ग्रामीण रास्तों पर ओवरलोड भार वाहनों
ग्रामीण रास्तों पर ओवरलोड भार वाहनों|Uday Bulletin
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ग्रामीण रास्तों पर ओवरलोड भार वाहनों का आतंक, पैदल लोगों का निकलना मुश्किल। 

स्थानीय प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए बैठा नजर आ रहा है। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

मामला उत्तर प्रदेश में मध्यप्रदेश के सीमावर्ती गांव लोहरा का है जहाँ से सबंधित थाना मटौन्ध की दूरी मात्र कुछ किलोमीटर तक ही सीमित है, ग्राम लोहरा इन दिनों दिन-रात ओवरलोड ट्रैक्टरों की भाग दौड़ से परेशान है। रफ्तार और ओवरलोड का आलम यह है कि कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना घट सकती है इसको लेकर प्रसाशन बेहद शांत नजर आ रहा है।

मध्यप्रदेश से आता है पत्थर :

दरअसल एनजीटी के मानकों को ताक पर रखकर एक क्रेशर लंबे समय से मध्यप्रदेश के पहरा ग्राम में चल रही है जिससे गिट्टी, अद्धा, पौना के साइज का पत्थर रेलवे को भेजा जाता है। और यह पत्थर उत्तर प्रदेश में आने वाले रेलवे जंक्शन खैरार पहुँचाया जाता है। सनद रहे कि सारा का सारा माल ट्रैक्टर के माध्यम से पहुंचता है जो कि उत्तर प्रदेश के दो गांव लोहरा और परामपुरवा से गुजरता है। हालांकि परामपुरवा में तो ट्रैक्टर बाई पास के माध्यम से निकल जाते है लेकिन लोहरा में वाहनों की कतार लगी रहती है। जिसकी वजह से गांव में हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है।

बच्चों और जानवरों को है खतरा :

तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों से ग्रामीण बच्चों ओर जानवरों का वाहनों से टकराने के खतरा बना रहता है। चूँकि यह रास्ता मध्यप्रदेश के गौरिहार, लवकुशनगर जैसे कस्बों तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग है इसलिए आने जाने वाले छोटे रास्तों के लिए एक अहम रास्ता है, वाहनों के आने-जाने से लोगों को घंटो खड़ा होना पड़ता है, इस पर प्रशाशन द्वारा कोई कदम नही उठाया जा रहा है।

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उदय बुलेटिन
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