उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
केन नदी जल आरती
केन नदी जल आरती|UDAY BULLETIN
देश

केन जल आरती की रूपरेखा हुई तैयार, जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण

केन नदी के तट पर जिलाधिकारी हीरालाल करेंगे जल आरती, प्रकृति के सरंक्षण का देंगे सन्देश।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

मानव सदियों से प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं और निधियों का उपभोग करता आया है, लेकिन कभी पेबैक की भावना मानव ह्रदय में नहीं आई, जबकि प्रकृति संरक्षण और सम्मान देने को कोशिश की जानी चाहिए, इसी के चलते बाँदा शहर और आस-पास के ग्राम्य जीवन को अमृत समान जल देने वाली नदी केन के तट पर जल आरती किये जाने का कार्यक्रम बना है ,जिसकी अगुआई स्वयं जिलाधिकारी कर रहे है।

महात्मा बुद्ध के काल मे जिन सोलह महाजनपदों का उल्लेख आता है उन्हीं सोलह महाजनपदों में चेदि राज्य का उल्लेख आता है जिसके किनारे नदी शुक्तिमती के प्रवाह का वर्णन है, वही नदी शुक्तिमती कालांतर में केन के नाम से जानी गयी, वर्तमान में गिरवां - स्योढ़ा गांव ही चेदिराज्य कि राजधानी था, महाभारत काल मे योगेश्वर कृष्ण की बुआ के पुत्र शिशुपाल चेदिराज्य के राजा थे, , केन नदी के किनारे बसे हजारो की तादात में बसे गांव, खेत इसी के पानी पर जिंदा है।

अकेले बाँदा शहर की लगभग 70 प्रतिशत आबादी के पेयजल की आपूर्ति केन से ही की जाती है, बाँदा जिलाधिकारी हीरालाल ने आमजन की केन के प्रति समर्पण और संरक्षण की भावना को बलवती करने के लिए केन आरती का कार्यक्रम किया गया है, 26 नवंबर के दिन जिले के गणमान्य व्यक्ति और आला अधिकारियों का जमावड़ा केन पर रहेगा।

अवैध खनन की भेंट चढ़ी केन :

केन का भले ही कोई भी पौराणिक महत्व रहा होगा लेकिन माफियाओं ने केन को उपभोग मात्र की वस्तु मानकर उसका भयानक दोहन किया गया है, हालांकि सुप्रीमकोर्ट और एनजीटी ने रेत खनन के जो मानक तय किये है उनके अंदर पुलों के आस पास रेत न निकालने के निर्देश है ,लेकिन प्रशासन के आंखों के सामने ही खुल्ले आम गधों, मोटरसाइकिलों के माध्यम से रेत निकालकर केन को नंगा किया जा रहा है।