उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
Neutrino Observatory
Neutrino Observatory|Google
देश

क्या है ये न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी, आखिर इसे लेकर इतना क्यों मचा है बवाल

हमारे देश में आधुनिक ही नहीं बल्कि हर स्तर पर विकास के प्रयास में लगा हुआ है जिसमें तमिलनाडु में चल रहे न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट भी इसी का उदाहरण है।

Puja Kumari

Puja Kumari

आप सोशल मीडिया के जमाने में जी रहे हैं इसलिए कब क्या ट्रेंड करने लग जाए इसके बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता होता है बस लोगों को किसी चीज के बारे में बात करना अच्छा लगने लगे और वह टॉपिक दिलचस्प होता है तो आपको समझ जाना चाहिए कि यह ट्रेंड करेगा। आज हम आपको किसी ऐसे हैं विषय के बारे में बताने जा रहे हैं जो आजकल ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है आपने अगर गौर किया होगा तो इस समय #SaveTheniFromNEUTRINO नाम का शब्द ट्रेंड कर रहा है, हर कोई इस बारे में बातें कर रहा है। करीब 2 साल से तमिलनाडु के थेनी जिले में एक अंडर ग्राउंड रिसर्च फैसिलिटी बनाने का काम चल रहा था, जिसका विरोध वहां के लोग कर रहे थें, अब जाकर ये विरोध इतना बढ़ गया कि ट्विटर पर भी ट्रेंड करने लगा। आप सोच रहे होंगे कि भला ये न्यूट्रिनो है क्या? तो आइए जानते हैं...

क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino)

बात करते हैं न्यूट्रिनो (Neutrino) की तो इसे समझने के लिए आपको बचपन में पढ़े विज्ञान पर जरा गौर करना होगा। जैसा कि अपने पढ़ा भी होगा की हमारे चारों तरफ जितनी भी वस्तुएं हैं वो सभी अणु (Atoms) से बनी होती हैं, पहले कहा गया कि ये अणु सबसे छोटी होते हैं यानी कि इससे छोटा कुछ नहीं होता लेकिन फिर बताया गया कि इसमें भी काफी कुछ पाया जाता है जैसे कि इलेक्ट्रान, प्रोटोन व न्यूट्रॉन। जिस न्यूट्रिनो की हम बात कर रहे हैं वो भी एक ऐसा ही छोटा पार्टिकल यानी कण है जिसके बारे में अध्ययन करना काफी मुश्किल है, क्योंकि इसके अपना न कोई पार्ट होता है और न ही कोई आकार। सूर्य की किरणों के सहारे ये हम तक पहुंचता है।

क्या है न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (Neutrino Observatory project)

तमिलनाडु के थेनी में करीब 1500 करोड़ का ये प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है जो कि न्यूट्रिनो के बारे में स्टडी करने के लिए बनाया जा रहा है। ऐसा ऑब्जर्वेटरी दुनिया के अन्य स्थानों पर भी बना हुआ है जैसे कनाडा और इटली में इसे जमीन के अंदर बनाया गया है जैसा कि भारत में भी तैयार किया जा रहा है वहीं बात करें अंटार्कटिक और फ्रांस की तो वहां पर ये पानी के भीतर बना हुआ है। इसकी मंजूरी केंद्र सरकार ने मार्च 2018 में ही दे दी थी।

Neutrino Observatory project
Neutrino Observatory project
Google

क्या होगा यहां

ये सबसे बड़ा व खास सवाल है कि यहां आखिर क्या होगा, तो इस ऑब्जर्वेटरी में करीब 50 किलो टन का न्यूक्लियर डिटेक्टर लगाया जाएगा। जिसके लिए 2 किमी तक कि लंबी सुरंग तैयार की जा रही है और तो और इस डिटेक्टर को सुरंग के 1 किमी अंदर तक लगाया जाएगा ऐसा इसलिए क्योंकि बाकी के अणु उस तक पहुंच न सके। न्यूट्रिनो का अध्यन तभी संभव है जब उसके रिएक्शन को समझा जा सकता है कि ये आखिर किसी चीज से टकराने पर कैसे रियेक्ट करता है।

लोगोंं को क्यों हो रही है समस्या

तमिलनाडु के पोट्टीपूरम गांव में रहने वालो का इस प्रोजेक्ट को लेकर कहना है की पश्चिम क्षेत्र में मौजूद इन पहाड़ियों को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया है, पर यहां जो खुदाई और ऑब्ज़र्वेटरी के निर्माण से इस जगह की विविधता भंग होगी। लेकिन सरकार की तरफ से कहा जा रहा है इस प्रोजेक्ट से यह पर किसी भी तरह का रेडियेशन उत्पन्न नही होगा इसलिए इसे रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है।