उदय बुलेटिन
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आखिर क्या होती है ई-सिगरेट, इसे पीने से कितना हो सकता है नुकसान?

सरकार ने ई सिगरेट को बैन करने का ऐलान तो कर दिया है लेकिन क्या इसके बैन होने से सिगरेट पीने वालों की आदतें छूट जाएंगी?

Puja Kumari

Puja Kumari

'ई-सिगरेट' E-cigarette इसका नाम हमने से कई लोगों ने तो पहली बार सुना होगा वहीं कई लोग इससे परिचित भी होंगे। जो लोग स्मोकिंग के शौकीन होंगे वो इसे बेहद अच्छे से जानते होंगे, वैसे यह भी सच है कि आजकल ई सिगरेट की चर्चा देशभर में हो रही है क्योंकि हाल ही में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 18 सितंबर को मीडिया से रूबरू होकर जानकारी दी कि अब भारत देश में इसे बैन कर दिया जाएगा। हालांकि ऐसा क्यों किया गया और क्या ये करना जरूरी था ? इन सभी सवालों के जवाब हम आपको जरूर देंगे लेकिन उससे पहले जान ले कि आखिर ये ई सिगरेट होता क्या है ? क्योंकि कई लोग ऐसे हैं जो इसके बारे में विस्तृत रूप से नही जानते हैं।

क्या है ई-सिगरेट (E-cigarette)

ई-सिगरेट यानी कि 'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट' यह एक तरह से देखा जाए तो नॉर्मल सिगरेट से थोड़ा कम हानिकारक है। ENDS (Electronic Nicotine Delivery System) बैटरी संचालित उपकरण होते हैं जो शरीर में निकोटिन पहुंचाने का काम करते हैं और ये सबसे ज्यादा के सिगरेट में ही प्रयोग किये जाते हैं।यही वजह है कि जो लोग अपनी स्मोकिंग की आदत को छोड़ना चाहते है और छोड़ नहीं पा रहे हैं तो वो अपने नॉर्मल सिगरेट को इससे बदल सकते हैं क्योंकि ई-सिगरेट नॉर्मल सिगरेट के मुकाबले फेफड़ों को 95% तक कम नुकसान पहुंचाता है। वैसे हम ये बिल्कुल नहीं कह रहे है कि ई-सिगरेट की आदत अच्छी होती है लेकिन कुछ लोग जो बहुत ही ज्यादा सिगरेट पीते हैं उनका कहना ये है की इसके सेवन से उनके हेल्थ को किसी भी तरह की समस्या नही होती है।

किसने किया इसका अविष्कार

वैसे ई-सिगरेट का अविष्कार करने वाले कोई और नहीं बल्कि चीनी फार्मासिस्ट हार्म लीक हैं। साल 2003 में उन्होने इसे पेटेंट करा लिया और 2004 में यह बाजार में आ गया। ई-सिगरेट में निकोटिन जलता नहीं है जिसकी वजह से धूंआ नहीं बनता बल्कि गर्म होकर भांप बन जाता है और इसे पीने वाला भांप खींचता है न की धुंआ।

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इसे क्यों किया जा रहा है बैन

अब आपके मन मे एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर जब इससे कोई इतनी बड़ी समस्या नही होती तो अचानक से सरकार इसे बंद करने का ऐलान क्यों कर रही ? DCA (Drugs and cosmetic act 1940 ) की माने तो एक खास तरह के निकोटिन को ही स्मोकिंग के लिए स्वीकृति मिली है। लेकिन के सिगरेट में जो निकोटिन का प्रयोग होता है वो DCA की इस कैटगरी के बाहर का है इसलिए सेहत पर हो वाले नुकसान के लिहाज से इसे बैन करने का आदेश दिया गया है। भले ही तर्कों के आधार के सिगरेट नार्मल सिगरेट के मुकाबले कम हानिकारक लगता है लेकिन ऐसा नहीं है। ये तर्क सिर्फ उनलोगों पर लागू होते है जो पहले से ही सिगरेट पीने के बहुत बड़े आदि है।

निकोटिन हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है चाहे वो थोड़ा-थोड़ा करके हमारे अंदर जाए या ज्यादा मात्रा में नुकसान तो वो करता ही है। यह सिगरेट बस देखने मे कूल लगती है और इसके कई सारे फ्लेवर मार्किट में मौजूद है जिससे सिगरेट पीने वाले भले ही इस ई-सिगरेट में स्विच करे या न करे लेकिन युवाओं को इस नए आदत की ओर खींच जरूर सकती है। वैसे ई-सिगरेट को बैन करने वाला भारत पहला देश नही है बल्कि अमेरिका में इसे काफी पहले ही बैन लगा दिया गया है। फ्रांस, चीन में भी इसे बैन किया गया है।