ग्राम लोहरा में कब्जे को लेकर हुई पंचायत, पुलिस समेत राजस्व के अधिकारियों ने किया मौके पर निबटारा

विवाद को ख़त्म करने के लिए जमीन को दो हिस्सों में बाँट दिया गया
ग्राम लोहरा में कब्जे को लेकर हुई पंचायत, पुलिस समेत राजस्व के अधिकारियों ने किया मौके पर निबटारा
Lohara Banda Land DisputeUday Bulletin

बांदा जिले के थाना मटौन्ध अंतर्गत आने वाले ग्राम लोहरा के इस मामले में पुलिस ने राजस्व लेखपाल की मदद से दोनो पक्षों की आपसी सहमति के बाद जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया ताकि दोनो पक्ष अपनी अपनी जमीन पर निर्माण कर सकें

दोनो पक्षों के पास कोई दस्तावेज उपलब्ध ही नहीं:

चूंकि दोनो पक्ष इस जमीन पर केवल कब्जे की बात कहकर ही लंबे वक्त से अड़े हुए थे जिसमें झगड़े को लेकर कई बार मटौन्ध थाने में तहरीर दी गयी थी। मामले को लेकर दोनों पक्षों द्वारा क्रमशः राजस्व विभाग के अधिकारियों तक अर्जियां भी पहुंचाई जाती रही इसके बाद तहसीलदार बांदा ने इस मामले के मौके पर निपटान के लिए राजस्व लेखपाल और थाना मटौन्ध के क्षेत्र प्रभारी के साथ एक अन्य सब इंस्पेक्टर को मौके पर जाकर निबटान करने के निर्देश जारी किए और ग्राम प्रधान ने इस मामले पर अपनी मध्यस्थता की भूमिका अदा की। चूंकि इस जमीन को लेकर दोनों पक्षो के पास कोई दस्तावेज उपलब्ध ही नही थे इसलिए दोनों पक्षो के विवाद को मिटाने के लिए जमीन को दो हिस्सों में बांट कर अलग किया गया।

लोगों के अनुसार जमीन गुप्ता से संबंधित:

स्थानीय निवासियों ने बताया कि जमीन पर सबसे पुराना कब्जा जागेश्वर गुप्ता का बताया जा रहा है जिसपर वह लंबे समय से अपने घरेलू निस्तारण का कार्य करता चला आ रहा है इसके काफी लंबे अरसे बाद गांव के ही दूसरे व्यक्ति बसोरी पुत्र बुद्धू ने अपना दावा ठोक दिया और जमीन के एक हिस्से पर एक झोपड़ी बना ली, जिसपर दोनो पक्षो में जमीन के मालिकाना हक को लेकर काफी विवाद हुआ, इसके बाद प्रथम पक्ष जागेश्वर गुप्ता के द्वारा जमीन के एक हिस्से पर एक अस्थाई दुकान का निर्माण किया गया जिसको लेकर बसोरी पुत्र बुद्धू और उसके पुत्र ने इसका विरोध किया हालांकि विवाद होने पर थाना मटौन्ध पुलिस ने समय समय पर अपनी सकारात्मक भूमिका अदा की।

अब जाकर हुआ निबटान:

इस मामले में लंबा वक्त खिंचने पर हल्का प्रभारी समेत राजस्व विभाग भी काफी समय से परेशान था जिसपर ग्राम प्रधान की अगुवाई में राजस्व लेखपाल और थाना मटौन्ध पुलिस की मौजदूगी में दोनो पक्षों की आपसी रजामंदी की वजह से जमीन को दो टुकड़ों में बाटना मुनासिब समझा गया। हालांकि इस मामले को लेकर प्रथम पक्ष जागेश्वर गुप्ता ने यह बात कही कि जमीन उसी की है जो कि पुश्तैनी है लेकिन विवाद से बचने और सरकारी तामझाम से दूर रहने के लिए उसने समझौता किया है। हालांकि अभी भी सत्य यही है कि जमीन उसी की है।

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उदय बुलेटिन
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