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Banda District women hospital
Banda District women hospital|Uday Bulletin
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बाँदा महिला जिला अस्पताल चल रहा भगवान भरोसे, नवजात बच्चों और प्रसूताओं के लिए बना काल।

अस्पताल जहाँ मरीज अपनी समस्या लेकर पहुंचता है, लेकिन जरा सोचिए उस जगह के बारे में जहाँ अस्पताल ही अपनी लापरवाही की वजह से लोगों की मौत का कारण बन जाये कुछ ऐसा ही हाल बाँदा के जिला महिला अस्पताल का है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बाँदा जिला महिला अस्पताल, कहने के लिए तो अस्पताल में तमाम पोस्टर बैनर टंगे हुए है जहाँ जच्चा-बच्चा की स्वाथ्य रक्षा के लिए निर्देश टंगे हुए हैं ,लेकिन असलियत में ऐसा कुछ होता नहीं है बल्कि सरकारी नियमों और अभावों का रोना रोकर लोगों की जिंदगी में जहर घोला जा रहा है।

ताजा मामला प्रसव से जुड़ा हुआ है :

आपको बताते चले कि बीते दिन शुक्रवार की रात जिले के महिला अस्पताल में मटौन्ध थाना क्षेत्र के गांव दुरेंडी निवासी प्रीति मिश्रा उम्र 25 पत्नी सूरज मिश्रा को प्रसव पीड़ा होने के बाद अस्पताल लाया गया था। परिजनों ने बताया कि प्रीती लगातार पीड़ा से जूझती रही और अस्पताल का स्टाफ अपने निजी क्रियाकलापों में उलझा रहा। बाद में जब स्टाफ नर्सो से मिन्नत की गई तब नर्सो ने प्रसव कराया और प्रसव कराते समय अनियमितताएं बरती गई। इसलिए प्रसव के तुरंत बाद ही नवजात की हालत खराब होने लगी, तब स्टाफ नर्स ने संबंधित डॉक्टर को बुलाकर शिशु को प्रयागराज (इलाहाबाद) के लिए रेफर कर दिया, जहाँ शिशु की मृत्यु हो गयी।

स्टाफ नर्स और आया के भरोसे रहता है प्रसव :

अगर आप यह सोच रहे है कि बाँदा के जिला महिला चिकित्सालय में प्रसव जैसी बेहद जटिल चिकित्सा प्रक्रिया किसी विशेषज्ञ की देखरेख में होती है, तो आप फौरी तौर पर ही गलत साबित हो जाते है, दरअसल ये अस्पताल पूरी तरह से स्टाफ नर्सो और आयाओ के भरोसे पर टिका हुआ है। और इन आया और स्टाफ नर्सो द्वारा भी तभी सही तरह से कार्य सम्पन्न कराया जाता है जब परिजनों द्वारा एक रकम पेशगी के तौर पर दी जाती है, अन्यथा तमाम प्रकार के चिकित्सा बहाने बनाकर मरीज को बाहर रेफर कर दिया जाता है।

सुविधाएं न के बराबर :

जैसा कि आप जानते ही है कि उत्तर भारत इन दिनों ठंड से ठिठुर रहा है ऐसी स्थिति में नवजात बच्चों और प्रसूताओं के लिए बेहद विकट स्थिति होती है। यहाँ आपको एक चीज देखने को मिलेगी कि स्टाफ नर्स और डॉक्टरों के केबिन में लगे वार्मर और ब्लोवर बराबर काम करते मिलेंगे लेकिन मरीजों के लिए इनकी उपस्थिति ही नही होगी अथवा ये काम नही कर रहे होंगे।

जनरेटर जैसी विद्युत आपूर्ति अस्पताल में ठप हुई नजर आएगी, जिसको लेकर परिजनों और मरीजों द्वारा समय-समय पर शिकायत की जाती रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन इस मुद्दे पर बेहद शांत नजर आता है।