Raksha Bandhan in Mahoba
Raksha Bandhan in Mahoba|Google Image
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बुंदेलखंड के महोबा में आज मनाया जायेगा रक्षाबंधन, जानिए एक दिन बाद क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन

महोबा में एक दिन बाद रक्षाबंधन मानाने को लेकर बेहद रोचक कहानी है, एक दिन बाद मनाये जाने वाले रक्षाबंधन के त्यौहार को विजय पर्व के नाम से जाना जाता है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

महोबा के रक्षाबंधन को लेकर क्षेत्र भर में उत्सुकता रहती है सामान्य स्थिति में इस त्योहार को मनाने के लिए लाखों की संख्या में लोग बाहर से आते हैं लेकिन इस वक्त कोरोना महामारी को लेकर सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए है।

जब पृथ्वीराज ने घेरा महोबा:

सावन का पावन महीना और साल लगभग 1182, जहाँ पर विश्वप्रसिद्ध कीर्ति सागर या कीरत सागर ( जिसे परमाल राजा कीर्ति वर्मन ने बनवाया था) के किनारों पर महोबा की राजकुमारी सहित तमाम सखियों द्वारा कजीलिया (भुजरिया) विसर्जित करने का कार्यक्रम बनाया लेकिन तभी जानकारी मिली कि शकुनि की तरह तेज चाल चलने वाले मामा माहिल ने दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान की मदद से महोबा को घेर लिया है और किसी भी प्रकार से दिल्ली का दरबार महोबा को अपने अधीन करना चाहते है और महोबा की राजकुमारी चंद्रावल का अपहरण करके जबरन विवाह करना चाहते है। इस युद्ध को दिल्ली के प्रमुख सरदार चौड़ा राय द्वारा किया जा रहा था।

ये वही वक्त था जब माहिल ने अपनी शातिराना चाल से महोबा के दो महावीरों को महोबा से निष्कासित करा दिया था और वो दोनो भाई कन्नौज में निर्वासित होकर रह रहे थे।

लेकिन जब परमाल ने देखा कि महोबा की सेना तो लड़ने मरने को तैयार है बाबजूद इसके कि दिल्ली की ताकतवर सेना के सामने टिकना मुश्किल भी नामुमकिन सा था, इसी बीच राजकुमारी चंद्रावल ने किसी माध्यम से आल्हा और ऊदल भाई को महोबा आने के लिए सूचना दी, चूंकि दोनो भाई महोबा से अपमानित किये गए थे लेकिन बहन के अनुरोध को नहीं टाल सके और महोबा कूच कर दिए।

भयानक युद्ध और विजय श्री:

आल्हा ऊदल और उनके शस्त्र शिक्षक ताला सैयद और ब्रम्हा मलखान पांचों लोगो ने बाल साधुओं का वेश बनाकर महोबा में प्रवेश किया और बहन चंद्रावल से रक्षाबंधन के अगले दिन राखी बंधवाकर युद्ध मे प्रवेश किया और महोबा की सेना का नेतृत्व किया। युद्ध इतना भीषण था कि कीरत सागर की जगह रक्त से लाल हो गयी। इस युद्ध में महोबा के रणबाकुरों ने महोबा की जमीन को दिल्ली के शाशन से मुक्ति दिलाई और रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया। हालांकि इस युद्ध मे दोनों पक्षो को वीरगति प्राप्त करनी पड़ी।

कोरोना काल की वजह से सब बंद:

वैसे तो महोबा को श्रावण मास आते ही दुल्हन की तरह सजाया जाता था और पूरे 15 दिन जिले में त्योहार का माहौल रहता था। शहर मे मेले का माहौल रक्षाबंधन के दिन से जन्माष्टमी तक चलता था लेकिन अब कोरोना काल की वजह से इस वर्ष सब शांत है।

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उदय बुलेटिन
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