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Himalaya Trek
Himalaya Trek|Image Source: Pinterest
देश

“Red D Himalaya” में महिलायें बिखेरेगी अपनी चमक  

रेड डी हिमालया रैली बेहद कठिन पहाड़ियों और खतरनाक रास्तों से गुजरते हुए कारगिल, झांस्कार और लद्दाख में 4900 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचेगी। 

Sneha Sinha

Sneha Sinha

शिमला: दिल्ली की सुचि ठाकुर, चंडीगढ़ की अनु राणा और साराह कश्यप ऐसी तीन महिला चालक हैं, जो दुनिया की टॉप-10 सबसे कठिन रैलियों में से एक रेड डी हिमालया में अपनी चमक बिखेरने और पुरुषों को कड़ी टक्कर देने का माद्दा रखती हैं। सुचि और अनु राणा इस रैली के 20वें संस्करण के लिए तैयारी कर रही हैं। रैली की शुरूआत 8 अक्टूबर से होगी। यह रैली बेहद कठिन पहाड़ियों और खतरनाक रास्तों से गुजरते हुए कारगिल, झांस्कार और लद्दाख में 4900 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचेगी।

सुचि ने कहा, "मैं जीवन में जो कुछ भी करती हूं, उसका अंत रैली पर होता है। मैं बेहतरीन फार्म में हूं और इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि इस बार भी मैं इस रैली में चमक दिखा सकूंगी। मैं यहां प्रतिस्पर्धा के लिए आई हूं। पहाड़ों पर मनोरंजन के लिए गाड़ी नहीं चलाई जाती।"

सुचि की गिनती दुनिया की अग्रणी क्रास कंट्री हाई एटीट्यूड महिला रेसर्स में होती है। वह रेड में 12 बार हिस्सा ले चुकी हैं।

सुचि ठाकुर धर्मशाला से हैं लेकिन दिल्ली में रहती हैं। उन्होंने 2005 में पहली बार रेड में हिस्सा लिया था। इसके बाद से 2016 को छोड़कर सुचि ने हर बार रेड में हिस्सा लिया है। इस तरह वह किसी मोटरस्पोर्ट इवेंट में 4 गुणा 4 गाड़ी को हाई एल्टीट्यूड सड़कों पर एक लाख किलोमीटर तक चलाने वाली विश्व की पहली महिला बन गई हैं।

आईएएनएस के हवाले से पता चला है की सुचि ने 2017 में टी1 कटेगरी में पोडियम फिनिश किया था। 2015 में टी2 कटेगरी में वह पहले स्थान पर रही थीं और 2013 में टी2 कटेगरी में दूसरे स्थान पर रही थीं। 2016-17 की मारुति सुजुकी नेशनल ऑटोक्रास चैम्पियनशिप में वह नार्थ जोन 4 व्हील ड्राइव कटेगरी में पहले स्थान पर रही थीं।

“क्रास कंट्री रैली चैम्पियनशिप के लिए फिटनेस सबसे अहम होता है। आपको शारीरिक और मानसिक तौर पर हर तरह के माहौल में लंबे समय तक गाड़ी चलाने के लिए खुद को तैयार करना होता है। मैं काफी दौड़ती हूं। मैं रेजिस्टेंस ट्रेनिंग भी करती हूं और इसके अलावा हाई इंटेंस्टी इंटरवल वर्कआउट भी करती हूं।”

सुचि ठाकुर

विज्ञापन क्षेत्र के क्रिएटिव साइड में काम करने वाली सुचि मारुति सुजुकी डेजर्ट स्टार्म और एसजेओबीए सब हिमालय रैली में हिस्सा ले चुकी हैं।

साराह भी एक जानी-मानी राइडर हैं। वह एक्ट्रीम मोटो कटेगरी में 2015 में रेड डी हिमालया में फिनिश लाइन तक पहुंचने वाली पहली भारतीय हैं। रेड एस्ट्रीम मोटो कटेगरी में फिनिश लाइन तक पहुंचने वाली अन्य चालक आस्ट्रिया की क्लाउडिया होनेडेर हैं, जिन्होंने 2008 में यह कारनामा किया था।

साराह ने डेजर्ट स्ट्रॉम-2017 में एक और उपलब्धि हासिल की। वह एस्ट्रीम मोटो कटेगरी में रेस पूरी करने वाली पहली भारतीय बनीं थीं। इसी इवेंट के अगले संस्करण में साराह ने एक्ट्रीम मोटो कटेगरी के ओवरऑल वर्ग में आठवां स्थान हासिल किया था।

रेड डी हिमालया को 8 अक्टूबर को लेह से फ्लैग ऑफ किया जाएगा और 3000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह रैली 14 अक्टूबर को समाप्त होगी।

रेड में चौथी बार हिस्सा लेने जा रहीं अनु ने कहा, "मैं ऊंचाई पर लम्बे समय तक चुनौतीपूर्ण ड्राइविंग की चुनौती को पसंद करती हूं। इसके लिए बिल्कुल अलग तरह की ट्रेनिंग की जरूरत होती है और साथ ही साथ इसके लिए शरीर को अलग तरीके से तैयार करना होता है।"

“ हर मोड़ पर टैरेन पतली और चुनौतीपूर्ण होती जाती है। जब आप हल्के पत्थरों और बालू पर गाड़ी चला रहे होते हैं तो आपको पता होता है कि इस हालात में लम्बी दूरी तय गाड़ी चलाना काफी कठिन होता है। मेरी जैसी रेसर के लिए इस तरह का टैरेन काफी आकर्षक होता है लेकिन आपको अपनी कार की सीमाओं को नहीं भूलना चाहिए।”

अनु राणा

अनु ने साल 2015 में रेड की टी2 कटेगरी में दूसरा स्थान हासिल किया था। वह 2015 और 2016 में कूप डे डामेस जीतने में सफल रही थीं। उन्होंने दक्षिण डेयर रैली में 2015 में टी2 कटेगरी में दूसरा स्थान हासिल किया था। वह 2016 और 2017 के दक्षिण डेयर रैली में महिला वर्ग में पहले स्थान पर रही थीं।

एक फायनेंसियल कंस्लटेंट अनु रेड में अपनी बहन पूनम के साथ हिस्सा लेती हैं जो उनकी नेवीगेटर हैं। इस जोड़ी ने साथ मिलकर कई ट्रॉफियां जीती हैं।

रेड डी हिमालया 2018 का पहला स्टेज लामायूरू से फोटोस्कार तक आयोजित होगा। इसके बाद यह झांस्कार से उम्बा ला र्दे से होते हुए अपने मुकाम तक पहुंचेगा। इस दौरान चालक समुद्र तल से 4496 मीटर की ऊंचाई से होकर गुजरेंगे।

यह वैश्विक स्तर पर किसी भी रैली प्रतियोगिता के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण और दर्शनीय मार्ग है। रैली के दौरान चालक सिरिसिर ला र्दे को भी पार करेंगे जो कि समुद्र तल से 4805 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।