उदय बुलेटिन
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Rahul Gandhi during Mp rally
Rahul Gandhi during Mp rally|Image source: Firstpost
देश

प्रचार की कायम रणनीति, जगह साथ बदलती भक्ति  

एक ही राज्य की रैली में अनेक भक्ति  

Sneha Sinha

Sneha Sinha

भोपाल: मध्य प्रदेश में भाजपा ने 13 सालों से पकड़ बनाई रखी है, वही दूसरी ओर आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ बनाने को कांग्रेस भी जोर-शोर से जुटी हुई है। 2018 में अनेक रैलियों के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी मध्य प्रदेश की जनता के बीच जाकर उनकी मुसीबतो से अवगत हो रहे है और जनता को कांग्रेस सरकार को राज्य में लाने पर उनकी अनेक मुसीबतों का निवारण करने की घोषणा भी कर रहे है। संकल्प यात्रा रैली की शुरुआत राज्य की राजधानी "भोपाल" से हुई और इस रैली में 18 किलोमीटर का रोड शो हुआ उन्होंने हर एक मुद्दे को उठाया और भाजपा पर दागे हुए अपने सवालों के जवाब का वर्णन किया। उन्होंने निम्न वर्ग के लोगों को देश में चल रहे विकट मुद्दों से अवगत करवाया। वही दूसरी ओर खुद को शिव भक्त बताया और कहा मैं शिव का बहुत बड़ा भक्त हूँ और मुझे शिव पर पूरा भरोसा है की वह सच्चाई का साथ जरूर देंगे।

संकल्प यात्रा का दूसरा पड़ाव रेवा और सतना में दो दिनों की यात्रा से प्रारम्भ हुआ और फिर 27 सितम्बर को उन्होंने इलाहाबाद में खुद को राम भक्त के रूप में पेश किया। अब बारी आती है जबलपुर की और रैली के तीसरे पड़ाव में उन्हें कांग्रेस कार्यकर्त्ता होर्डिंग में नर्मदा भक्त के रूप में पेश कर रहे है। ऐसे में न तो राहुल गाँधी को शिव भक्त माना जायेगा, न तो राम भक्त और न ही उन्हें नर्मदा भक्त माना जायेगा।

अनेक आलोचनाओं के बाद जब इस मुद्दे पर मीडियाकर्मी ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से सवाल तिया तो उन्होंने कहा की,"हिंदुत्व सॉफ्ट या हार्ड नहीं होता है , हम तो भक्त है, धर्मप्रेमी हैं। हम धर्म को राजनितिक मंच पर लाने की कोशिश नहीं करते है। हम जब भी मंदिर जाते है तो भाजपा नेताओं के पेट में दर्द शुरू हो जाता है। क्या भाजपा वालों ने ही धर्म का ठेका लिया हुआ है ?"

"आलोचनाओं का जवाब सिर्फ और सिर्फ आलोचना ही होती है" यह मुद्दा भी इस कथन पर ही आधारित है, यूँ तो नेताओं का परमकर्तव्य है दूसरी पार्टी की समीक्षा करना लेकिन उसमे भी अगर आप सूझबूझ से काम ले तो आप पर किसी प्रकार के छींटे नहीं पड़ेंगे , लेकिन यहाँ थोड़ी सी लापरवाही ने राहुल गाँधी के इस यात्रा को वोट बटोरने की जानी- समझी युक्ति के रूप में जनता के सामने पेश कर दिया।