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Tata steel
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जैसे मायानगरी मुंबई कभी सोती नही है, वैसे ही टाटानगरी(जमशेदपुर) कभी रोती नही |

जमशेदपुर (टाटानगर) स्वर्णरेखा और खरकई नदी के किनारेबसा एक ऐसा शहर जिसकी आज की वास्तविकता की कल्पना तकरीबन 100 साल पहले ही कर लीगयी थी , ये भारत का पहला व्यवस्थित शहर है जिसे प्लान कर बसाया गया |

Divyanshu Singh

Divyanshu Singh

जमशेदपुर भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्पूर्ण हिस्सा है | भारत का पहला स्टील प्लांट टाटा स्टील लिमिटेड , तत्कालीन (टिस्को ) की शुरुवात 1907 में जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने साक्ची नामक गांव में की, जिनके नाम पर ही तत्कालीन साक्ची गांव आज जमशेदपुर है | यूँ तो जमशेदपुर का नाम ज़हन में आते ही पहली जो छवि बनती है , वो एक औद्योगिक नगरी की जहाँ ढेरो कंपनियां हैं , जो बड़े बड़े स्टील प्लेट , स्टील से निर्मित सामान बनातीं हैं, और ये सच भी है पर जमशेदपुर अपने आप में अनोखा शहर है |

जमशेदपुर के बारे में एक कहावत मशहूर है , “जैसे मायानगरी मुंबई कभी सोती नही है वैसे ही टाटानगरी कभी रोती नही है” | जैसे लोग मुंबई जाते हैं अपने सपने पूरे करने लिए , वैसे ही जमशेदपुर में शारीरिक रूप से सक्षम इंसान कभी नही रोता क्यूंकि यहाँ हर किसी के लिए काम है | इसका कारण जमशेदपुर से सटा हुआ एशिया का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया, आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया है जिसमे 5000 छोटी बड़ी कंपनियां हैं, कई ऐसी बातें हैं जो जमशेदपुर को अनोखा बनती हैं उनमे से सबसे महत्वपूर्ण बात ये हैं की हर शहर के किसी कोने या किसी विशेष भाग में औद्योगिक कारखाने होते हैं पर जमशेदपुर इसके एकदम उलट है, पूरा जमशेदपुर शहर टाटा स्टील के चारो ओर बसा है |

भारत भर के लोग यहाँ मिल जायेंगे और साथ ही पूरे भारत के खानपान की झलक भी यहाँ देखने को मिलती है, चूँकि यहाँ लगभग हर राज्य के लोग रहते हैं इस वजह से यहाँ हर त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाया जाता है यहाँ के प्रमुख त्योहारों में , दुर्गा पूजा, ईद, रथ यात्रा , टुसू पर्व , होली , दिवाली इत्यादि है |

Dalma wildlife sanctuary
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प्रकृति की गोद में बसा जमशेदपुर, प्राकृतिक और कृत्रिम सुन्दरता के लिए भी मशहूर है , प्रकृति की बात की जाये तो शहर में हरियाली पर विशेष ध्यान दिया जाता हैं | पर्यटन की दृष्टी से ,यहाँ बहुत से सुन्दर और रमणीय स्थान है, जिसमे शहर से मात्र 10 किलोमीटर दूर दलमा वन्य अभ्यरण जो 195 स्क्वायर किलोमीटर में फैला स्थित है , जिसका उद्घाटन संजय गाँधी ने 1975 में किया था | यूँ तो इस वन्य अभ्यारण में तमाम तरीके के जीव जंतु जिसमे हिरन इत्यादि शामिल हैं , पर यह भारतीय हाथियों के लिए जाना है |

Jubilee Park
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जुबिली पार्क 500 एकड़ में फैला बेहद ही ख़ूबसूरत पार्क है जिसकी स्थापना सन 1958 में हुयी थी यह पार्क शहर के बीच में साक्ची नमक जगह पर स्थित है, पर्यटन के नज़र से यह झारखण्ड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है |

Chandil Dam
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चांडिल डैम शहर से 30 किलोमीटर दूर दमला पहाड़ियों की गोद में बसा 220 मीटर ऊंचा डैम है जहाँ दो नदियाँ कारकोरी और स्वर्णरेखा मिल कर डैम को प्राकृतिक रूप से जल उपलब्ध कराती हैं | यह डैम लोगों के पसंदीदा पिकनिक स्पॉट और झारखण्ड के पर्यटन स्थलों में से एक है |

Dimna lake
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डिमना लेक शहर से 13 किलोमीटर दूर पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़म ब्लाक में स्थित एक मानव निर्मित लेक है जिसमे स्वर्णरेखा का जल जरुरत के हिसाब से स्टोर किया जाता है और इस लेक से पहाड़ो का मोहक दृश्य इसे एक घुमने लायक जगह बनाता है , यहाँ सालों भर लोगों का ताँता लगा रहता है |