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भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन 
भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन |Google
देश

“अन्ना हजारे के कारण मोदी सरकार सत्ता में आ पाई थी” - राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन छेड़ने वाले अन्ना हजारे से सोमवार को मुलाकात की।

AKANKSHA MISHRA

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अहमदनगर : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन छेड़ने वाले अन्ना हजारे से सोमवार को मुलाकात की। अन्ना हजारे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज छठां दिन है। ठाकरे विभिन्न मनसे नेताओं के साथ, रालेगण-सिद्धि गांव पहुंचे, जहां बाबूराव उर्फ अन्ना हजारे 30 जनवरी से अनशन पर बैठे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना (81) लोकपाल को लागू करने, सभी राज्यों में लोकायुक्त नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं और किसानों के मुद्दों भी उठा रहे हैं।

राज ठाकरे ने अन्ना हजारे के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि, मनसे अन्ना के साथ है । उन्होंने उन कारणों की प्रशंसा की जिसके लिए हजारे अपनी जान की परवाह किए बिना आंदोलन चला रहे हैं। हजारे से मिलने के बाद ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने उन्हें अयोग्य पाखंडियों के लिए अपनी जान खतरे में नहीं डालने के लिए कहा है.. हजारे के कारण मोदी सरकार सत्ता में आ पाई।"

साथ ही उन्होंने मोदी सरकार पर हमला करते हुए अन्ना हजारे को सलाह दी उन्होंने कहा, "अन्ना हजारे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी आश्वासन पर विश्वास नहीं करना चाहिए।" पिछले कुछ दिनों में हजारे का पांच किलोग्राम वजन कम हो गया है यद्यपि उनके शरीर के महत्वपूर्ण तंत्र सामान्य कार्य कर रहे हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने सोमवार को उनसे आंदोलन बंद करने की अपील की थी।

किस लिए लड़ रहे हैं अन्ना

दरअसल अन्ना हजारे का लोकपाल बिल के लिए आंदोलन साल 2011 में शुरू हुआ था। उस समय कांग्रेस की UPA सरकार सत्ता में थी। देश में भ्रष्टाचार बुरी तरह फैल चुकी था। कॉमन वेल्थ गेम, 2-जी घोटाला, कोल घोटाला, नेशनल गेम सहित भ्रष्टाचार के कई मामले दिन ब दिन सामने आ रहे थे। अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया उनकी मांग थी कि देश में फैलते भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए लोकपाल बिल को मंजूरी दी जाये। अन्ना का आंदोलन सफल हुआ और सदन में पेश किये जाने के 46 साल बाद 18 दिसंबर 2013 को लोकपाल बिल को मंजूरी मिली। हालांकि अन्ना के इस आंदोलन का फायेदा बीजेपी को मिला और भ्रष्टाचार के कई आरोपों के बाद लोकसभा चुनाव में सत्ता कांग्रेस के हाथ से निकल कर बीजेपी के कमल को मिली। लेकिन भ्रष्टाचार का मामला जस का तस था। साल 2016 में लोकपाल बिल दोबारा संसोधन के लिए सदन में लाया गया। जिसे जुलाई 2016 में पारित तो कर दिया गया लेकिन अब तक लागू नहीं किया गया। अन्ना हज़ारे आज भी उसी आंदोलन पर बैठे हैं।