kesavananda bharati died
kesavananda bharati died|Google Image
देश

कौन है केशवानंद भारती? जिनकी मौत पर प्रधानमंत्री समेत सब ने श्रद्धांजलि अर्पित की

संत केशवानंद भारती के निधन पर पीएम मोदी समेत कई सियासी दिग्‍गजों ने श्रद्धांजलि दी है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बीते दिन केरल के आध्यात्मिक नेता एवं संत श्री केशवानंद भारती श्री पद्गवरू का निधन उनके ही एक मठ इदानीर में सुबह करीब तीन बजकर तीस मिनिट के आस-पास हो गया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री समेत अन्य कानूनविदों ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये, आखिर एक संत के पीछे ऐसी क्या बात है।

संविधान और कोर्ट से जुड़ा है मामला:

यकीन मानिए वर्तमान में कोई भी कानून का विद्यार्थी और जानकार ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसने केशवानंद भारती का नाम न सुना हो। अगर वह भारत के किसी भी हिस्से में कानूनी पढ़ाई पढ़ रहा है अथवा प्रैक्टिस कर रहा है तो गाहे बगाहे उसका सामना केशवानंद भारती बनाम केरल नाम से नाता जरूर रहा होगा। दरअसल यह भारत की वह सुनवाई है जो केरल के भूमि सुधार के मामले में डाली गई और आजाद भारत मे बसे लंबी सुनवाई हुई और यह सुनवाई भारत के इतिहास में दर्ज हो गयी। इस बहस ने न सिर्फ केरल के हुए भूमि सुधार को एक दिशा दी बल्कि देश भर में संविधान के मूल ढांचे को लेकर एक निर्णय लेकर आई।

प्रधानमंत्री द्वारा केशवानंद भारती जी के निधन पर जाहिर किया गया शोक:

सबसे लंबी बहस जिसने इतिहास रचा:

इस याचिका की सबसे बड़ी बात यह भी थी कि इस मामले में भारत के सुप्रीम कोर्ट में सबसे बड़ी बेंच बनाकर इस मामले की सुनवाई की गई। इस मामले में सुनवाई करने के लिए 13 न्यायमूर्ति शामिल किए गए और कुल मिलाकर इस याचिका पर अदालत ने 68 दिन खर्चे किये। कहने का मतलब यह है कि करीब 68 दिनों तक सुनवाई हुई, यह सुनवाई 31 अक्टूबर 1972 से शुरू होकर 23 मार्च 1973 तक चली और इसके बाद ही इस मामले पर फैसला आया।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी जताया दुख:

नहीं बदला जा सकेगा संविधान का मूल ढांचा:

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान इस मामले पर भी चर्चाएं हुई कि भले ही संविधान संशोधन कितनी बार भी किया जाए लेकिन किसी भी स्थिति में भारत के संविधान के मूल ढांचे में कोई परिवर्तन नहीं लाया जा सकेगा। केशवानंद भारती याचिका के दौरान मौलिक अधिकारों के पक्षधर बने रहे और संविधान के मूल ढांचे के अपरिवर्तनीय स्थिति को सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिभाषित करा गए।

उदय बुलेटिन के साथ फेसबुक और ट्विटर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com