उदय बुलेटिन
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चौंकिए मत ये कोई रेत खदान नहीं बल्कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई ग्रामीण लिंक सड़के है, जो भारी वाहनों के ओवरलोड चलने की वजह से अब पथरीले मैदान जैसी हो चुकी है
चौंकिए मत ये कोई रेत खदान नहीं बल्कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई ग्रामीण लिंक सड़के है, जो भारी वाहनों के ओवरलोड चलने की वजह से अब पथरीले मैदान जैसी हो चुकी है|Uday Bulletin
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ग्रामीण सडकों को ओवरलोड वाहनों ने नेस्तनाबूत कर दिया, प्रशासन गहन निद्रा में। 

अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों की निकासी ने स्थानीय ग्रामीण सडकों को नक्शे से गायब कर दिया है। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

एक तो गुणवत्ता विहीन सड़कें ऊपर से भारी वाहनों का ओवरलोड रेत लेकर गुजरना इन दिनों ग्रामीण सडकों के लिए काल साबित हो रहा है यही कारण है कि मटौन्ध ग्रामीण क्षेत्र में आने वाले ग्राम लोहरा - इंटवा के ग्रामीण संपर्क मार्गो की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है, स्थिति इतनी बदतर है कि ट्रैक्टर के अलावा कोई भी छोटा वाहन निकलने से पहले हजार बार सोचेगा, अगर आप मोटरसाइकिल से यात्रा कर रहे है तो यह निश्चित है कि आप अपने वाहन से गिरकर चुटहिल अवश्य होंगे।

मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश के लिए है सुगम रास्ते :

चूंकि मध्यप्रदेश से लाई हुई बिना रॉयल्टी की रेत ( अवैध रेत) आप प्रशासन की नजर बचाकर तभी ला सकते है जब आप इन ग्रामीण संपर्क मार्गो के द्वारा निकले, यही कारण है कि जब मुख्य मार्गों पर प्रशासन की चहल पहल होती है तो रेत माफियाओं द्वारा इन रास्तो का चयन किया जाता है। यही कारण है कि जो सड़के बमुश्किल साल भर पहले बनाई गई थी या फिर उनकी रिपेयरिंग हुयी था अब उस सड़क पर केवल गड्ढे और पत्थर बचे हुए है।

मुख्य रोड पर अधिकारी, और अवैध वाहन ग्रामीण सड़को पर :

जैसे ही बड़े वाहनो के काफिलों के साथ चलने वाले लोकेशन बाजो को यह पता चलता है कि फला जगह खनिज विभाग अथवा आरटीओ द्वारा सघन चेकिंग कराई जा रही है तब टनों वजनी वाहनों को ग्रामीण सड़को पर दौड़ा दिया जाता है, नतीजन सडकों को गड्ढों में तब्दील होते देर नहीं लगती,

हालांकि ऐसा नही है कि पुलिस विभाग को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन रेत माफिया और पुलिस के बीच होने वाली साठगांठ से यह संभव हो जाता है।

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