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मालिक के वियोग में बन्दर ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
मालिक के वियोग में बन्दर ने भी अपने प्राण त्याग दिए।|Uday Bulletin
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बंदर और शिक्षक का अजीबो गरीब रिश्ता, मालिक की सांस थामते ही बंदर ने त्यागे प्राण।

भले ही विज्ञान कितना विस्तृत होने की डींगें हांक ले, लेकिन कभी कभार ऐसे सवाल आते है जिसका किसी के पास कोई जवाब होता ही नहीं है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

अब उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की इस घटना को ही ले लीजिये जहाँ बंदर को पता था कि अब उसके मालिक के पास ज्यादा वक्त नही है।

उत्तर प्रदेश के एक जिले फतेहपुर के अंतर्गत आने वाले कस्बे किशनगंज के पाखरतर मुहल्ले की एक घटना पूरे जिले में चर्चा का सबब बनी हुई है जहां एक बंदर ने अपने मालिक के वियोग में अपने प्राण त्याग दिए, सनद रहे यह बंदर अपने मालिक को औलाद की तरह प्यारा था।

सेवानिवृत्त शिक्षक और उनका बंदर प्रेम :

बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षक शिवराज सिंह उम्र लगभग 75 वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षक के पद पर रह चुके है। शिवराज सिंह का जीवन लंबे समय से बेतरीबी से चल रहा था, शिवराज सिंह जी के पास सरकारी नौकरी के साथ जीवनसंगिनी पत्नी तो थी लेकिन जीवन मे कभी संतान सुख नहीं मिला। इसी कष्ट से लड़ते हुए कुछ समय पूर्व पत्नी भी स्वर्ग सिधार गयी। इसीलिए अकेलेपन को दूर करने के लिए शिवराज सिंह ने एक बंदर के बच्चे को अपने बेटे की तरह पालना शुरू कर दिया। पिछले दश वर्षों से यह बंदर मास्टर साहब के पास ही रहता था लेकिन करीब पांच साल पहले जब शिवराज सिंह की तबियत नासाज़ हुई तो भतीजो ने बंदर को पांच साल पहले दूर के कस्बे खागा में किसी आम के बगीचे में छोड़ दिया।लोगों के अनुसार बंदर गांव के लोगों के लोगों द्वारा छेड़ने पर काटने को दौड़ता था।

मौत के कुछ दिन पहले लौट आया :

अचानक करीब दस दिन पहले घर की छत पर एक हलचल हुई और एक बड़ा सा बंदर उनकी छत पर दौड़ता नजर आया। लोगों ने बंदर को देखा तो पहचान गए और शिवराज सिंह को इस बारे में बताया। शिवराज ने जैसे ही बीमारी अवस्था मे आवाज दी तो बंदर उनके पास आकर बैठ गया और ऐसे ही दिन गुजरने लगे। बंदर अपने मालिक का साथ छोड़ने को ही तैयार नहीं था लोग बंदर को शिवराज से अलग करने की कोशिश करते तो वह नाराज हो जाता और दांत निकालकर लोगों को डराता लेकिन किसी घर के सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया।

अचानक तबियत बिगड़ी और एक करिश्मा हुआ :

बीते बुधवार को दोपहर के वक्त अचानक शिवराज सिंह की तबियत बिगड़ी और शिवराज ने अपनी आखिरी सांस ली, घर के सदस्यों और स्थानीय लोगों के अनुसार बंदर उस वक्त शिवराज के पास नहीं था, बल्कि कहीं बाहर निकल चुका था। जब लोगों ने शिवराज के शव को घर के आंगन में रखकर अंतिम यात्रा की तैयारी की और सभी लोग दहाड़े मार-मार के रो रहे थे। तभी अचानक बंदर छत से कूद कर आया और शिवराज सिंह को मृत देखकर बेहद शांत सा हो गया। बंदर थोड़ी देर घर की महिलाओं को रोता हुआ देखता रहा और फिर अचानक शिवराज सिंह के बगल में लेटकर बेसुध हो गया। लोगों ने इसे एक पशु का प्रेम मानकर बंदर की नब्ज टटोली तब तक बंदर के प्राण पखेरू उड़ चुके थे। कुछ लोगों ने इसे महज एक इफ्तेफाक माना तो कुछ लोगों ने इसे अपरिमित स्नेह और पूर्वजन्म का स्नेह बताया।

परिवारीजनों और ग्रामीणों ने बंदर का अंतिम संस्कार शिवराज सिंह की चिता में रखकर ही किया, घर के सदस्यों ने बताया कि हमने अपने चाचा की तरह ही बंदर को पिंडदान और मुखाग्नि दी है। समस्त अंतिम क्रियाएं भी एक परिवार के सदस्य की तरह ही होंगी। परिवार ने चाचा शिवराज के साथ बंदर की भी तेरहवीं करने का निर्णय लिया है।

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