हाथरस मामला: कहीं ऐसा तो नही कि सच को तोड़मरोड़ कर अलग तरीके से पेश किया गया हो

हाथरस मामले में कहीं दबाव में आकर पीड़िता का परिवार गलत इल्जाम तो नहीं लगा रहा है और अगर ऐसा नहीं है तो क्यों नहीं करा रहे है नार्को टेस्ट ? या भी फिर अभी तक कुछ ऐसे राज़ है जिन पर पर्दा-दारी है।
हाथरस मामला: कहीं ऐसा तो नही कि सच को तोड़मरोड़ कर अलग तरीके से पेश किया गया हो
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हालांकि यह बात सच है कि मृतक मनीषा के साथ भयानक मारपीट हुई और उसी मारपीट की वजह से मृत्यु हुई लेकिन सामूहिक बलात्कार जैसी घटना से न सिर्फ प्रशासन ने इनकार किया बल्कि इस बात को लेकर स्थानीय लोग मुखर होकर बोलते हुए नजर आ रहे है। लोगों का आरोप है कि मीडिया सनसनी बनाने के लिए पत्रकारिता जगत ने परिवार को रेप कांड बनाने जैसे कार्यो के लिए उत्साहित किया है। आने वाले समय मे अगर यह सच निकलता है की राज बताये गए कथानक से अलग है तो क्या मीडिया खुद को माफ़ कर पायेगा।

सभी आरोपियों को लेकर संशय पैदा होता है:

अगर पीड़िता की माने तो इस संबंध में पीड़िता ने मामले के होते ही सबसे पहले बयान और सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो प्रसारित किए जिनके अनुसार यह समझ मे आता है कि पीड़ित परिवार और आरोपित परिवार के बीच किसी प्रकार की जातीय दुश्मनी थी।

खुद पीड़िता की माँ द्वारा एक वायरल वीडियो में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि इससे पहले उनके ही परिवार के सदस्य का सर फाड़ा गया था। बयान के दौरान खुद पीड़िता यह बताते हुए नजर आती है कि हमले को अंजाम देने वाला व्यक्ति सिर्फ अकेला था और पहले से एक रंजिस थी जिसकी वजह से इस घटना क्या अंजाम दिया गया।

दूसरे आरोपियों के अलग दावे:

एक ओर जहां मीडिया और राजनैतिक दबाव के चलते अन्य आरोपियों को बाद में नामजद किया गया उसपर परिजनों ने अलग दावे पेश किए है। रामू नामक तथाकथित आरोपी के परिजनों ने दावा किया है कि जिस वक्त यह घटना हई है उस वक्त रामू मौके पर मौजूद ही नहीं था।

बल्कि वह जिस निजी कंपनी में कार्यरत है वहाँ के सीसीटीवी कैमरे की डिटेल्स निकाल कर सत्यता की पुष्टि की जा सकती है। परिजनों के अनुसार अगर जाँच में हमारा लड़का दोषी पाया जाए तो उसे बिना किसी ट्रायल के फाँसी दे दी जाए। अन्यथा जातिवादी समीकरण के चलते उनके बच्चे को नाजायज तरीके से फ़साया जा रहा है।

परिजनों ने आरोप लगाए की केवल दलित होने की वजह से पीड़ित पक्ष को बेचारा बनाकर निर्दोष की बलि दी जा रही है। वही रामू के परिजनों ने इस बात से इनकार नहीं किया कि पीड़िता के साथ ज्यादती नहीं हुई बल्कि यह कहा कि संभव है कि मुख्य आरोपी ने पीड़िता के साथ मार पीट की हो लेकिन इस मामले में रामू का कोई हाथ दूर-दूर तक भी नहीं है।

मामले का एक दूसरा एंगल भी है:

अगर आरोपी व्यक्तियों के परिजनों की माने तो इस मामले में एक और चीज पाई गई है। परिजनों ने आरोप लगाए की यह मामला न तो बालात्कार का है और न ही एकतरफा लड़ाई का।

दरअसल यह मामला प्रेम प्रषंग का भी है। पीड़िता के भाई ने बीते दिनों में सोशल मीडिया में क्षत्रिय समुदाय के घर की बच्चियों की कुछ आपत्तिजनक तश्वीरें पोस्ट की थी जिसकी वजह से यह बवाल हुआ। हालांकि उदय बुलेटिन इस तरह के किसी दावे की पुष्टि नही करता।

हाथरस क्षेत्र का है कोई यह...अब इसकी सुनिए...

Posted by उखमजी बच्चे on Friday, October 2, 2020

पीड़ित परिवार बैकफुट पर:

हालांकि कुछ मामलों के बाद अब पीड़िता का परिवार बैकफुट पर नज़र आ रहा है दरअसल इस मामले को दिल्ली के चर्चित कांड निर्भया से जोड़कर देखा जा रहा था और बड़ी जांच की मांग की जा रही थी लेकिन जैसे ही सरकार ने सभी पक्षो/ पुलिस अधिकारियों के साथ पीड़ित और आरोपी पक्ष के नार्को टेस्ट की बात कही तो पीड़ित परिवार ने इससे किनारा कर लिया।

पीड़ित परिवार ने कहा है कि वह न्याय की मांग करते है लेकिन नार्को टेस्ट नहीं कराएंगे, दरअसल कानून के तहत यह छूट मिलती है कि वह चाहे तो नार्को टेस्ट की प्रक्रिया को नकार सकता है।

वही आरोपी लड़को के पक्ष को लेकर एक महापंचायत का भी आयोजन किया गया था जिसमे क्षेत्र के बड़े क्षत्रिय समुदाय ने अपनी हुंकार भरी थी।

सीएम योगी ने दिए सीबीआई जाँच के आदेश:

मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने हाथरस कांड के मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की है। सीएम ऑफिस के ट्वीटर हैंडल से इस बात की जानकारी दी गयी। उसमें लिखा है कि मुख्यमंत्री योगी ने पूरे हाथरस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की है।

डिस्क्लेमर: लेख में लिखे गए सभी विचार लेखक के है और उदय बुलेटिन का इन विचारों से सहमत होना आवश्यक नही है। उदय बुलेटिन हर स्थिति में पीड़िता के साथ खड़ा है।

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