वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखे तो होगा चालान, लेकिन राजनीति का क्या?

यूपी में गाड़ियों पर जातिसूचक शब्द लिखने पर होगा चालान।
वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखे तो होगा चालान, लेकिन राजनीति का क्या?
वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखे तो होगा चालानUday Bulletin

उत्तर प्रदेश टशन का प्रदेश है, यहां ब्राम्हण से लेकर क्षत्रिय और द ग्रेट चमार तक के पोस्टर मिल जाएंगे। गाड़ी पर कोई आईएएस अधिकारी भी अपनी पदवी को इतने अदब और सम्मान के साथ नही लिखता होगा जितने सम्मान से यहाँ लोग जाति सूचक शब्दों को वाहनों पर चिपकाते है लेकिन अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर कड़ा निर्देश जारी किया है।

नए आदेश में जिन वाहनों पर जाति सूचक शब्दों का उल्लेख होगा वो गाड़ियाँ सीज भी की जा सकती है और लंबा चालान काटा जा सकता है, लेकिन इसके पीछे लोगों ने सरकार की मंशा पर भी सवाल दाग दिए है। राजनीतिक हल्के में जिन जातीय समीकरणों का इतना ज्यादा बोलबाला है उन्हें किसी की गाड़ी पर जातिसूचक शब्दों के लिखाने पर दंड देने का कोई अधिकार नही है"

अगर गाड़ी पर जाति लिखी तो जेब हल्की हो जाएगी:

जिस वक्त भारत बेहद उथल पुथल वाले दौर से गुजर रहा है ऐसे वक्त में अचानक से सरकार का ध्यान इन मामलों पर गया कैसे इसके लिए हमें एक पुराने मामले को देखना पड़ेगा दरअसल महाराष्ट्र के एक शिक्षक श्री हर्षपाल प्रभु द्वारा प्रधानमंत्री को (IGRS) पोर्टल पर 4/12/2020 को एक संदर्भ शिकायत दर्ज की गई जिसमें प्रभु द्वारा प्रधानमंत्री को बताया गया कि वाहनों पर जातिसूचक शब्दो के लेखन से भारतीय समाज के समरसता को न सिर्फ चोट पहुँचती है बल्कि इससे समाजिक तानाबाना तार तार हो रहा है, हर्ष प्रभु ने अपने मामले में प्रधानमंत्री को कुछ बाते इंगित की जो निम्नवत है।

  1. हमने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में इस तरह के प्रचलन को देखा है जिसमें अपनी जातिसूचक शब्दावली को वाहन की नम्बर प्लेट पर लिखकर अपनी पहचान को ग्लोरीफाई किया जाता है।

  2. इस तरह के मामलों पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए, क्योंकि इस से ला एंड ऑर्डर की विशेष स्थितियां उत्पन्न होती है या हो सकती है।

  3. प्रभु ने अपने मामले में प्रधानमंत्री से निवेदित किया कि इस तरह के उदाहरणों का केवल एक ही मतलब हो सकता है कि लोग अपनी जाति को लिखकर दूसरों की जाती को नीचा दिखाने का कार्य करते है।

  4. हालांकि वाहन की नंबर प्लेट का जो वास्तविक मतलब है वह वही है वाहन की पहचान जाहिर करना।

  5. जातीय हिंसा रोकने हेतु वाहनों पर लगे हुए जातिसूचक शब्दों के लेखन पर कड़ाई से पाबंदी लगानी चाहिए।

इस तरह के मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने तत्काल प्रभाव से उत्तर प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारियों के पास एक निर्देश भेजा जिसपर उत्तर प्रदेश के अपर परिवहन आयुक्त ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में संबंधित अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए जिसके चलते वाहनों और वाहन की नम्बर प्लेट पर जाति सूचक शब्दों के लिखने पर चालान और वाहन सीज करने की प्रक्रिया क्या अंजाम दिया जाएगा।

लेकिन कुछ बाते शायद प्रभु जी लिखना भूल गए:

वैसे तो भारतीय कानूनों और वाहन नियमावली के अनुसार नम्बर प्लेट पर कुछ भी लिखना गैरकानूनी है फिर चाहे वह जातिसूचक शब्द हो या "घर कब आओगे "साजन तेरी सहेली" जैसे मजेदार स्लोगन सब के सब गैरकानूनी ही है। लेकिन ये सब लंबे वक्त से चला आ रहा है। सरकार के दिशा निर्देशों के बारे में अनभिज्ञ लोगों पर अब इसका ठीकरा फूटना तय है। जो भी हो जो गलत है सो गलत लेकिन शायद प्रभु जी को वाहनों पर जातिसूचक शब्द ज्यादा खटके, लेकिन भारतीय राजनीति में जिस तरह जातिवाद को आगे रखकर संविधान को तोड़ा मरोड़ा जाता है उसपर या तो प्रभु जी देख नही पाए या फिर इससे उन्हें कोई फर्क नही पड़ता।

दरअसल इस सरकारी आदेश के बाद सोशल मीडिया पर एक अनचाही बहस छिड़ गई जिसमें लोगों द्वारा सवाल दागे गए कि क्या किसी की गाड़ी पर जातिसूचक शब्द लिखे होने की वजह से आजतक को दंगा हुआ है, लेकिन जातिवाद के बल पर खड़ी की गई राजनीतिक पार्टियां हज़ारों लाखों लोगों की मौत की जिम्मेदार है, उसका क्या? क्या भारतीय चुनावों में जाति को लेकर बयान नही दिए जाते ? कुछ लोगों ने तो यह भी तस्दीक की अगर भारत के चुनावों में जातीय सूचक शब्दों का प्रयोग बंद हो जाये तो एक झटके में सैकड़ों राजनीतिक दल गायब हो जाएंगे। चूंकि मामला राजनीति से जुड़ा हुआ है तो इस मसले पर कोई भी आदेश निर्देश जारी नही होने वाला।

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उदय बुलेटिन
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