Freelance Journalist Rizwana tabassum Suicide
Freelance Journalist Rizwana tabassum Suicide|Uday Bulletin
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बड़े-बड़े मीडिया हाउस के लिए लिख चुकी स्वतंत्र पत्रकार रिजवाना ने आखिर मौत क्यों चुनी ?

रिजवाना तबस्सुम वाराणसी की रहने वाली थी और कई मीडिया हाउस के स्वतंत्र लेख लिखती थी। स्वतंत्र पत्रकार रिजवाना तबस्सुम ने सोमवार को अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

चूंकि मामला संदिग्ध है इसलिए इस मामले पर हर कोई ज्यादा बोलने से कतरा रहा है। लेकिन इस मामले के तार ब्लैकमेलिंग अथवा यूज एंड थ्रो जैसे मामले की ओर इशारा करते हैं मामले में एक स्थानीय समाजवादी पार्टी के नेता का नाम उछला है

बेहद कम उम्र में मौत को गले लगाया :

एक 28 वर्ष की लड़की जो बेहद दकियानूसी खयालों वाले परिवार से निकल कर समाज मे आयी और पत्रकारिता की दुनिया मे एक बेहद ठीक-ठाक मुकाम पाया बीबीसी से लेकर बड़े-बड़े न्यूज़ पोर्टल के लिए लिखा। लेकिन अचानक ही घर के बंद कमरे में फांसी के फंदे पर लटकी हुई लाश पायी गयी। बनारस की इस घटना ने पत्रकार जगत में एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है। कि आखिर रिजवाना तबस्सुम जैसी जिम्मेदार लड़की अगर आत्महत्या को चुन रही है तो सवाल बहुत बड़ा होगा।

पढ़ाई के साथ-साथ पत्रकारिता :

मृतक रिजवाना के घरवालों ने मीडिया को जानकारी दी कि रिजवाना अपने घर मे 6 भाई बहनों के बीच की थी और बहनों में सबसे बड़ी थी। रिजवाना की बहन ने बताया कि दीदी ने इंटरमीडिएट के बाद ही नजदीकी मदरसे में पार्ट टाइम अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों को पढ़ना शुरू कर दिया था इसी बीच में रिजवाना ने बीएससी की पढ़ाई जारी रखी और बीएससी के बीच मे ही ग्रामीण नारीवादी पत्रकारिता करने वाली सूचना प्रदाता खबर लहरिया के साथ काम करना शुरू कर दिया था। बीएससी के बाद रिजवाना ने बनारस हिंदू विश्व विद्यालय से मास कमन्यूकेशन की पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद रिजवाना ने फ्री लांसिंग (Freelance Journalist Rizwana tabassum Suicide) शुरू की जिसमें वह बीबीसी हिंदी और द क्विंट जैसे प्लेटफार्म के लिए लिखती रही।

सुसाइड नोट में सपा नेता :

मृतक रिजवाना ने अपने सुसाइड नोट में स्थानीय सपा नेता शमीम नोमानी का नाम लिखा है जिसको लेकर सबको उहापोह की स्थिति है। क्योंकि सपा नेता का वर्चस्व और रसूख बेहद ज्यादा है। सबसे तकलीफ देह बात तो यह है कि रिजवाना ने जिन -जिन वेबसाइट के लिए लिखा वो भी राजनीतिक दबाव के कारण रिजवाना के पक्ष में नहीं लिख सकी और इस मामले को केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित कर दिया।

एक ओर जहां भारत मे पत्रकारिता पत्रकारों के बोलने की आजादी पर सवाल उठाती रही है ऐसे वक्त में में उभरती पत्रकार का यूँ आत्महत्या करके जाना तकलीफ़ पैदा करता है।

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उदय बुलेटिन
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