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Kamlesh Tiwari
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देश

प्रदेश में सब कुछ ठीक नही, सरकार अपने आप को साफ और किलियर बता रही लेकिन ये हत्या तो बेहद सुनियोजित थी

योगी सरकार प्रदेश की कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

अगर आप उत्तर प्रदेश के निवासी है और चर्चित भी है तो आप कहीं भी सुरक्षित नही है भले ही आपको कितनी तगड़ी सुरक्षा मिली हुई हो, सरकार भले ही अपने आप को पाक साफ बताकर निकलने का प्रयास करे, लेकिन हालात कुछ अलग ही अंदाज बयां कर रहे है!

दिन दहाड़े उत्तर प्रदेश की राजधानी में किसी संगठन के अध्यक्ष का इस तरह कत्ल हो जाना किसी आम ओ खास के गले नही उतर रहा, लखनऊ के खुर्शीद बाग इलाके में स्थित ऑफिस में घुसकर हिन्दू महासभा के पूर्व नेता और वर्तमान में हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या की गई, उनके पेट, और गर्दन पर चाकूओं से ताबड़तोड़ वार करके उन्हें कत्ल किया गया और आखिरी में उन्हें एक गोली भी मारी गयी, यह सब तब हुआ जब प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग के मुखिया के अनुसार उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली हुई थी।

आखिर क्यों चर्चित थे कमलेश :

हिंदूवादी चेहरा और हिन्दू समाज के हितों की बातें करने वाले कमलेश तिवारी अपने मुद्दों पर बेहद मुखर नजर आते रहे है इसी वजह से उन्हें एक समुदाय विशेष पर धार्मिक टिप्पड़ी करने पर कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ा था, सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का अभियोग लगाया था, इसी मामले को लेकर उन्हें लंबे समय से लगातार धमकियां मिल रही थी, और कमलेश तिवारी द्वारा सरकार से पुलिस सुरक्षा बढ़ाये जाने के लिए लगातार आग्रह किया जा रहा था, कई राजनैतिक और धार्मिक संगठनों द्वारा उनके सर को कलम करने के लिए 51 लाख का इनाम घोषित किया था।

रामजन्म भूमि मामले में भी पक्षकार थे तिवारी:

ऐसे मौके पर कमलेश तिवारी का कत्ल हो जाना हज़ारों सवाल उठाता है क्योंकि एक ओऱ सुप्रीम कोर्ट ने जब रामजन्मभूमि मामले का फैसला सुरक्षित कर लिया है तब उस मामले से जुड़े पक्षकार की आईएसआईएस की तर्ज पर निर्मम हत्या हो जाये, गौरतलब हो कमलेश तिवारी ने 2010 में जब वह हिन्दू महासभा के अध्यक्ष पद पर काबिज थे तब उन्होंने रामलला मामले में एक वाद दायर किया था, इस प्रकार से वो इस सुनवाई से सीधे-सीधे जुड़े हुए थे।

पुलिस मुखिया की अपनी कहानी है :

जब एक चर्चित व्यक्ति अपनी सुरक्षा को लेकर सरकार और विभाग से इतनी दफे मांग कर चुका है और उसपर कोई सुनवाई नही होती तब सरकार और पुलिस के मंसूबे शक की बिनाह पर होते है, इतनी बड़ी हत्या के बाद भी पुलिस के मुखिया एक स्माल ला एंड आर्डर की समस्या बताते हुए नजर आते है।

एडीजी साहब ने मौके पर जाकर स्थिति तो सम्भाली, लेकिन जनता का विरोध झेलना पड़ रहा है !