चा हो रही है। वैसे अगर आपको याद होगा तो 3 साल पहले रिलायंस कंपनी ने जियो की लॉन्चिंग कर टेलीकॉम बाजार में तहलका मचा दिया था, इस बार भी जियो फाइबर के आने से काफी कुछ बदलने वाला है।

तगड़ी इंटरनेट स्पीड के साथ कम बजट में ढ़ेरों सुविधाएं देने वाला यह ऑफर लोगों को काफी रास आएगा। इस नई सर्विस के मार्केट में आने से जहां एक तरफ लोगों को भरपूर फायदा होगा वहीं दूसरी ओर डिजिटल सेक्टर में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिलेगा। सिर्फ इतना ही नहीं इसकी वजह से ब्रॉडबैंड कंपनी में मोनोपोली का डर बन गया है। अब मोनोपोली क्या है इसके बारे में हम आगे बताएंगे, इससे पहले ये जान लें कि जियो फाइबर क्या है और इससे कैसी क्रांति आने वाली है-लोगों के जीवन में व डिजिटल सेक्टर में भी ?

जियो फाइबर से कितना होगा लाभ

वैसे जियो फाइबर’ की घोषणा तो हो चुकी है लेकिन लोगों को ये सुविधा 5 सितंबर से मिलनी शुरू होगी। जियो फाइबर के आने से लोगों में ज्यादा खुशी देखने को मिल रही है, हो भी क्यों न भला, आज से पहले शायद ही किसी कंपनी ने महज 700 रूपए में इतना कुछ देने का जिम्मा उठाया होगा। 100 MBPS से 1 GBPS की इंटरनेट स्पीड के साथ 4K HD TV Set व 4K Setup Box भी फ्री में मिलेगा। कंपनी द्वारा दिए गए इस सेटअप बॉक्स में भी यूजर्स को इंटरटेनमेंट के लिए अन्य कई तरह के सर्विसेज मिलेंगे।

इसके अलावा सबसे खास बात तो यह है कि जो लोग वाई-फाई, टीवी और लैंडलाइन के लिए अलग अलग पैसे पे करते थें उनको अब इन सभी झंझटों से छुटकारा मिल जाएगा। जी हां क्योंकि ‘जियो फाइबर’ की सर्विस को लेते ही लोगों को इंटरनेट, टेलीफोन के साथ-साथ टीवी सेटअप बॉक्स समेत अन्य कई सुविधाएं एक ही कंपनी से मिल जाएगी।

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जियो फाइबर के लाने का क्या है मकसद

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि बीते कुछ सालों में रिलायंस कंपनी ने काफी तेजी से तरक्की की है और टेलीकॉम सेक्टर में टॉप पर आ गया है। जी हां आज के डेट में रिलायंस का दुनिया की दूसरी व भारत की पहली सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी के लिस्ट में शुमार है। अब इसके साथ ही जियो फाइबर के आने के बाद ब्रॉडबैंड की दुनिया में भी यह बहुत जल्द टॉप पर जगह बना लेगा। रिलांयस के इस सर्विस को लाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि वो देशभर में फाइबर इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सके। जियो फाइबर ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सुविधा को भी बदलकर रख देगी, लोगों को बफरिंग या फिर वेब सीरीज देखने में किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

क्या है मोनोपोली, और क्यों बना है इसका डर

अब बात करते हैं मोनोपोली की, तो इसे समान्यतः एकाधिकार भी कहा जाता है। सरल भाषा मेें समझे तो बाजार में किसी कंपनी का ऐसा अधिपत्य स्थापित होना कि विक्रेताओं के बीच मार्केट में कोई कम्पटीशन ही न हो, क्योंकि उसके अलावा मार्केट में कोई और विकल्प ही नही बचता है। ऐसे में ग्राहकों पर भी आने वाले समय में इसका असर पड़ सकता है। रिलायन्स भी कुछ इसी राह पर चलता नजर आ रहा है। आपने अगर गौर किया होगा तो जब से टेलीकॉम की दुनिया में जियो ने कदम रखा तब से बीएसएनएल, आईडिया, एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियों का मार्केट डाउन हो गया।

इतने सस्ते ऑफर लाकर जियो ने इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है। जियो 4जी स्पीड व फ्री कॉलिंग के लिए लोग ऐसे दीवाने हुए की हर किसी ने अपने पुराने सिम को छोड़कर जियो की सर्विस लेने को मजबूर हो गए। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही समय बाद ये बड़ी-बड़ी कंपनियां घाटे में पहुंच गई। अब ऐसे में जाहिर सी बात है जब कंपनी 'जियो फाइबर’ ला रही है तो इस बार सिर्फ टेलीकॉम कंपनी ही नही बल्कि पूरे के पूरे डिजिटल मार्किट पर इसका असर बड़े रूप से पड़ेगा और देखते ही देखते पूरे सेक्टर पर जियो का राज चलेगा। ऐसे में सरकार को अभी से ही इस मोनोपोली से बचने के लिए सचेत हो जाना चाहिए।