महोबा का चर्चित इन्द्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड का मामला संसद में भी गूंजा।

महोबा के कबरई में पत्थर से पैसा बनाने की जुगत में अंधे है अधिकारी, पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकते है ये लोग। यहाँ के भ्रष्ट अधिकारियों को पैसा चाहिए चाहे उसके लिए किसी का क़त्ल ही क्यों न करना पड़े
महोबा का चर्चित इन्द्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड का मामला संसद में भी गूंजा।
Hamirpur BJP MP Pushpendra Singh ChandelGoogle Image

महोबा-हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद अशोक सिंह चंदेल ने महोबा इन्द्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड पर संसद में सवाल उठाये और महोबा जिले की इस वारदात पर नजर डालने अपील की। सांसद ने कहा कि जब आईपीएस लेवल के अधिकारी पर इस तरह के इल्जाम लगते है तो सवाल उठना जायज है।

सांसद ने संसद में उठाया मुद्दा:

महोबा कबरई के चर्चित इन्द्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड की गूंज अब केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं रही बल्कि इस मामले को भारतीय संसद के पटल पर पेश किया गया और आईपीएस मणिलाल पाटीदार की भागीदारी सामने आने पर निंदा व्यक्त की गई। महोबा हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से आने वाले भाजपा सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने इस बारे में सदन को बताया कि "देश हमेशा से देश की पुलिस का एहसानमंद रहा है, फिर चाहे वह हुतात्मा तुकाराम ओमले हो या तत्कालीन आईपीएस हेमंत करकरे सबने अपनी-अपनी जान देकर देश के लिए देकर लोगों की जान बचाई लेकिन महोबा के तत्कालीन एसपी आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने रिश्वतखोरी के नए मुकाम पार किये। खुद मृतक इन्द्रकांत त्रिपाठी ने इस मामले पर एक वीडियो वायरल किया था जिसकी वजह से व्यवसायी की जान तक चली गयी।

क्या व्यवसायियों के लिए खतरा है अफसरशाही?

हमीरपुर-महोबा सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने अपने वक्तव्य की शुरुआत भारत मे व्यवसायियों की दशा और दिशा से की, सांसद ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निवेश मॉडल की वजह से देशी-विदेशी कंपनियों के निवेश भारत और खासकर उत्तर प्रदेश में लगातार संभावनाओं की तरह बढ़ रहे है लेकिन अगर कबरई के हालात देखे जाए तो यहां स्थितियां बद से बदतर होती जा रही है। सांसद ने शंका व्यक्त करते हुए कहा कि अगर स्थितियां बदली नहीं गयी तो समस्या भयानक रूप लेती चली जायेगी।

कबरई के हालात बेहद खराब:

अगर कबरई के व्यवसाय की बात की जाए तो यहां की जमीनी स्थिति बेहद डराने वाली है। दरअसल कबरई की पत्थर मंडी भारत भर में जानी जाती है लेकिन इस कस्बे के आसपास सरकारी अमला पूरी नजर केवल और केवल पैसों पर नजर गड़ाए रहता है फिर चाहे वह खनिज विभाग हो या पुलिस अधिकारी या फिर जिलाधिकारी। सभी को अपना अपना हिस्सा टाइम से चाहिए, भले ही व्यवसायी को उसके लिए नैतिक-अनैतिक को अलग रखकर काम करना पड़े। कबरई में काम करने वाले लोगों ने दबी जुबान में उदय बुलेटिन को बताया कि कबरई थाने में कमाई के जरिये इतने ज्यादा है कि यहां एक एसआई की पोस्टिंग पाने के लिए उच्चाधिकारियों को लाखो का चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है और कमोबेश यही हालत जिलाधिकारी और खनिज अधिकारी समेत एसपी के पद के लिए भी है। यकीनी तौर पर पत्थर नगरी आज केवल अफसरशाही की तानाशाही की वजह से घुट-घुट कर मर रही है।

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उदय बुलेटिन
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