उदय बुलेटिन
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School van
School van|Source-theDolphin.com
देश

बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन ?

देश के सभी छोटे-बड़े स्कूलों में बस की सुविधा है, लेकिन उन बच्चों कि सुरक्षा का जिम्मेवार कौन हैं? क्या कोई एजेंसी की नज़र उन बच्चों पर है, या बच्चे अपनी सुरक्षा का उत्तरदायित्व खुद लिए बैठें हैं ?

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

हमारे बच्चें या तो बस से स्कूल जाते हैं या मिनी वैन से , या हमने कभी अपनी जिम्मेदार दिखा दी तो उन्हें स्कूल छोड़ आये | लेकिन स्कूल छोड़ने का सिलसिला केवल एक-दो दफा ही चलता है| ऑफिस और घर सँभालने के साथ-साथ बच्चों को स्कूल छोड़ना किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं लगता , और मुसीबत लगे भी क्यों ना, सुबह में लगने वाला ट्रैफिक जाम इन स्कूल बसों और मिनी वैन की-ही तो देन है| इस से बेहतर है हम अपने बच्चों को स्कूल बस से ही जाने दें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा बच्चों कि सुरक्षा में जारी किये गए निर्देशों को इन बसों द्वारा कभी पूरा नहीं किया जाता|

भोपाल के सागर इंटरनेशनल स्कूल में 3 साल की छात्रा के साथ स्कूल वैन ड्राइवर ने छेड़छाड़ की, इस घटना के बाद अब ये सवाल उठना लाजमी है, की स्कूल वैन में बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेवार कौन होगा, माँ-बाप , स्कूल प्रशासन या खुद बच्चे ?

बच्चों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का मानदंड

  • स्कूल वैन चलाने के लिए यात्री परिवहन द्वारा उचित आदेश लेना जरुरी हैं|
  • स्कूल बसों में स्कूल का नाम , फ़ोन नंबर लिखा होना चाहिए साथ ही बस के आगे और पीछे "स्कूल ऑन ड्यूटी" अंकित होना चाहिए|
  • स्कूल बस में प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए|
  • बच्चों के लिए सीट बेल्ट होना अनिवार्य है|
  • स्कूल बस ड्राइवरों को कम से कम ५ वर्ष का अनुभव अनिवार्य है. बस ड्राइवर के खिलाफ ट्रैफिक नियमों का उलंघन करने की शिकायत दर्ज न हो |
  • वाहन मालिकों को ड्राइवर का पूर्ण दस्तावेज स्थानीय पुलिस स्टेशन में सूचित करना जरुरी है |

फिर भी हो रही हैं दुर्घटनाएँ

इस महीने दिल्ली के मुख़र्जी नगर स्थित रोजरी पब्लिक स्कूल में LKG की छात्रा के साथ स्कूल में हुए कथित यौन शोषण की घटना हो या भोपाल के सागर इंटरनेशनल स्कूल में ३ साल की बच्ची के साथ बस ड्राइवर द्वारा छेड़छाड़ की घटना, नतीजा यही है- हमारे बच्चें सुरक्षित नहीं हैं|

क्या कहते हैं अधिकारी

मध्य प्रदेश स्कूल चालक सेवा समिति के अध्यक्ष कहते है की-

हम स्कूल वैन ड्राइवर की नियुक्ति से पहले उसके पुराने रिकार्ड्स को देखते है, और अगर पुलिस द्वारा जाँच कराने कि जरुरत पड़े तो वो भी करते हैं | हम यह भी सुनिश्चित करते हैं की स्कूल वैन ड्राइवर को कम से कम ५ वर्ष का अनुभव हो|
शिव कुमार सोनी 

लेकिन जब उनसे पूछा गया की अब तक कितने ड्राइवरों को आपने पुलिस जाँच के लिए भेजा है, तो उनके शब्द कम पड़ गए और इसके जबाव में उन्होंने चुप रहना ही बेहतर समझा , और जबाव देने से मना कर दिया |

मध्य प्रदेश माता-पिता संघ के सचिव कहते हैं “प्रदेश में एक भी ऐसे संस्था नहीं है जो स्कूल वैन में दी जाने वाली सुरक्षाओं को सुनिश्चित करे और ना ही कोई सुप्रीम कोर्ट के नियमों को मानता है| वैन मालिक भी ड्राइवरों की नियुक्ति से पहले पुलिस जाँच पर ध्यान नहीं देते, जिसका नतीजा आज सबके सामने है|” बाल यौन शोषण की घटना आये दिन सुनने को मिलती है|
प्रबोध पांडेय

स्कूल प्रशासन का जवाब

संत जोसफ कान्वेंट की प्रिंसिपल सिस्टर लिली कहती हैं -" हम अपने स्कूल बस ड्राइवरों की नियुक्ति से पहले सरकार द्वारा निर्मित निर्देशों का पालन करते हैं, लेकिन आज कल पेरेंट्स अपनी बच्चों के लिए खुद ही वैन बुक करते हैं, तो ये उनकी जिम्मेवारी है की वो अपने बच्चों कि सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें|

पेरेंट्स के बीच जानकारियों का आभाव

आज के कामकाजी पेरेंट्स अपने बच्चों का पूरी तरह से ध्यान रखने में असमर्थ हैं , समय की पाबंदियों के कारण उन्हें दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है. स्नेहा गुप्ता कोलार में रहने वाली 5 वर्षीय बच्चे की माँ हैं, उनका कहना है की "वैन हमारी सोसाइटी के दूसरे बच्चों को लेने आया करता था , इसलिए मैंने भी उसी ड्राइवर को चुना, मैंने दूसरे अभिभावकों की तरह बिना किसी जाँच के ड्राइवर पर विश्वास कर लिया , जो मूर्खतापूर्ण फैसला था|

संदीप सिंह 5 वर्षीय बेटे के पिता हैं उनका कहना है की " अब बाल शोषण से जुडी घटनायें हर रोज सामने आ रहे है , हमें जागरूक होना होगा, मेरे बेटे के स्कूल वैन में ना GPS है और ना CCTV , और ना ड्राइवर की जाँच की गई है , एक पिता होने के नाते मैं अब अपनी बेटे की सुरक्षा को नज़रअंदाज नहीं कर सकता|

क्या होनी चाहिए सुरक्षा के इंतजाम

  • स्कूल वैन में GPS व CCTV की सुविधा होनी चाहिए, जिससे पेरेंट्स को वैन की हर हलचल की खबर हो|
  • स्मार्ट स्कूल व स्मार्ट क्लास की तरह सुरक्षा को भी स्मार्ट बनाने की जरूरत है|
  • वैन ड्राइवर के अलावा वैन में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी मौजूद हो, जिससे बच्चों को संभालना आसान हो सके|
  • वैन में बच्चों की सीमित संख्या हो, जिससे सभी बच्चों को बैठने के लिए उपयुक्त स्थान मिले|
  • वैन ड्राइवर के चुनाव में सख्ती बरतने की जरुरत है, पुलिस जाँच के बिना वैन चलाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए |
  • माता-पिता को अपने बच्चों की हर गतिविधि पर ध्यान देना होगा, बच्चों के साथ फ्रेंडली बर्ताव रखें, जिससे बच्चें अपनी हर बात सहजता पूर्वक शेयर कर सके|