टिकैत के दोगले बोल, बिगड़ सकता है समीकरण

टिकैत ने अपना पक्ष रखते हुए कई बार यह तर्क रखा कि हमारा आंदोलन शांतिप्रिय था और इसमें शामिल सभी लोग अनुशासन से थे लेकिन किसान आंदोलन को बर्बाद करने के लिए एक साजिश रची गयी
टिकैत के दोगले बोल, बिगड़ सकता है समीकरण
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दिल्ली के आईटीओ और लाल किले में जो भी घटित हुआ उसको पूरी दुनिया ने अपनी आँखों से देखा, इस आंदोलन में हुई हिंसा से देश के मूड में अचानक से परिवर्तन देखने को मिला। इसी हिंसा के चलते किसान आंदोलन के कई धड़े इसे अपनी और अपने नेताओं की गलती मानकर आंदोलन से किनारा करते चले गए लेकिन इस आंदोलन के सबसे ज्यादा आरोप राकेश टिकैत पर लगे थे उन्होंने ही इस मामले पर सरकार के सामने अजीब शर्त रख दी है।

जो उत्पाती है वो किसान नही:

दरअसल जैसे ही ट्रैक्टर रैली के दिल्ली में घुसकर उत्पात मचाने की जानकारी हुई उसके बाद किसान आंदोलन के नेता राकेश टिकैत ने इस मामले पर मीडिया के सामने आकर यह बात कही की इस उत्पात को जानबूझकर भाजपा और देश विरोधी ताकतों ने कराया है। इस घटना में किसान आंदोलन का कोई व्यक्ति शामिल नही है। दरअसल किसान नेता राकेश टिकैत ने अपना पक्ष रखते हुए कई बार यह तर्क रखा कि हमारा आंदोलन शांतिप्रिय था और इसमें शामिल सभी लोग अनुशासन से थे लेकिन किसान आंदोलन को बर्बाद करने के लिए एक साजिश रची गयी जिसके तहत हिंसा को लाया गया और किसान आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास किया गया।

रंग बदला, बदले तेवर:

लेकिन जैसे ही माहौल बदला इस मामले पर किसान नेता राकेश टिकैत के सुर बदल कर लोगों के सामने आने लगे हैं। किसान आंदोलन के नेता राकेश टिकैत ने सरकार से शर्त रखी है कि आंदोलन कारी सरकार से तभी बात करने में सहज रहेंगे जब उसके प्रदर्शनकारियों पर कायम किये गए मुकदमे वापस किये जायें और उन्हें जेलों से रिहा किया जाए, राकेश टिकैत ने अपने कई बयानों में इस बात को मुख्य रूप से रखा है कि सरकार किसानों को जेल में ठूसकर आंदोलन को कमजोर करना चाहती है।

तो किसान नेता कब सही थे:

अब अगर दोनो बार की बातों का सार निकाला जाए तो समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर इस मामले पर किसान नेता टिकैत सही कब थे? चुकी पहले बयान के अनुसार भाजपा ने किसान आंदोलन को खत्म करने की साजिश करने के तहत इसमें भाजपा के गुंडे भेजे थे, और उसके बाद दिल्ली पुलिस के साथ हुए बवाल में उन्हें गिरफ्तार करा लिया गया अब अगर वो भाजपा प्रयोजित दंगाई थे तो इस मामले पर किसान नेता राकेश टिकैत को शांत रहना चाहिए था, लेकिन इस गिरफ्तारी पर टिकैत का बयान उनकी विवशता दर्शाता है।

सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर लगातार बहस चल रही है कि टिकैत तब सही थे या अब?

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उदय बुलेटिन
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