पुलवामा अटैक की बरसी, जब चालीस जवानों ने अपनी शहादत दी थी

पुलवामा हमले की बरसी: जरा याद करो कुर्बानी......
पुलवामा अटैक की बरसी, जब चालीस जवानों ने अपनी शहादत दी थी
पुलवामा अटैक की बरसीGoogle Image

भारत मे आतंकी हमलों का लंबा इतिहास है लेकिन कुछ घटनाएँ ऐसी है जो अपने पीछे एक इतिहास छोड़ जाती है। जिसमें शहीदों की माताओं के क्रंदन है, अनाथ हुए बच्चों का अपने पिताओं के लिए बिलखना नजर आता है, इस हमले में बहुत सारी महिलायें विधवा हो गयी तो चालीस पिताओं ने अपने जिगर के कलेजे को देश के लिए कुर्बान कर दिया, इस घटना की भयावता इतनी भीषण थी कि भारतीय सैनिकों के शवों के टुकड़े मीटरों दूरी तक छिटक गए थे, कई शहीदों के शवों को तो प्लास्टिक की बाल्टियों में सहेजा गया था, और यह घटना उस वक्त तड़के घटी जब पूरी दुनिया इश्क के खुमार में डूबी हुई थी, दरअसल उस दिन 14 फरवरी था और साल था 2019 ,इस दिन देश खून के आंसू रोया था और इन आंसुओं की साजिश रची थी सीमा पार बैठे कुछ आतंक के आकाओं द्वारा।

जम्मू श्रीनगर का हाइवे जहाँ से भारतीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ की 78 गाड़ियों और करीब 2500 सैनिकों के साथ हाइवे के पुलवामा इलाके के अवंतीपुरा- गोरिपोरा से गुजर रहा था, अचानक काफिले के गुजरने के दौरान मध्य काफिले के किनारे खड़ी एक कार में आरडीएक्स विस्फोटक से आत्मघाती हमला किया गया, इस ब्लास्ट के बाद घटनास्थल पर पहले से छुपे आतांकियो ने अर्ध सैनिक बलों पर एसाल्ट रायफल एके 47 के साथ अन्य अत्याधुनिक हथियारों से जमकर फायरिंग भी की। घटना से हतप्रभ सैन्य बल ने तुरंत मोर्चा संभाला लेकिन विस्फ़ोट के बाद आतंकी मौके से भाग निकले। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए। हमले का मंजर इस कदर था कि सैन्य बल की गाड़ियाँ टीन के डिब्बों में तब्दील हो चुकी थी चारों ओर चीख पुकार मची हुई थी, इस घटना में करीब एक सैकड़ा सैन्य कर्मी गंभीर रूप से घायल भी हुए।

सीमा पार से जुड़े घटना के तार:

इस घटना के बाद भारतीय जांच एजेंसियों से इस घटना के तार खोजने शुरू किए, हालाँकि इससे पहले ही खतरनाक आतंकी संगठन जैश-ए- मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली लेकिन जांच एजेंसियों ने इस घटना में शामिल लोगों तक के नाम खोल दिए घटना में मुख्य आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद था जबकि पर्दे के पीछे से मौलाना मसूद अजहर, उसी का भाई अब्दुल रउफ असगर और चचेरा भाई अल्वी शामिल था। वहीँ इस हमले के लिए जमीन खोजने और हमले को पुख्ता अंजाम देने के लिए रउफ असगर का बेटा उमर फारूक और कामरान भारत आये थे (हालाँकि बाद में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने इन दोनों की कब्र भारत की जमीन पर ही खोद दी थी)

भारत ने कहा था, न भूलेंगे न माफ करेंगे:

वो कहते है ना कि वो दुश्मन ही क्या जो ललकार के न मारे, भारत के साथ पाकिस्तान सरपरस्ती आतंकियों ने भारत पर हमला करके खुद अपनी मौत की इबारत लिख दी थी , यहां आपको बताते चले कि जिस वक्त इस आतंकी घटना को भारत मे अंजाम दिया गया उस वक्त भारत आम चुनाव की आहट पर चल रहा था। ऐसे ही मौके पर प्रधानमंत्री ने उत्तर भारत मे हो रही एक चुनावी रैली में बड़े दुख और क्रोध में कहा था कि "इस हमले को न हम भूलेंगे और न माफ करेंगे, किसी शहीद किस शहादत जाया नही जाएगी"

और हुआ भी कुछ ऐसा ही, भारत की सेना ने पाकिस्तान की सरजमीं पर अपने सैन्य अभियान चलाकर आतंकियों को ऐसा दर्द दिया जो लंबे वक्त तक आतंकियों को याद रहेगा, घटना के महज 12 दिन बाद ही भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक के जरिये पाकिस्तान के आतंकी लांच पैड्स पर जमकर गाइडेड बम और मिसाइल दागकर कई आतंकियों को मौत की नींद सुला दिया,

उदय बुलेटिन देश के लिए कुर्बान होने वाले हर शहीद को नमन करता है

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