उदय बुलेटिन
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Rafael 
Rafael |Image Source - Financial Times
देश

राफेल डील के पीछे का रहस्य अब भी बरक़रार 

कहीं मोदी की चुप्पी बीजेपी को महंगी न पड़े  

Sneha Sinha

Sneha Sinha

नई दिल्ली: आये दिन कांग्रेस द्वारा मोदी सरकार पर राफेल डील के बारे में लगाए गए आरोंपों में एक और खुलासा हुआ है। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति “फ्रांसा ओलांद” ने मीडिया के सामने एक और तथ्य साझा किया और कहा है की डील के दौरान भारत सरकार के पास हमें सुझाने को अनिल अंबानी(रिलायंस ग्रुप) के अलावा कोई और विकल्प नहीं था, लेकिन मोदी के कहे गए पहले वयान को अगर ध्यान में लायें तो पता चलता है की दोनों ही लोग अलग- अलग बातें कर रहे हैं. दरअसल यह खुलासा फ्रांस के एक प्रसिद्ध अखबार "मीडियापार्ट फ्रांस" में फ्रांसा ओलांद के द्वारा दिए गए साक्षात्कार के दौरान हुआ। "मीडियापार्ट फ्रांस" के रिपोर्टर ने राफेल जैसे अहम मुद्दे से जुड़े अनेकों- अनेक सवाल दागे और इसी दौरान "फ्रांसा ओलांद" ने कहा की,"हमने सिर्फ यह प्रस्ताव मंजूर किया था और भारत सरकार को हमने 36 राफेल विमानों की खरीद पर कुछ प्रतिशत की छूट भी दी थी"

तथ्यों के स्पष्टीकरण होने के पहले-ही विपक्षी पार्टी(कांग्रेस) ने कई बातें कह डाली। राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा," वर्तमान प्रधानमंत्री और अनिल अम्बानी ने मिलकर सैनिकों के ऊपर 1 लाख 30 हज़ार करोड़ की "सर्जिकल स्ट्राइक " की है, हमारे शहीद सैनिकों का अपमान किया है तथा हमारे देश की आत्मा को झकझोरा है" शुक्रवार को राहुल गाँधी ने फ़्रांसा ओलांद को शुक्रिया अदा करते हुए कहा की अब हम नरेंद्र मोदी को जान गए और पहचान भी गए की वो अपने निजी हित के कारण दिवालिया हुई कंपनी के पक्ष में थे।

इस मुद्दे पर अरविन्द केजरीवाल की सरकार भी पीछे नहीं रही और आलोचना करते हुए कहा," क्या मोदी सरकार महत्वपूर्ण बातों को छुपा कर भारत को मुसीबत में नहीं डाल रही? अभी तक मोदी सरकार जो कुछ भी कहती आ रही थी वह पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति के बयान के बिलकुल- ही विपरीत है" ट्विटर के माध्यम से अरविन्द केजरीवाल ने मोदी सरकार से सच की माँग की तथा उनके निर्दोष होने का सबूत माँगा।

एक तरफ ये सारे खुलासे "कांग्रेस पार्टी" के लिए चुनाव के पहले आये एक सक्षम हथियार के रूप में काम कर रहा है तो दूसरी ओर कहीं न कहीं आने वाले चुनाव में मोदी सरकार को यह भारी पड़ सकता है। सारी कथनों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष "राहुल गाँधी " का पलड़ा भारी पड़ता जा रहा है और प्रश्नों के बौछार से बीजेपी घायल हो रही है। हर एक पार्टी बीजेपी से हिसाब माँग रही है, “मोदी अगर बेगुनाह है तो बेगुनाही का सबूत दें” लेकिन अभी तक मोदी ने इस बात के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया है तो क्या यह एक और स्ट्रेटेजी है मोदी की या उनके ऊपर लगे धोखाधड़ी का आरोप है सच .