बुंदेलखंड में महिलाओं ने उठाया जल जंगल जमीन का मुद्दा, जल सखी कर रहीं है आंदोलन

जल जंगल जमीन के लिए जल सखी कर रहीं है आंदोलन
बुंदेलखंड में महिलाओं ने उठाया जल जंगल जमीन का मुद्दा, जल सखी कर रहीं है आंदोलन
जल जंगल जमीन के लिए जल सखी कर रहीं है आंदोलनUday Bulletin

उत्तर प्रदेश के बेहद पिछड़े इलाके बुंदेलखंड के जिले बाँदा में इन दिनों एक छोटी तहसील पैलानी में महिलाओं के एक समूह "जल सखी" द्वारा रिश्वतखोर अधिकारियों और दलाल पत्रकारों के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, हालांकि इस आंदोलन की धमक उतनी ज्यादा नही है जितनी किसान आंदोलन या सीएए के आया हौव्वा होता रहा है लेकिन असल मे ये एक वास्तविक आंदोलन है जिसके शुरुआत में ही समाज का वो अंग है जिसे घर के चूल्हे चौके से बाहर निकलने की आजादी नही होती।

जल सखी कर रही भ्रष्टाचार का विरोध:

पैलानी तहसील में इन दिनों जल सखी नामक महिलाओं के समूह द्वारा आंदोलन किया जा रहा है और आंदोलन का मुख्य केंद्र है पैलानी एसडीएम और एक दलाल पत्रकार। साथ ही महिलाओं द्वारा नदियों में अवैध खनन की प्रक्रिया को लगातार उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं का आरोप है कि खनन महिलाओं द्वारा एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट, खनिज मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय के आदेशों और निर्देशों के बावजूद भी अपनी हरकतों से बाज न आकर नदियों का समूल दोहन किया जा रहा है , जिससे क्षेत्र का जीना मुहाल हो गया है, और स्थानीय सरकारी तंत्र कुछेक पत्रकारों के साथ मिलकर पर्यावरण, नदी, जिले और राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

मची हुई है लूटमार:

जल सखी संगठन की अध्यक्ष उषा निषाद ने ज्ञापन में दी गयी जानकारी से जिलाधिकारी बाँदा और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराने का प्रयास किया है कि पैलानी के खप्टिहा कला के खंड 100/1 में हैवी मशीनों के द्वारा लगातार खनन कराया जा रहा है जबकि नियमवली में इस बिंदु का विशेष उल्लेख है कि बहती धारा में हैवी मशीनों का प्रयोग पूरी तरह से निषिद्ध है वही मशीनों द्वारा लीज और डीड की शर्तों का खुला उल्लंघन करके सरकार के राजस्व, पर्यावरण को पूरा नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

आरोपों के अनुसार उक्त खनन कर्ता कंपनी द्वारा सूर्यास्त के बाद भी निर्धारित खनन गहराई तीन मीटर से अधिक खनन कराया जा रहा है जबकि जिले के खनन अधिकारी, प्रदूषण अधिकारी और राजस्व के अधिकारी एसडीएम चहेते पत्रकार के द्वारा प्रसादित होकर नदी और आसपास के क्षेत्र को कुरूप करने पर आमादा है।

क्या हो सकते है दुष्प्रभाव?

सबसे पहले यहां पर यह जानकारी देना आवश्यक है कि यह क्षेत्र बेहद निचले जलस्तर वाला क्षेत्र है, अंधाधुंध रेत खनन इसमें कोढ़ और कोढ़ पर खाज की स्थिति पैदा कर रहा है। भविष्य में क्षेत्र में सूखा, बाढ़ और अकाल जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती है, यही नही इस अंधाधुंध खनन की वजह से नदी में विकसित जैव विविधता पर भी संकट खड़ा हो गया है, दरअसल आंदोलनकारियों ने केन नदी में घड़ियाल के जीवन संकट पर खनन माफियाओं और अधिकारियों पर आरोप लगाए है। आरोपों के अनुसार केन नदी में विकसित होने वाले घड़ियाल बालू/मौरंग में आकर प्रजनन करते है लेकिन इस खनन से उनके जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया है।

जिले भर में चल रहा है यही कृत्य:

वैसे भी अगर आरोपों पर नजर डाले तो पूरे जिले में इन दिनों हाहाकार मचा हुआ है, जिले की हर खदान पर बालू कारोबारी लूट लो कि तर्ज पर लगे हुए है इसमें जिले का प्रशासन, पुलिस और पत्रकार लाबी प्रसादित होकर मौन व्रत लेकर बैठ चुकी है और मजबूर होकर घरेलू महिलाओं को आंदोलन पर बैठना पड़ रहा है।

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उदय बुलेटिन
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