महोबा का कबरई बांध सिचाई और राजस्व विभाग के लिए सोने की मुर्गी बन गया

महोबा के कबरई बांध ने किसानों की जिंदगी बनाने के बजाय खराब कर दी, पहले उचित मुआवज़ा नहीं मिला फिर दलालों और बैंक ने किसानों को चूना लगा दिया। किसान गरीब से और गरीब होता गया और दलाल रईस।
महोबा का कबरई बांध सिचाई और राजस्व विभाग के लिए सोने की मुर्गी बन गया
Mahoba Kabrai damUday Bulletin

हालात यह है कि जिन दलालों के पास एक बीघे भी जमीन नही थी आज वो सिर्फ दलाली के दम पर करोड़ों डकार कर बैठे है। स्थितियां इस कदर बनी बिगड़ी की किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को 10-10 लाख रिश्वत दी है। यह परियोजना असल मायने में दलालों और अधिकारियों के लिए अलादीन का चिराग बन गयी।

कबरई क्षेत्र में लूट का गवाह बना बांध:

सरकार की परियोजनाओं का निर्माण आमजन के विकास के लिए होता है जिससे आमजन का जीवन सुगम और सरल हो सके लेकिन अगर बीते कुछ सालों की स्थितियां देखे तो उत्तर प्रदेश के महोबा जिले समेत हमीरपुर जिले में अर्जुन बांध परियोजना को धरातल पर उतारा गया। जिससे बुंदेलखंड के सूखे क्षेत्र को पानी की उपलब्धता कराई जा सके। लेकिन वर्षों पहले इस मामले की जानकारी विभागीय अधिकारियों को हुई तो उन्होंने जुगाड़ लगाकर अपने ट्रांसफर महोबा जिले और खासकर कबरई क्षेत्र में कराने शुरू किए।

दलाली की भेंट चढ़ी परियोजना:

इस परियोजना में सबसे ज्यादा मुआवजा, कबरई, गंज (शहीद बालेन्द्र सिंह नगर), गुगौरा, कालीपहाड़ी, अलीपुरा, झिर जैसे गांवों को मिला और लूट खसोट भी इन्हीं जगहों पर हुई। हर गांव में नवोदित दलालों की खेप तैयार हुई जिन्होंने 5 परसेंट से लेकर 10 परसेंट तक दलाली ली। सिंडिकेट में बड़े-बड़े रसूखदार से लेकर फर्जी के दलाल संक्रिय हुए और एक-एक अनपढ़ गरीब किसान से लाखों रुपये वसूले गए और बिना किसी रोजगार के दलाल आज करोड़पति बने बैठे नजर रहे है।

बैंको ने धर के लूटा:

किसानों को मिले भारी मुआवजे के बाद दूसरी समस्या बैंको के साथ नजर आयी। किसानों को पैसा डबल करने वाली सो काल्ड योजनाओं के तहत भारी भरकम रकम को म्यूचुअल फंड जैसी योजनाओं में जमा कराया गया जबकि मजे की बात तो यह है कि किसानों को यह भी पता नही की आखिर ये फंड होता क्या है फिर भी सब्जबाग दिखाकर बड़ा निवेश कराया गया। आज वही किसान अपने कम होते हुए रुपयों को देखकर आंसू बहा रहे है।

जो भी हो ये कबरई बांध बहुत लोगों के लिए लाभकारी साबित हुआ और कुछ किसानों का हिस्सा दलालों के हिस्से में गया। हालाँकि ये बेहद संवेदनशील मामला है और इसपर कोई भी व्यक्ति खुलकर बोलना ही नहीं चाहता। संदिग्ध दलालों की जांच कराई जाए तो सारा भेद खुलकर सामने आ जायेगा।

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उदय बुलेटिन
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