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मद्रास उच्च न्यायालय
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सलामत है AIADMK सरकार, 18 विधायकों को अयोग्य ठहराया जाना वैध

तमिलनाडु में AIADMK सरकार को बड़ी राहत देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पिछले साल अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों को अयोग्य करार देने के फैसले को बरकरार रखा है.

AKANKSHA MISHRA

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चेन्नई: तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक सरकार को बड़ी राहत देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पिछले साल अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों को अयोग्य करार देने के फैसले को बरकरार रखा है, जिससे 20 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव के लिए मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इन 20 सीटों में से दो विधायकों के निधन के बाद सीट खाली हुई है।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय में नियुक्त तीसरे न्यायाधीश एम. सत्यनारायणन ने गुरुवार को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष के साल 2017 में ऑल इंडिया अन्नाद्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) के 18 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। अपना फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति सत्यनारायणन ने विधानसभा अध्यक्ष पी. धनपाल के अयोग्य ठहराने संबंधी आदेश को बरकरार रखा। इस पर हुई पिछली सुनवाई में खंडित फैसला सामने आया था। इसके साथ ही 18 सीटों पर उपचुनाव कराने पर लगा प्रतिबंध हट गया है।

अयोग्य ठहराए गए विधायक पार्टी से किनारे किए गए नेता टी.टी.वी. दिनाकरन के साथ हैं। दिनाकरन अब तमिलनाडु विधानसभा के निर्दलीय विधायक हैं। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिनाकरन ने संवाददाताओं को बताया, "हम 18 विधायकों के साथ चर्चा करेंगे और अगले भावी कदम पर फैसले लेंगे।" उन्होंने कहा कि 'यह हमारे लिए एक अनुभव है।' दिनाकरन ने कहा, "अगर 18 अयोग्य विधायक फैसले के खिलाफ अपील करने का फैसला करते हैं तो हम अपील के लिए आगे बढ़ेंगे।"
AIADMK 18 विधायक जिन्हें अयोग्य ठहराया जाना था

  • थंगा तमिल सेलवन
  • आर मुरुगन
  • मारियुप कन्नेडी
  • के काथिरकमू
  • सी जयंती पद्मनाभन
  • पी पालनिअप्पन
  • वी सेंथिल बालाजी
  • सी मुथैया
  • पी वेत्रीवेल
  • एनजी पार्थिबन
  • एम कोठंदपानी
  • टीए एलुमलै
  • एम रंगासामी
  • आर थंगादुराई
  • आर बालसुब्रमणि
  • एसजी सुब्रमण्यम
  • आर सुंदरराज
  • के उमा महेश्वरी

AIADMK समर्थकों ने बागी विधायकों की सदस्याता को अयोग्य बरकार रखने के फैसले का स्वागत किया और फैसले पर मुहर लगने के बाद समर्थकों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर और पटाखे जलाकर खुशियां मनाई।

शीर्ष अदालत ने न्यायमूर्ति विमला की जगह न्यायमूर्ति सत्यनारायणन को नियुक्त किया था। जून में मामले पर खंडित फैसला आने के बाद उच्च न्यायालय ने मूल रूप से न्यायमूर्ति विमला को बतौर तीसरे न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया था।

पीएमके एक योजना के मुताबिक उपचुनावों में हिस्सा नहीं लेंगी?

यह पूछने पर कि क्या 20 सीटों पर एक साथ उपचुनाव कराने की स्थिति में पार्टी क्या इसी योजन पर आगे बढ़ेगी, जिस पर विनोभा ने कहा, "यहां दो स्थिति हैं। उपचुनाव अलग अलग या लोकसभा चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं। पार्टी आलाकमान इसपर फैसले लेगी।"