क्या है अनुच्छेद-35ए, इसे हटाने से भारतीयों को क्या होगा फायदा ?
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क्या है अनुच्छेद-35ए, इसे हटाने से भारतीयों को क्या होगा फायदा ?

जम्मू कश्मीर मे लगा अनुच्छेद-35ए देश में अलगाववाद की स्थिति उत्पन्न करता है इसलिए अक्सर ही इसे हटाने की मांग उठती रहती है और संभव है कि 15 अगस्त तक इस पर फैसला सरकार ले सकती है। 

आजकल देशभर के लोगों की नजर कश्मीर पर बनी हुई है और हो भी क्यों ना भला, आए दिन कुछ न कुछ वहां लगा ही रहता है, इसी बीच ये खबर सुनने को मिली कि कश्मीर में 15 अगस्त को कुछ बड़ा होने वाला है। जी हां जब से केंद्र में अमित शाह ने गृहमंत्री का पद संभाला है तभी से कई लोगों के मन में डर समा गया है। ऐसे में अभी कुछ ही दिन पहले ये सुनने को मिला कि जम्मू कश्मीर में अचानक भारी संख्या में सेना भेजी गई हैं, इस जानकारी के बाहर आते ही उमर अब्दुल्ला व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जैसे कश्मीरी नेता तिलमिला उठे और केंद्र सरकार पर उंगली उठाने लगे, उनका कहना था कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 35 ए हटाने के लिए भाजपा ने यह नई चाल चली है।

दूसरी ओर भाजपा ने अपने बचाव में कहा कि ऐसी कोई बात नही हैं यह इन नेताओं का वहम है, रही बात सेना की तो वो बस के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए उतारे गए हैं। कई जानकारों का कहना है कि कश्मीरी नेताओं का ये वहम सच भी साबित हो सकता है क्योंकि अभी हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जम्मू कश्मीर का जायजा लेने भी पहुंचे थे। वैसे देखा जाए तो ये मुद्दा नया नहीं है और न ही पहली बार इस पर बहस छिड़ी है बल्कि ये पिछले 5 साल से लगातार चर्चा में बना हुआ है और आए दिन इसे लेकर कई सारी बातें होती ही रहती हैं। अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये अनुच्छेद 35 ए है क्या, और इसको लेकर इतना बवाल क्यों मचा है ?

अनुच्छेद 35 ए
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क्या है धारा 35-ए

इस मुद्दे को समझने के लिए सबसे पहले अनुच्छेद 35 ए को समझना होगा। दरअसल यह साल 1952 की बात है जब जम्मू कश्मीर में शेख अब्दुल्ला की सरकार थी उस दौरान भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साथ शेख अब्दुल्ला ने एक समझौता किया था जिसे 'दिल्ली समझौता' के नाम से जाना जाता है। इस समझौते के जरिए जम्मू कश्मीर में रहने वाले नागरिकों को भारत की नागरिकता देने का फैसला लिया गया था। इसके 2 साल बाद यानि की 1954 में इस समझौते को भारतीय राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान में भी जोड़ दिया, जिसे अनुच्छेद 35-ए के नाम से जाना जाने लगा। इतना ही नहीं इस अनुच्छेद के जरिए जम्मू कश्मीर को कुछ विशेषाधिकार भी प्राप्त हो गए जिसका फायदा वो हमेशा से ही उठाता आया है।

ये हैं वो विशेषाधिकार

अनुच्छेद 35 ए के जरिए कश्मीर के विधानमंडल को ये अधिकार दिया गया कि वो जिसे चाहे उसी को वहां का स्थायी निवासी का दर्जा दे सकता है। इसके अलावा यह भी तय हुआ कि इस राज्य में मिलने वाली सभी मूलभूत सुविधाओं जैसे- नौकरी हो या प्रॉपर्टी या फिर सरकारी मदद से लेकर जनकल्याण योजनाओं का लाभ केवल स्थायी निवासी ही उठा सकेंगे।

क्यों उठी अनुच्छेद 35 ए हटाने की मांग

दरअसल जम्मू कश्मीर में लगे अनुच्छेद 35 ए से उसे जो विशेष अधिकार मिले हैं उसकी वजह से कई बार अलगाववाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। क्योंकि जो भी हो कश्मीर भारत का ही एक हिस्सा है पर जब कानून की बात आती है तो वो कई बार अपने विशेषाधिकार के कारण मनमानी भी करता आया है। बार बार कश्मीर अपने अलग होने का आभास कराता है। इसके विशेषाधिकार के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जिन्हें अभी तक वहां का स्थायी निवासी का दर्जा नहीं मिला है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि जम्मू की नागरिकता प्राप्त करने के लिए उसके कुछ अपने नियम व शर्तें हैं जिनके आधार पर वहां की सरकार आमजन को कश्मीर की नागरिका देती हैं -जैसे कि जम्मू कश्मीर की नागरिकता उसी को मिल सकती है जो वहां साल 1954 से ही रह रहा हो या फिर इससे भी 10 साल पहले से उस राज्य में रह रहा हो या उस राज्य में पहले से ही उसकी कोई संपत्ति हो।

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इससे भारतीयों को क्या होगा फायदा

सबसे खास बात तो यह है कि अनुच्छेद 35 ए को संसद ने नहीं बल्कि राष्ट्रपति ने लागू किया था और अगर कश्मीर से इसे हटा दिया गया तो इसका फायदा भारतवासियों को अवश्य मिलेगा। आए दिन कश्मीर भारतीय नागरिकों के साथ भेदभाव वाला बर्ताव करता है, इतना ही नहीं अगर कोई महिला वहां शादी करके जाती है तो उसके साथ भी धारा 35 ए के बिनाह पर अलग तरीके का व्यवहार किया जाता है। ऐसे में इस अनुच्छेद का हटना बेहद आवश्यक है।

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उदय बुलेटिन
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