Vikas Dubey Wife and Son
Vikas Dubey Wife and Son|Social Media
देश

घुटनों पर बैठा हुआ बच्चा समाज से कुछ सवाल करता है !

विकास के एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं, विकास के मारे जाने के बाद विकास और राजनेताओं व पुलिस अफसरों का संपर्क उजागर नहीं हो पाएगा।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

उसका सिर्फ दोष इतना है कि वह कानपुर पुलिस गोलीकांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे का लड़का है, एक आरोपी या हत्या के दोषी पुत्र होने पर यह सजा की बच्चे को घुटनों पर बैठा कर हैंड्स अप की पोजिशन में बैठाया जाए, ये स्थिति तभी उत्पन्न होती है जब सामने वाले ने उसे बंदूक की नोक पर रखा हो।

अगर ये पुलिस का किया है तो फिर विकास और पुलिस में अन्तर क्या रहा ?

कहते है विकास दुबे का वह आतंक था कि गांव और इलाके में कोई उसके विरूद्ध कुछ भी कहने से डरता था इसका ताजा नमूना विकास ने दिखाया कि वह कितना दुर्दांत था। उसने न सिर्फ आठ पुलिसकर्मियों की गोलीमार कर हत्या की बल्कि सुबूत मिटाने के लिए शवो को जलाने की कोशिश भी की लेकिन समय रहते पुलिस के पहुँचने पर यह संभव नही हो पाया, लेकिन पुलिस प्रोफेशनल बल है उसके लिए अपराधी सिर्फ अपराधी ही होता है निजी कुछ भी नहीं। लेकिन यहाँ सोशल मीडिया में तैरती तश्वीर कुछ और कहती है, देर शाम तक जब विकास ने नाटकीय ढंग से मध्यप्रदेश के उज्जैन में खुद को सरेंडर किया या पकड़ा। उसके बाद ही उसकी पत्नी ऋचा और छोटा बेटा पकड़ लिया गया। वो भी एक खाली प्लाट से देखने पर मालूम होता है कि विकास की पत्नी ने पैरों में घरेलू चप्पल पहन रखी थी और बच्चे ने घर मे पहने जाने वाले घरेलू कपड़े, लेकिन जिस स्थिति में माँ और बच्चे को सामने बैठाया गया है वह तकलीफ दे जाता है।

बच्चा इस मंजर को जीवन भर नहीं भूलेगा:

एक उम्र के बाद लोगों को भूलने की आदत हो जाती है लेकिन बालमन की अपनी एक खासियत है वह जो देखता सुनता और महसूस करता है उसे अपने कोरे कागज के माफिक दिमाग पर चस्पा कर लेता है और ताउम्र नही भूलता। ठीक वैसे ही विकास के बेटे के साथ हुआ होगा, उसे उस गुनाह के लिए गन पॉइंट पर रखा जा रहा है जो उसने किये ही नहीं बल्कि उसके पिता ने किये हैं। बस उसे इस बात की सजा मिल रही है कि वह उस दुर्दांत अपराधी का बेटा है।

निजी तौर पर हमें लगता है कि पुलिस को उस बच्चे के साथ नरमी से पेश आना चाहिए ताकि उसके मन मस्तिष्क में कानून के प्रति कोई गलतफहमी और दुर्व्यवहार न जाग जाए अन्यथा उसके दिमाग मे भी कोई अपराधी जन्म ले सकता है और इसके जिम्मेदार हम सब होंगे।

डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार है जिनका समर्थन उदय बुलेटिन कभी नहीं करता फिर भी मामला बच्चे से जुड़ा होने के कारण उदय बुलेटिन यह अपेक्षा करता है कि बच्चे को उसकी आयु के अनुरूप न्याय मिले।

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उदय बुलेटिन
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