School Refuse to Give Admit Card 
School Refuse to Give Admit Card |Twitter Screenshot
देश

किसान की बेटी फीस नहीं दे पायी तो स्कूल ने परीक्षा देने से रोका।। 

दुनिया भले ही शिक्षा को सामाजिक कार्य मानकर चले, लेकिन असल मे आज यह व्यवसाय बन चुका है और गाहे बगाहे इसकी बानगी मिलती रहती है, ताजा नमूना राजस्थान से जुड़ा हुआ है। 

Shivjeet Tiwari

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फीस नहीं तो प्रवेश पत्र नही :

हालाँकि यह पैंतरा नया नहीं है, निजी स्कूलों में प्रबंधन और प्रधानाचार्य इस मौके को हथियार की तरह प्रयोग करते है जिसके आधार पर बच्चों से फीस वसूली जाती है। ताजा मामला राजस्थान के बूंदी जिले से जुड़ा हुआ है जहाँ के बालापुरा गांव के निवासी देवराज मीणा पुत्र मेरुलाल मीणा की पुत्री को विद्यालय ने केवल इस बिनाह पर प्रवेश पत्र देने से मना कर दिया है क्योंकि छात्रा की फीस पूरी चुकता नहीं हुई है। इस पर पिता ने विद्यालय प्रबंधन से गेहूं की फसल आ जाने के बाद सारी फीस चुकाने के आश्वासन भी दिया लेकिन प्रधानाचार्य कुंजबिहारी मीणा ने बालिका के प्रवेश पत्र को किसी भी हाल में देने से मना कर दिया है। देवराज ने इस सम्बन्ध में स्थानीय पुलिस चौकी में इसकी लिखित शिकायत दी है।

कापरेन गांव में है विद्यालय :

बूंदी जिले के ही अंतर्गत गांव कापरेन में यह विद्यालय बाल निकेतन कापरेन में संचालित है जहां इससे पहले भी फीस वसूली की शिकायतें आती रही है। लेकिन राजनीतिक पकड़ मजबूत होने के कारण प्रबंधन समिति और प्रधानाचार्य के विरुद्ध कोई कुछ भी बोलने से डर रहा है।

क्या कहता है विभाग :

विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार केवल फीस प्राप्ति न होने के कारण किसी भी विद्यार्थी को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता, और जानकारी होने पर उक्त विद्यालय के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

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उदय बुलेटिन
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