युवा जगा रहे गावों में चेतना, अधिकारियों द्वारा की जा रही मुहिम की अनदेखी

चित्रकूट के युवा सामाजिक चेतना जागृत करने का काम कर रहे हैं
युवा जगा रहे गावों में चेतना, अधिकारियों द्वारा की जा रही मुहिम की अनदेखी
युवा जगा रहे गावों में चेतनाउदय बुलेटिन

ग्रामीण जीवन किसी भी देश की प्राथमिक इकाई होती है, एक बार तो खुद महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर देश की सूरत को बदलना है तो सबसे पहले गांवों को सुधार दो देश अपने आप महान हो जायेगा लेकिन अगर वर्तमान परिदृश्य पर नजर डाले तो गांव और देश के बीच मे एक लंबी दूरी बनती जा रही है और इसे बढ़ाने का काम किया है गैर जागरूकता, अशिक्षा, विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों ने देश मे बुंदेलखंड जैसा भूभाग जिसे लंबे अरसे से केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा उपेक्षित बनाया गया है उस क्षेत्र के कर्वी (चित्रकूट) जिले के एक युवाओं द्वारा एक अनोखी मुहिम चलाई जा रही है। युवाओं के द्वारा अपने मुहिम द्वारा ग्रामीण परिवेश में पहुँच कर ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने हेतु चर्चाएँ की जा रही है।

युवा कर रहे प्रयास:

इस कड़कड़ाती सर्दी में जब नेता और अधिकारीगण अपने-अपने बंगलो में ब्लोवर चलाकर सर्दियों का आनंद ले रहे है तब युवाओं की एक टोली गांव-गांव तक पहुंचकर गांवों में अलख जगाने का प्रयास कर रही है। ग्रामीण मुद्दों पर मंथन, निराकरण और निदान तक कि कोशिश करती यह मुहिम धीरे-धीरे विशाल रूप ले रही है। लेकिन इस मुहिम की वजह से जिम्मेदार लोगों को मध्यम प्रकार की आपत्ति होनी भी शुरू हो गयी है। जिसके प्रमाण हाल की ही कुछ गतिविधियों से मिले है।

क्यों जरूरी है गांव पर चर्चा:

चित्रकूट पाठा क्षेत्र का ग्राम्य जीवन जो लंबे वक्त से लाल फीताशाही, इंस्पेक्टर राज और बंदूक की नली से निकलने वाली ताकतों से लड़ता रहा अब उसमे इन ताकतों का दबदबा थोड़ा बहुत कम हुआ है। चूँकि बुनियादी सुविधाओं और जागरूकता का बोलबाला केवल शहरों ताल ही सीमित रहता रहा है इस प्रकार से ग्रामीण इलाके न सिर्फ इन क्रियाकलापों से दूर ही रहे बल्कि कई बार तो ग्रामीण परिवेश में इनका पाया जाना एक आश्चर्य की तरह देखा जाता रहा, दरअसल ग्रामीण जीवन में जातिवाद, बेरोजगारी, अशिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य और साफ सफाई के साथ साथ पर्यावरण और युवाओं की सोच अहम मुद्दे रहे है जिनका निराकरण करने के लिए सरकारों द्वारा वायदे तो किये गए लेकिन असल मे ये ग्रामीण परिवेश में पहुँच नही पाए।

दअरसल कर्वी जिले में कृष्ण धाम ट्रस्ट के सहयोग से सौरभ द्विवेदी नाम के युवा ने इस मुहिम को आगे लाकर ग्रामीण जीवन मे रँगता लाने का कार्य किया , जिसमें उनके साथ अन्य युवा भी लगातार जुडते रहे, भले ही यह कार्यक्रम एक ई-रिक्शा और एक छोटे से बैनर के साथ शुरू हुआ लेकिन इसका उद्देश्य बेहद बड़ा है, ताकि ग्रामीण जीवन के असल मुद्दों को मेन डोमेन में लाया जा सके। असल मे इस मुहिम का एक बड़ा मकसद और है कि इस कवायद के जरिये ये बड़ी आसानी से जाना जा सकता है कि आखिर ग्रामीण जीवन की वह छुपी हुई समस्याएं क्या है जिसे न तो सरकारें देख पाती है ना ही अधिकारी गण।

युवा जगा रहे गावों में चेतना
युवा जगा रहे गावों में चेतनाउदय बुलेटिन
युवा जगा रहे गावों में चेतना
युवा जगा रहे गावों में चेतनाउदय बुलेटिन

खुलती पोलों से परेशान है अधिकारी:

इस मुहिम के चलते जिले के आला अधिकारी बेहद परेशान नजर आ रहे है। गांव पर चर्चा कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे मौके आये जब जिला प्रशासन की बेहद बड़ी और गंभीर खामियां नजर आयी इसपर लगातार चलती ख़बरों पर जिला अधिकारी चित्रकूट द्वारा बेहद अजीब रिएक्शन सामने आया है, इस मुहिम को आगे बढ़ाने वाले सौरभ द्विवेदी को ट्विटर पर ब्लाक करना बेहद ताजातरीन नमूना है।

थाना पहाड़ी ग्राम इटौरा में चलाई जा रही गौशाला में बछड़ों को खाते हुए आवारा कुत्ते।
थाना पहाड़ी ग्राम इटौरा में चलाई जा रही गौशाला में बछड़ों को खाते हुए आवारा कुत्ते।Uday Bulletin

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