सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को दी अंतरिम जमानत, महाराष्ट्र सरकार और हाईकोर्ट पर साधा निशाना

रिपब्लिक भारत के संस्थापक अर्नब गोस्वामी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अंतरिम जामनत मिल गयी है और साथ ही में महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट फटकार भी लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को दी अंतरिम जमानत, महाराष्ट्र सरकार और हाईकोर्ट पर साधा निशाना
Supreme Court granted interim bail to Arnab GoswamiUday Bulletin

बीते दिनों से चल रहा राजनीतिक पूर्वाग्रह का विरोध सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हल्का होने लगा है। कल तक महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र हाई कोर्ट रिपब्लिक भारत के मुखिया अर्नब गोस्वामी को किसी भी हाल मे छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी। कल सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की निरंकुशता पर निशाना लगाते हुए निजी हमले को नकार दिया और अर्नब को अंतरिम बेल ग्रांट कर दी।

अर्नब मामले में सुप्रीम कोर्ट हुआ मुखर, बताये कायदे और नियम:

इंटीरियर डिजाइनर आत्महत्या मामले में जेल भेजे गए एंकर अर्नब गोस्वामी की अंतरिम बेल की सुनवाई देश की सर्वोच्च अदालत में हुई जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस, हाईकोर्ट और महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाँथ लिया और किसी भी आरोपी के अधिकारों के तहत मामले की गंभीरता को मद्देनजर रखते हुए अर्नब गोस्वामी को निजी मुचलके पर जमानत देदी। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सर्वोच्च अदालत ने महाराष्ट्र सरकार और पुलिस समेत सबको कायदे कानून बताये।

सुप्रीम कोर्ट बोला "स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अभी हम जिंदा है":

सुप्रीम कोर्ट बोला "स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अभी हम जिंदा है": मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपनी बात कहते हुए कहा कि "अगर संवैधानिक न्यायालय के अधिकार से व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना हमारा दायित्व है अगर हमारे द्वारा यह कार्य नहीं किया जाता तो इसे कौन करेगा ?

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे के वक्तव्य में कहा कि अगर राज्य सरकारें यह सोचे कि वह किसी व्यक्ति को निजी रूप से जानबूझकर निशाना बनाती है तो उन्हें यह जानना चाहिए कि देश मे अदालते जिंदा है। हम न्याय और स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए ही है"

महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की सलाह:

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सलाह देते हुए कहा कि आपको पता होना चाहिए कि हमारा संविधान असाधारण प्रकार से लचीला है। महाराष्ट्र सरकार को अर्नब गोस्वामी के तानों को न सिर्फ नजरअंदाज करना चाहिए बल्कि सहनशील होना चाहिए। खुद जस्टिस चंद्रचूड़ ने अर्नब के चैनल के बारे में बताते हुए कहा कि मैं इनका चैनल नहीं देखता। इनकी विचारधारा मुझसे अलग हो सकती है लेकिन जब स्वतंत्रता की रक्षा की आती है तो अदालत का अपना अधिकार और फर्ज है तानों से आहत होकर स्वंतत्रता का हनन करने का रास्ता गलत है। महाराष्ट्र सरकार को इस मामले पर सावधानी बरतनी चाहिए।

महाराष्ट्र पुलिस से पूछे कड़े सवाल:

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र पुलिस को लेकर बेहद कड़े सवाल पूंछे सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से यह जानने की कोशिश की क्या अर्नब के मामले में पुलिस कस्टडी में लेकर पूंछताछ करने की आवश्यकता भी है ? सुप्रीम कोर्ट ने कानून का हवाला देते हुए पुलिस से पूंछा की अगर आरोप यह है कि अर्नब और अर्नब की कंपनी पर कोई पैसा बकाया है तो क्या यह मामला अपहरण का है जिसमे अर्नब को गिरफ्तार किया जाए? क्या यह मामला कस्टोडियल पूछताछ से जुड़ा हुआ है ? अगर इस मामले में एफआईआर भी लंबित है तो क्या इस मामले में कानूनी तौर पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए?

खुद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पुलिस और महाराष्ट्र सरकार से सवाल दागते हुए पूंछा की अभी तक अर्नब गोस्वामी जेल में क्यो है?

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब मामले में महाराष्ट्र हाईकोर्ट द्वारा जमानत के लिए निचली अदालत में जाने की सलाह को भी गलत ठहराया।

अर्नब के पक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की:

सुप्रीम कोर्ट में अर्नब गोस्वामी के वकील हरीश साल्वे ने इस मामले में सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की जिससे इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की संलिप्तता और निजी हमले करने की असली वजह सांमने आ सके ,प्रशिद्ध वकील हरीश साल्वे ने अपनी दलील में यह कहा कि अगर इस मामले में सीबीआई जांच हो जाती है तो इस मामले के सभी पक्ष अदालत के सामने होंगे , दरअसल हरीश साल्वे के द्वारा परोक्ष रूप से महाराष्ट्र पुलिस पर अविश्वास जताया गया है

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उदय बुलेटिन
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